JPSC विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: 2025 प्रीलिम्स रद्द कर दोबारा परीक्षा की मांग, CBI जांच की भी गुहार

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने हल्दीघाटी युद्ध, महाराणा प्रताप, बढ़ती आबादी और नशामुक्ति को लेकर बड़ा बयान दिया। उदयपुर के एग्रीविजन सम्मेलन में उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

JPSC विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: 2025 प्रीलिम्स रद्द कर दोबारा परीक्षा की मांग, CBI जांच की भी गुहार
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झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 2025 प्रारंभिक परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका में प्रीलिम्स को रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की गई है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए CBI जांच की मांग भी उठाई गई है।

याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई कथित गड़बड़ियों की गंभीरता को देखते हुए सिर्फ विभागीय स्तर की जांच पर्याप्त नहीं होगी। याचिका में जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की स्वतंत्र कमेटी गठित करने की मांग भी की गई है।

वायरल OMR कॉपी के बाद उठा विवाद

JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा को लेकर विवाद उस समय तेज हुआ, जब 2 जुलाई को एक सफल अभ्यर्थी की OMR कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हुई। आरोप लगाया गया कि संबंधित अभ्यर्थी ने पेपर-1 में कथित तौर पर सिर्फ 48 प्रश्न हल किए थे, इसके बावजूद उसे अगले चरण के लिए सफल घोषित कर दिया गया।

OMR कॉपी से जुड़े इस दावे के सामने आने के बाद अभ्यर्थियों और छात्रों में नाराजगी बढ़ गई। छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आंदोलन शुरू कर दिया। राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी, लेकिन आंदोलन कर रहे छात्र इससे संतुष्ट नहीं हुए।

25 जुलाई से रांची में छात्र आंदोलन

JPSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्र 25 जुलाई से रांची में आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मुख्य मांग परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करना है। छात्रों का कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी साबित होती है तो सभी अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका के जरिए क्या मांग?

याचिका वकील सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल की गई है। इसमें सुप्रीम कोर्ट से परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने और कथित अनियमितताओं की तह तक जाने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 को रद्द कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के साथ दोबारा परीक्षा कराने की मांग प्रमुख रूप से की गई है। इसके अलावा मामले की CBI से विस्तृत और समयबद्ध जांच कराने की मांग भी रखी गई है।

सेवानिवृत्त जज की निगरानी में जांच की मांग

याचिकाकर्ता ने जांच प्रक्रिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या झारखंड से बाहर के हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की मांग की है।

याचिका में परीक्षा की OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी शामिल है। साथ ही यह पता लगाने की मांग की गई है कि कथित अनियमितता में शामिल अभ्यर्थियों और निर्दोष अभ्यर्थियों की पहचान अलग-अलग संभव है या नहीं।

OMR से CCTV तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

याचिका में परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। इसमें मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर-की, अटेंडेंस रिकॉर्ड और बायोमेट्रिक डाटा को संरक्षित रखने की मांग की गई है।

इसके अलावा परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, स्कैनिंग से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों को भी सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है, ताकि जांच के दौरान किसी महत्वपूर्ण साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ या उसके गायब होने की आशंका न रहे।

अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर नजर

JPSC परीक्षा विवाद के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद अभ्यर्थियों और छात्रों की नजर अब अदालत की कार्यवाही पर है। याचिका में परीक्षा रद्द करने से लेकर CBI जांच और स्वतंत्र निगरानी समिति गठित करने तक कई मांगें रखी गई हैं। ऐसे में आने वाले समय में अदालत का रुख इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम हो सकता है।