SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, विपक्ष की याचिकाएं खारिज

Supreme Court of India ने SIR मामले में विपक्ष की सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। फैसले के बाद Ashok Gehlot ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर सवाल उठाए, जबकि Madan Rathore ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे देशहित में बताया।

SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, विपक्ष की याचिकाएं खारिज

SIR मामले में Supreme Court of India ने विपक्षी दलों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने विपक्षी पार्टियों द्वारा दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। फैसले के बाद जहां Bharatiya Janata Party में खुशी का माहौल है, वहीं विपक्षी दलों ने नाराजगी जताई है।

अशोक गहलोत ने उठाए वोटर लिस्ट पर सवाल

Ashok Gehlot ने फैसले के बाद कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान गलत तरीके से कई वोटरों के नाम काटे गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जबरन मतदाताओं को सूची से हटाया गया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

गहलोत का कहना है कि कई ऐसे लोगों के नाम भी हटाए गए जो वैध मतदाता थे।

मदन राठौड़ का पलटवार

गहलोत के आरोपों पर जवाब देते हुए Madan Rathore ने कहा कि केवल अनुपस्थिति के आधार पर किसी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जा सकता।

उन्होंने कहा, “अगर कोई व्यक्ति दूसरे राज्य में शिफ्ट हुआ है तो उसके मूल स्थान या पहले वाले राज्य के रिकॉर्ड के आधार पर नाम जोड़ा जाएगा।”

मदन राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का फैसला पूरी तरह सोच-समझकर लिया गया था।

घुसपैठियों को वोट बैंक बनाया गया

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कई बांग्लादेशी घुसपैठियों ने देश में आकर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा लिए।

उन्होंने कहा, “कुछ राजनीतिक दलों ने घुसपैठियों को यहां बसाकर वोट बैंक बनाने का काम किया। यह देशहित में ठीक नहीं है।”

राठौड़ ने कहा कि सरकार चुनने का अधिकार केवल देश के वैध नागरिकों को होना चाहिए।

क्या है SIR मामला?

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (Special Intensive Revision) के तहत मतदाता सूचियों की जांच और सत्यापन किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य फर्जी या डुप्लीकेट नाम हटाकर वोटर लिस्ट को अपडेट करना होता है।