क्या बारूद के ढेर पर सो रही थी राजधानी? जानिये ये है वजहें....

जयपुर के खोह नागोरियान में अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 8 लोगों की मौत के बाद 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। हादसे के बाद नगर निगम, जिला प्रशासन और विस्फोटक विभाग की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

क्या बारूद के ढेर पर सो रही थी राजधानी? जानिये ये है वजहें....

जयपुर के खोह नागोरियान में अवैध पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट हादसे में अब तक केवल पुलिस विभाग पर ही गाज गिरी है, जबकि नगर निगम और जिला प्रशासन जैसे अन्य जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर रहस्यमयी चुप्पी बनी हुई है। इस दर्दनाक हादसे में 8 लोगों की मौत होने के बाद जयपुर पुलिस कमिश्नर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खोह नागोरियान थानाधिकारी (SHO) ओमप्रकाश मातवा सहित 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है, लेकिन जनता और स्थानीय नेताओं द्वारा सिस्टम के अन्य अंगों की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठाए जा रहे हैं। राजधानी के खोह नागोरियान थाना क्षेत्र की घनी आबादी वाली तलाई कॉलोनी (आयशा नगर) में मंगलवार सुबह जो धमाका हुआ, वह सिर्फ बारूद का विस्फोट नहीं था। वह स्थानीय प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के उस गठजोड़ का पर्दाफाश था, जो महज कुछ रुपयों की रिश्वत के बदले आम नागरिकों की जान का सौदा करता है। थाने से महज एक किलोमीटर की दूरी पर चल रही इस अवैध पटाखा फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने 8 लोग जिंदा जल गए। सवाल यह उठता है कि क्या बीट कांस्टेबल से लेकर थाना अधिकारी तक हीं, नगर निगम के सतर्कता दस्ते और विस्फोटक विभाग के इंस्पेक्टरों की आंखें सचमुच बंद थीं, या फिर उन्हें 'मौन' रहने की कीमत समय पर मिल रही थी? हालांकि, इस भीषण कोताही पर चौतरफा घिरने के बाद बुधवार को खोह नागोरियान थाने के एक एसएचओ समेत 9 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। लेकिन बड़ा सवाल अब भी यही है कि क्या निचले स्तर के दो मोहरों की बलि चढ़ा देने से सिस्टम के बड़े मगरमच्छों के पाप धुल जाएंगे? वहीं, मंगलवार रात से ही पुलिस इलाके में मौजूद दूसरी फैक्ट्री-गोदामों पर छापेमारी कर रही है। रेड में 3 फैक्ट्री-गोदामों से भारी मात्रा में बारूद भी मिला है। ये अवैध तरीके से स्टोर किया गया था। अब तक 5 फैक्ट्री-गोदाम सील किए गए हैं। 

बीट कांस्टेबल से लेकर थानेदार तक: क्या खुफिया तंत्र पूरी तरह पंगु था? -

राजस्थान पुलिस नियमावली के अनुसार हर क्षेत्र के बीट कांस्टेबल का यह प्राथमिक दायित्व है कि वह अपने इलाके की छोटी से छोटी व्यावसायिक और संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखे। रिहायशी मकान में पिछले दो साल से भारी मात्रा में गंधक-पोटैशियम लाया जा रहा था, प्रतिदिन दर्जनों मजदूर आते थे, लेकिन थाने को इसकी 'भनक' तक नहीं लगी। स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि बिना पुलिस की साठगांठ या मासिक 'हफ्ता वसूली' के रिहायशी इलाके की तंग गलियों में बारूद की गाड़ियां अनलोड होना नामुमकिन है। पुलिस अब आंतरिक जांच का ढोंग कर रही है, लेकिन असल गुनहगार वही खाकी है जिसने कानून को ताक पर रख दिया। 

नगर निगम की 'लापरवाही' या 'मिलीभगत': बिना ट्रेड लाइसेंस कैसे तने कमर्शियल शेड?

आवासीय कॉलोनियों में किसी भी प्रकार की औद्योगिक या व्यावसायिक गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, इस रिहायशी मकान में धड़ल्ले से पटाखा निर्माण और पैकिंग का अवैध कारोबार चल रहा था। नगर निगम के राजस्व अधिकारियों और सतर्कता विंग के पास इस पूरे क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे व्यावसायिक शेड और गोदामों का कोई डेटा नहीं है। बिना कमर्शियल बिजली-पानी कनेक्शन और बिना फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (फायर एनओसी) के यह गोदाम कैसे चल रहा था, इसका जवाब निगम के किसी अधिकारी के पास नहीं है। साफ है कि पीली पर्ची (निरीक्षण रिपोर्ट) को रद्दी की टोकरी में फेंकने के लिए बड़ा लेनदेन हुआ।

कारखाना एवं विस्फोटक विभाग : कागजों में सिमटी 'सुरक्षा जांच' -

पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन और राज्य के कारखाना एवं बॉयलर विभाग के कड़े नियम हैं कि बारूद का भंडारण केवल आबादी से दूर, विशिष्ट सुरक्षा मानकों के तहत ही किया जा सकता है। लेकिन जयपुर के इस हादसे ने साफ कर दिया कि इन विभागों के इंस्पेक्टरों का काम केवल दफ्तरों में बैठकर फाइलों को मंजूरी देना रह गया है। विस्फोटक विभाग इस बात की मॉनिटरिंग करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि दिल्ली से आया मुख्य आरोपी फिरोज आखिर किस वैध या अवैध सप्लायर से इतनी भारी मात्रा में बारूद खरीद रहा था। 

पड़ौसी बोले- कई बार शिकायत की, पर पुलिस ने डांटकर भगा दिया-

हादसे के बाद इलाके में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र में तेज गंध और आग के खतरे को लेकर स्थानीय पुलिस चौकी और बीट अधिकारियों को मौखिक शिकायतें दी थीं। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने शिकायतकर्ताओं को ही डरा-धमका कर शांत करा दिया। आज इसी प्रशासनिक हठधर्मिता और 'शह' के कारण 8 घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए।

भूमाफिया भाइयों के लग्जरी विला में पक रहा था मौत का बारूद -

खोह नागोरियान के करीम नगर/रहीम नगर इलाके में हुए अवैध पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में अब एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिस दो मंजिला मकान में यह अवैध कारोबार चल रहा था, उसका सच सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि मौत की यह फैक्ट्री किसी सामान्य गोदाम में नहीं, बल्कि इलाके के रसूखदार भूमाफिया याकूब और उसके बड़े भाई कयूम के दो मंजिला लग्जरी विला में धड़ल्ले से संचालित हो रही थी। 

जनता का सवाल :

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निलंबन सिर्फ जनता का गुस्सा शांत करने का पैंतरा है। जब तक थाना अधिकारी (SHO), नगर निगम के बीट इंस्पेक्टर और विस्फोटक विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज नहीं होता, तब तक ऐसी फैक्ट्रियां बंद नहीं होंगी।