MDMK को बड़ा झटका, 150 से ज्यादा नेता और पदाधिकारी DMK में शामिल; गठबंधन टूटने के अगले दिन बड़ा सियासी घटनाक्रम

तमिलनाडु में एमडीएमके को बड़ा झटका लगा। गठबंधन टूटने के अगले ही दिन 150 से अधिक नेताओं और पदाधिकारियों ने एमके स्टालिन की मौजूदगी में डीएमके की सदस्यता ग्रहण कर ली। जानिए पूरा घटनाक्रम।

MDMK को बड़ा झटका, 150 से ज्यादा नेता और पदाधिकारी DMK में शामिल; गठबंधन टूटने के अगले दिन बड़ा सियासी घटनाक्रम

तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। एमडीएमके (MDMK) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के 150 से अधिक पदाधिकारियों और नेताओं ने डीएमके (DMK) की सदस्यता ग्रहण कर ली। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब एक दिन पहले ही एमडीएमके ने डीएमके से अपना गठबंधन समाप्त करने का फैसला किया था।

डीएमके मुख्यालय अन्ना अरिवालयम में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की मौजूदगी में नेताओं ने औपचारिक रूप से डीएमके का दामन थामा। शामिल होने वालों में राज्य स्तरीय नेता, जिला सचिव, अधिवक्ता और छात्र संगठन के सदस्य भी शामिल रहे।

कई जिलों में डीएमके को मिली मजबूती

डीएमके में शामिल होने वालों में शिवगंगा के पुलावर एस. सेवन्थियप्पन, तिरुवल्लूर के टी.आर.आर. सेंगुट्टुवन, प्रचार सचिव तिरुपरंकुंद्रम अलगुसुंदरम और विरुधुनगर के आर.एम.एस. शेखर जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। इनके आने से शिवगंगा, तिरुवल्लूर, विरुधुनगर और तिरुपुर जैसे जिलों में डीएमके की राजनीतिक पकड़ और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

इसके अलावा तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के करीब 40 छात्रों ने भी डीएमके की सदस्यता ली। इसे एमडीएमके के युवा और छात्र संगठन में बड़ी सेंध के रूप में देखा जा रहा है।

गठबंधन तोड़ने के अगले दिन बड़ा झटका

शनिवार को हुई एमडीएमके की सामान्य परिषद की बैठक में पार्टी प्रमुख वाइको के नेतृत्व में डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से अलग होने का फैसला लिया गया था। पार्टी ने प्रस्ताव पारित कर आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पर्दे के पीछे हुए राजनीतिक समझौतों ने जनता के जनादेश के विपरीत काम किया।

हालांकि प्रस्ताव में डीएमके का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन गठबंधन समाप्त करने का निर्णय लिया गया और भविष्य में नए राजनीतिक विकल्पों पर विचार करने की बात कही गई।

एमडीएमके के लिए बड़ा राजनीतिक झटका

गठबंधन टूटने के महज एक दिन बाद बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं का डीएमके में शामिल होना एमडीएमके के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है। वहीं, डीएमके ने इस घटनाक्रम के जरिए संगठनात्मक मजबूती का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है। आगामी चुनावों से पहले तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।