Sonam Wangchuk Hunger Strike: जंतर-मंतर से हटाए गए सोनम वांगचुक, 20 दिन की भूख हड़ताल के बाद अस्पताल ले गई दिल्ली पुलिस
सोनम वांगचुक को 20 दिन की भूख हड़ताल के बाद दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर से अस्पताल ले गई। जानें पुलिस कार्रवाई, अभिजीत दीपके की हिरासत, संसद मार्च और हाईकोर्ट की सुनवाई से जुड़ा पूरा अपडेट।
Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली पुलिस ने शनिवार (18 जुलाई) सुबह जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचाया। सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से NEET पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे। उनकी लगातार बिगड़ती सेहत के बीच पुलिस ने यह कार्रवाई की।
प्रदर्शन स्थल से अस्पताल ले गई पुलिस
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पहुंची और सोनम वांगचुक को मेडिकल जांच एवं इलाज के लिए अस्पताल ले गई। इस दौरान प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को भी वहां से हटाया गया। पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति लगातार गंभीर बताई जा रही थी।
अभिजीत दीपके को भी हिरासत में लिया गया
इस कार्रवाई के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की।
उन्होंने लिखा, "दिल्ली पुलिस ने मुझे पीटा और हिरासत में रखा। मुझे मेरी ठहरने की जगह पर रोक लिया गया। लोगों से जानकारी मिली कि सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाया जा रहा है और छात्रों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है।"
हालांकि, पुलिस की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
20 जुलाई को संसद मार्च का था ऐलान
सोनम वांगचुक के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को संसद मार्च निकालने की घोषणा की गई थी। लेकिन प्रस्तावित मार्च से पहले ही पुलिस ने प्रदर्शन स्थल खाली कराते हुए वांगचुक को अस्पताल पहुंचा दिया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों और समर्थकों को भी वहां से हटने के लिए कहा गया।
दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई से पहले कार्रवाई
दिल्ली हाई कोर्ट में सोनम वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से पहले यह कार्रवाई हुई। इससे पहले अदालत ने निर्देश दिया था कि सोनम वांगचुक की रोजाना क्लिनिकल हेल्थ जांच की जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि किसी भी नागरिक का जीवन सर्वोपरि है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
डॉक्टरों ने जताई थी गंभीर चिंता
सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनके डॉक्टरों के अनुसार, लगातार 20 दिनों के अनशन के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है।
चिकित्सकों ने चेतावनी दी थी कि लंबे समय तक भोजन न लेने की वजह से उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने लगे हैं और यदि जल्द इलाज नहीं मिला तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

