INSIDE STORY: दूध बेचने वाले युवक से चंबल का खूंखार डकैत बनने तक की पूरी कहानी...जगन गुर्जर के नाम से कांपते थे लोग

राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के चंबल इलाके में वर्षों तक आतंक का पर्याय रहे कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की जिंदगी उतार-चढ़ाव और अपराधों से भरी रही। पिता के अपमान के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले जगन पर हत्या, अपहरण और फिरौती समेत 100 से अधिक मामले दर्ज हुए। कई बार आत्मसमर्पण करने और राजनीति में आने की कोशिश के बावजूद उसका आपराधिक सफर नहीं रुका।

INSIDE STORY: दूध बेचने वाले युवक से चंबल का खूंखार डकैत बनने तक की पूरी कहानी...जगन गुर्जर के नाम से कांपते थे लोग

राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के चंबल अंचल में करीब तीन दशक तक आतंक का पर्याय रहे कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक साधारण परिवार से निकलकर बीहड़ों का सबसे चर्चित नाम बनने और फिर अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या तक का उसका सफर कई सवाल छोड़ गया है।


पिता के अपमान ने बदल दी जिंदगी

धौलपुर जिले के बसई डांग गांव का रहने वाला जगन गुर्जर कभी दूध बेचने का काम करता था। बताया जाता है कि वर्ष 1994 में गांव के मंदिर में प्रसाद वितरण को लेकर उसके पिता का अपमान हुआ। इस घटना से आहत जगन ने विरोधियों के साथ मारपीट की और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए चंबल के बीहड़ों का रुख कर लिया। यहीं से उसने डकैत मोहन गुर्जर के गैंग का साथ पकड़ लिया और अपराध की दुनिया में कदम रख दिया।

100 से ज्यादा मुकदमे, तीन राज्यों में था खौफ

कुछ ही साल में जगन गुर्जर ने अपना अलग गैंग तैयार कर लिया। उस पर हत्या, अपहरण, फिरौती, डकैती और रंगदारी समेत 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हुए। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस लंबे समय तक उसकी तलाश करती रही, लेकिन चंबल के बीहड़ों की भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठाकर वह बार-बार गिरफ्त से बचता रहा।

कई बार किया सरेंडर, लेकिन नहीं छोड़ी अपराध की राह

जगन गुर्जर ने अपने जीवन में कई बार आत्मसमर्पण किया। एक बार बेटी की शादी के दौरान उसने अपराध छोड़ने की कसम भी खाई, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद फिर अपराध की दुनिया में लौट गया। 2018 और 2019 में भी उसने पुलिस अधिकारियों के सामने सरेंडर किया, मगर उसके खिलाफ दर्ज मामलों की वजह से वह फिर जेल पहुंच गया।

राजनीति में भी आजमाया हाथ

जेल से बाहर आने के बाद जगन ने राजनीति में भी किस्मत आजमाने की कोशिश की। उसने अपनी पत्नी को विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतारा, लेकिन चुनाव में हार मिली। इसके बाद उसके खिलाफ धमकी और रंगदारी के मामले फिर सामने आने लगे।

हाई सिक्योरिटी जेल में हुई हत्या

29 जून 2026 को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में जगन गुर्जर मृत मिला। शुरुआती जांच में हत्या की आशंका जताई गई। पुलिस के अनुसार, वारदात के समय वह दूसरे कैदी के साथ बैरक में था। जांच में जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे। रिपोर्टों में सामने आया कि जिस बैरक में जगन बंद था, वहां लगे सीसीटीवी कैमरे के लेंस पर टूथपेस्ट लगा मिला और घटना के दौरान निगरानी व्यवस्था प्रभावित रही।

क्या थी हत्या की साजिश?

जांच एजेंसियों को शुरुआती पड़ताल में संकेत मिले कि हत्या अचानक नहीं बल्कि सुनियोजित हो सकती है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, बैरक के भीतर पहले सामान्य बातचीत और खेल का माहौल बनाया गया, जिसके बाद हमला किया गया। हालांकि पुलिस अभी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

परिवार ने उठाए सवाल

जगन की मौत के बाद उसकी पत्नी और परिजनों ने हत्या को साजिश बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। परिवार ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। बाद में प्रशासन और परिजनों के बीच वार्ता के बाद कुछ मांगों पर सहमति बनी, लेकिन हत्या की गुत्थी अब भी जांच के दायरे में है।

करीब 30 वर्षों तक चंबल के बीहड़ों में आतंक का दूसरा नाम रहे जगन गुर्जर का अंत जेल की चारदीवारी के भीतर हुआ। उसके जीवन की कहानी बदले, अपराध, आत्मसमर्पण और विवादों से भरी रही। लेकिन उसकी मौत ने राजस्थान की हाई सिक्योरिटी जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

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