चीन के साथ सीमा पर टकराव को लेकर सियासी घमासान, ITBP चीफ के बयान पर कांग्रेस का मोदी सरकार से सवाल
अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर टकराव की खबरों के बाद जयराम रमेश ने मोदी सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए। जानिए सीमा विवाद और 112.16 अरब डॉलर के व्यापार घाटे से जुड़ा
भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है। अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ टकराव की स्थिति बने रहने संबंधी ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि सीमा पर तनाव और चीन के साथ बढ़ती आर्थिक निर्भरता के बीच सरकार की नीति आखिर किस तरह के राष्ट्रवाद को दर्शाती है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा पर गश्त, चीन के साथ व्यापार घाटे और सरकार के रुख को लेकर कई सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि चीन के साथ सीमा विवाद और आर्थिक संबंधों पर केंद्र सरकार को देश के सामने स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।
ITBP डीजी ने क्या कहा?
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ टकराव की स्थितियों का जिक्र किया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच आज भी ऐसी परिस्थितियां बनती हैं, जब दोनों पक्ष आमने-सामने आ जाते हैं।
रिपोर्ट में ITBP के महानिदेशक की ओर से सीमा पर तैनात जवानों के प्रदर्शन की सराहना किए जाने का भी उल्लेख है। इस बयान के सामने आने के बाद कांग्रेस ने सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए हैं।
जयराम रमेश ने मोदी सरकार को घेरा
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ITBP डीजी के बयान को आधार बनाकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर सीमा पर चीन के साथ टकराव की स्थिति बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार इस गंभीर मुद्दे पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दे रहे हैं।
जयराम रमेश ने अपने बयान में सवाल किया कि सीमा पर तनाव के बावजूद चीन के प्रति कथित नरमी और आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती निर्भरता को किस तरह का राष्ट्रवाद कहा जाना चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हालांकि, सीमा पर टकराव और सरकार की नीतियों को लेकर कांग्रेस की टिप्पणियां पार्टी के राजनीतिक आरोप हैं।
अरुणाचल प्रदेश में गश्त को लेकर भी उठाए सवाल
कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में गश्त और चीन की गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई है। जयराम रमेश के मुताबिक, ताकसिंग क्षेत्र में टकराव के बाद अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी।
उन्होंने स्थानीय लोगों के हवाले से दावा किया कि कुछ गश्ती बिंदुओं पर भारतीय पक्ष की पहुंच को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कांग्रेस ने चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने और वहां बड़े बांध के निर्माण का मुद्दा भी उठाया।
पार्टी का कहना है कि इन घटनाक्रमों का सीमा सुरक्षा, स्थानीय आबादी और जल सुरक्षा पर संभावित प्रभाव गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इन दावों और गश्त की मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी आवश्यक है।
चीन के साथ व्यापार घाटे पर भी कांग्रेस का हमला
सीमा विवाद के अलावा कांग्रेस ने भारत और चीन के बीच व्यापार असंतुलन को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा है। जयराम रमेश ने दावा किया कि वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 99 अरब डॉलर था।
उन्होंने आरोप लगाया कि चीन से बड़े पैमाने पर होने वाले आयात का भारतीय लघु एवं मध्यम उद्योगों पर दबाव पड़ रहा है। कांग्रेस नेता ने इसी संदर्भ में 'मेक इन इंडिया' अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की चीन पर आर्थिक निर्भरता चिंता का विषय है।
व्यापार घाटे का मतलब है कि किसी देश से होने वाला आयात उस देश को किए जाने वाले निर्यात से अधिक है। हालांकि, इसके आर्थिक प्रभावों का आकलन करने के लिए आयात की प्रकृति, घरेलू उत्पादन और विभिन्न उद्योगों के आंकड़ों को भी देखना जरूरी है।
गलवान संघर्ष और 2020 के बयान का किया जिक्र
जयराम रमेश ने अपने बयान में 19 जून 2020 को गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय चीन को लेकर दिए गए बयान के कारण सरकार की आलोचना हुई थी और सीमा विवाद पर अब भी कई सवाल अनुत्तरित हैं।
कांग्रेस नेता ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के नाम से जुड़े उस प्रसंग का भी जिक्र किया, जिसमें लद्दाख में चीन के साथ तनाव के दौरान उन्हें मिले निर्देशों पर चर्चा हुई थी।
इन मुद्दों के जरिए कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सीमा विवाद, सैन्य रणनीति और चीन के साथ संबंधों पर अधिक पारदर्शिता की मांग की है।
ऑपरेशन सिंदूर और चीन की भूमिका पर भी सवाल
कांग्रेस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की भूमिका को लेकर सामने आए बयानों का भी जिक्र किया। जयराम रमेश ने कहा कि चीन की सैन्य और रणनीतिक भूमिका को लेकर सार्वजनिक रूप से अलग-अलग दावे सामने आए हैं, इसलिए सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि देश को केवल राजनीतिक दावों के बजाय सीमा की वास्तविक स्थिति और सरकार की रणनीति की जानकारी मिलनी चाहिए।
चीन नीति पर फिर गरमाई राजनीति
ITBP महानिदेशक के बयान के बाद सीमा सुरक्षा और चीन के साथ भारत के संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सीमा पर गश्त, चीनी गतिविधियों और व्यापार घाटे पर जवाब मांगा है।
फिलहाल इस मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों के जवाब में केंद्र सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध कराई गई जानकारी में शामिल नहीं है। ऐसे में सीमा पर मौजूदा स्थिति और लगाए गए आरोपों के संबंध में आधिकारिक बयानों तथा स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण होगा।

