राजस्थान में UCC की ओर बढ़े कदम, एक राज्य-एक कानून लाने की तैयारी

राज्य सरकार ने प्रदेश में 'राजस्थान समान नागरिक संहिता-2026' का प्रारूप तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का औपचारिक गठन कर दिया है।

राजस्थान में UCC की ओर बढ़े कदम, एक राज्य-एक कानून लाने की तैयारी

उत्तराखंड की तर्ज पर अब राजस्थान में भी 'समान नागरिक संहिता' (UCC) लागू करने की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश में 'राजस्थान समान नागरिक संहिता-2026' का प्रारूप तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का औपचारिक गठन कर दिया है। इस समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है। यह समिति बहु-विवाह पर प्रतिबंध, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण और संपति में महिलाओं को समान अधिकार जैसे प्रावधानों के साथ 6 महीने के भीतर अंतिम मसौदा तैयार करेगी। 


कैबिनेट बैठक में हुआ था फैसला
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 14 अप्रैल 2026 को आयोजित कैबिनेट बैठक में इस विशेषज्ञ समिति के गठन को मंजूरी दी गई थी। सरकार का मानना है कि यह केवल एक कानूनी सुधार नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों में समानता और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

प्रस्तावित कानून में क्या होगा खास?
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने स्पष्ट किया कि यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, संपत्ति उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू हो जाएगा। 


एक राज्य-एक कानून लाने की तैयारी
बहु-विवाह पर पूर्ण रोक: प्रदेश में कोई भी व्यक्ति एक से अधिक विवाह नहीं कर सकेगा।
लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
संपत्ति में बेटियों को बराबर हक: पैतृक संपत्ति में बेटे और बेटी को समान उत्तराधिकार अधिकार मिलेगा।
शादी-तलाक का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: सभी वर्गों के लिए विवाह और तलाक का सरकारी पंजीकरण आवश्यक होगा।

आदिवासी परंपराओं को मिलेगा संरक्षण:
मंत्रियों ने साफ किया कि संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद 44 के तहत यह कदम उठाया जा रहा है। हालांकि, राजस्थान के सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखते हुए आदिवासी समुदायों की रीतियों, परंपराओं और उनके संवैधानिक अधिकारों को इस कानून के दायरे से बाहर रखते हुए पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। समिति जल्द ही संभागीय स्तर पर जनसुनवाई कर आम जनता से सुझाव आमंत्रित करेगी।

धर्म के आधार पर अलग अलग कानून नहीं रहेगा:
मंत्री पटेल ने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी। इसके साथ ही वर्तमान में प्रचलित विभिन्न पर्सनल लॉ, जैसे हिंदू कोड बिल और मुस्लिम पर्सनल लॉ की अलग-अलग व्यवस्थाओं के स्थान पर एक समान नागरिक कानून लागू होगा। उन्होंने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करना और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है। प्रस्तावित कानून में बहुविवाह पर रोक, विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण तथा संपत्ति में पुत्र और पुत्री को समान अधिकार जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।


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