मथानिया में कांग्रेस की जीत, जश्न में छाईं दिव्या मदेरणा; कार की छत पर अभिवादन स्वीकार करने का वीडियो वायरल
कांग्रेस की लीला देवी मेघवाल 17 वोट लेकर मथानिया नगरपालिका की पहली अध्यक्ष बनीं। जीत के बाद दिव्या मदेरणा का वीडियो वायरल है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव के नतीजों का ओवरऑल स्कोर भले ही बीजेपी के पक्ष में रहा हो, लेकिन मथानिया नगरपालिका की जीत ने कांग्रेस के साथ-साथ पूर्व ओसियां विधायक और AICC सचिव **दिव्या मदेरणा** को भी सियासी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जिले की छह नगरपालिकाओं में चार जगह बीजेपी और दो जगह कांग्रेस के अध्यक्ष बने हैं। मथानिया में कांग्रेस की जीत के बाद दिव्या मदेरणा का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे कार की छत पर खड़ी होकर समर्थकों और स्थानीय लोगों का अभिवादन स्वीकार करती नजर आ रही हैं।
मथानिया में कांग्रेस को 17 वोट, बीजेपी 8 पर सिमटी
नवगठित मथानिया नगरपालिका के पहले अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी **लीला देवी मेघवाल** ने स्पष्ट जीत दर्ज की। 25 सदस्यों वाले बोर्ड में लीला देवी को 17 वोट मिले, जबकि बीजेपी प्रत्याशी इंद्रा देवी को 8 वोट मिले। यानी कांग्रेस उम्मीदवार ने 9 वोट के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम किया। अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित था।
नतीजा सामने आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ जश्न मनाया। इस विजय समारोह में दिव्या मदेरणा की मौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। वायरल हो रहे वीडियो में मदेरणा गाड़ी की छत पर खड़ी दिखाई देती हैं और आसपास जुटी भीड़ का अभिवादन स्वीकार करती हैं।
जीत लीला देवी की, लेकिन राजनीतिक फ्रेम में दिव्या मदेरणा
तकनीकी रूप से यह जीत कांग्रेस प्रत्याशी लीला देवी मेघवाल की है, लेकिन चुनाव के पहले से लेकर नतीजे आने के बाद तक दिव्या मदेरणा की सक्रियता ने मथानिया के मुकाबले को उनके राजनीतिक प्रभाव से भी जोड़ दिया।
दिव्या मदेरणा ओसियां की पूर्व विधायक हैं और वर्तमान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सचिव हैं। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उन्हें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जिम्मेदारी भी दी गई है।
यही वजह है कि जिले में बीजेपी के 4–2 के बढ़त वाले स्कोर के बावजूद मथानिया का नतीजा अलग राजनीतिक चर्चा पैदा कर रहा है। कांग्रेस और मदेरणा समर्थकों के लिए यह चुनाव स्थानीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दिखाने का मौका है, जबकि बीजेपी के पास पूरे जिले में अधिक नगरपालिका अध्यक्ष पद जीतने का आंकड़ा मौजूद है।
चुनाव से पहले प्रशासन को लेकर दिव्या ने लगाए थे आरोप
मथानिया का चुनाव मतदान से पहले भी राजनीतिक रूप से गर्म रहा था। दिव्या मदेरणा ने स्थानीय बीजेपी विधायक **भैराराम सियोल** के साथ पुलिस और प्रशासन पर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करने के आरोप लगाए थे। उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर पर दबाव में काम करने और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया था। ये आरोप मदेरणा की ओर से लगाए गए थे; उपलब्ध रिपोर्टों में प्रशासन या बीजेपी की ओर से इन आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है।
ऐसे माहौल के बाद कांग्रेस उम्मीदवार का 17 वोट हासिल करना और परिणाम के तुरंत बाद दिव्या मदेरणा का समर्थकों के बीच दिखाई देना इस पूरे चुनावी घटनाक्रम को केवल नगरपालिका अध्यक्ष की जीत तक सीमित नहीं रहने देता।
वायरल वीडियो से बना 'पॉलिटिकल मोमेंट'
राजनीति में चुनावी नतीजों के साथ उनकी तस्वीर भी मायने रखती है। मथानिया के परिणाम के बाद सामने आया वीडियो इसी वजह से चर्चा में है। कार की छत पर खड़ी दिव्या मदेरणा, चारों तरफ समर्थकों की भीड़ और विजय का माहौल—इस दृश्य ने स्थानीय चुनाव के नतीजे को सोशल मीडिया पर एक अलग पहचान दी है।
हालांकि इस एक नगरपालिका के परिणाम से पूरे जोधपुर जिले के राजनीतिक रुझान का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। जिले की छह नगरपालिकाओं में चार अध्यक्ष पद बीजेपी के खाते में गए हैं और दो कांग्रेस के पास। लेकिन मथानिया में कांग्रेस की स्पष्ट जीत ने उस क्षेत्र में मुकाबला मजबूत बने रहने का संकेत जरूर दिया है।
दिव्या मदेरणा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मथानिया का नतीजा?
दिव्या मदेरणा की राजनीति लंबे समय से ओसियां और आसपास के क्षेत्र से जुड़ी रही है। ऐसे में मथानिया में कांग्रेस की जीत उन्हें स्थानीय स्तर पर अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाने का अवसर देती है। खासकर तब, जब जोधपुर जिले के बाकी नगरपालिका परिणामों में बीजेपी संख्या के लिहाज से आगे रही है।
यानी जोधपुर के नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव की बड़ी तस्वीर में बीजेपी 4–2 से आगे है, लेकिन **मथानिया की तस्वीर में कांग्रेस की जीत के साथ दिव्या मदेरणा सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।** अब वायरल वीडियो ने इस जीत को चुनावी आंकड़े से आगे बढ़ाकर एक राजनीतिक दृश्य भी बना दिया है—और स्थानीय राजनीति में कई बार यही दृश्य आगे की सियासी बहस का आधार बन जाते हैं।

