अंतरिक्ष में मिला रहस्यमयी 'हरा तारा', ग्रहों के टूटे हिस्सों को निगलने का दावा; सोडियम और हीलियम ने खींचा वैज्ञानिकों का ध्यान

अंतरिक्ष में पहली बार ऐसा सफेद बौना मिला है जो मानव आंखों को हरा दिखाई दे सकता है। जानिए WD J1330+6435 का रंग हरा क्यों है और ग्रहों के अवशेषों से इसका क्या संबंध है।

अंतरिक्ष में मिला रहस्यमयी 'हरा तारा', ग्रहों के टूटे हिस्सों को निगलने का दावा; सोडियम और हीलियम ने खींचा वैज्ञानिकों का ध्यान

अंतरिक्ष की दुनिया में वैज्ञानिकों को एक ऐसी अनोखी खगोलीय वस्तु के बारे में जानकारी मिली है, जिसने अपने असामान्य हरे रंग के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। इसे 'ग्रीन स्टार' यानी हरा तारा कहा जा रहा है। शुरुआती दावे के मुताबिक, इस तारे की रासायनिक संरचना और इसके आसपास हुई घटनाएं इसे दूसरे तारों से अलग बनाती हैं। बताया जा रहा है कि इसने अतीत में अपने आसपास मौजूद ग्रहों के टूटे हुए अवशेषों को भी निगला हो सकता है।

इस खोज से जुड़े दावे में सोडियम और हीलियम जैसे तत्वों की विशेष भूमिका बताई जा रही है। हालांकि, इस तारे की वास्तविक प्रकृति, हरे रंग के पीछे के कारण और ग्रहों के अवशेष निगलने की घटना की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक अध्ययन का मूल स्रोत देखना जरूरी है।

आखिर हरे रंग का क्यों दिखाई दे रहा है यह तारा?

आमतौर पर तारों को लाल, पीले, सफेद या नीले रंग के रूप में देखा जाता है। उनका रंग मुख्य रूप से सतह के तापमान और उनसे निकलने वाले प्रकाश के स्पेक्ट्रम पर निर्भर करता है। ऐसे में किसी तारे के हरे दिखाई देने का दावा वैज्ञानिकों के लिए उत्सुकता का विषय बन सकता है।

प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, इस खगोलीय वस्तु में सोडियम और हीलियम की खास रासायनिक स्थिति को इसके असामान्य रंग से जोड़ा जा रहा है। लेकिन केवल इन तत्वों की मौजूदगी से किसी तारे का हरा रंग दिखाई देना सामान्य खगोलीय व्यवहार नहीं है। इसलिए इस दावे को समझने के लिए तारे के प्रकाश का स्पेक्ट्रम, तापमान और अन्य रासायनिक तत्वों से संबंधित आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।

क्या इस तारे ने निगल लिए थे ग्रहों के अवशेष?

इस खोज से जुड़ा एक और दिलचस्प दावा यह है कि तारे ने अपने आसपास मौजूद ग्रहों के टूटे हुए हिस्सों को निगल लिया था। खगोल विज्ञान में तारों के आसपास ग्रहों के निर्माण से बची धूल, चट्टानी पदार्थ और अन्य अवशेषों का पाया जाना संभव है। कुछ परिस्थितियों में ये पदार्थ तारे की सतह तक पहुंच सकते हैं।

ऐसी घटनाओं का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करते हैं कि ग्रह प्रणालियों का विकास कैसे होता है और समय के साथ उनके ग्रहों का क्या भविष्य हो सकता है। हालांकि, इस विशेष हरे तारे के मामले में ग्रहों के अवशेष निगलने की घटना को प्रमाणित तथ्य मानने से पहले शोध पत्र या संबंधित अंतरिक्ष एजेंसी की रिपोर्ट की पुष्टि आवश्यक है।

अंतरिक्ष में ऐसी खोजें क्यों हैं महत्वपूर्ण?

तारों की रासायनिक संरचना का अध्ययन ब्रह्मांड के विकास को समझने में अहम भूमिका निभाता है। किसी तारे में असामान्य तत्वों की मात्रा या उसके प्रकाश में विशेष संकेत मिलने पर वैज्ञानिक उसके अतीत और आसपास मौजूद खगोलीय पिंडों के बारे में जानकारी जुटा सकते हैं।

यदि इस हरे तारे से जुड़े दावों की वैज्ञानिक पुष्टि होती है, तो यह तारों की रासायनिक संरचना और ग्रहों के अवशेषों के बीच संबंधों को समझने के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।