‘सरपंची रौब दिखाने का पद नहीं’, दिनेश चौधरी का 5 साल का विजन,हर गांव में डिजिटल लाइब्रेरी…

कुम्हारिया बॉस पंचायत से सरपंच पद के दावेदार दिनेश कुमार चौधरी ने सीसी सड़क, एलईडी लाइट, डिजिटल लाइब्रेरी, खेल मैदान, स्वास्थ्य सुविधाओं और जैविक खेती को लेकर अपना विजन बताया।

‘सरपंची रौब दिखाने का पद नहीं’, दिनेश चौधरी का 5 साल का विजन,हर गांव में डिजिटल लाइब्रेरी…

गांव की गलियों में सीसी सड़कें हों, हर मुख्य रास्ते पर एलईडी स्ट्रीट लाइट लगे, युवाओं के लिए डिजिटल लाइब्रेरी और खेल मैदान बने, महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले और किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें लेकर कुम्हारिया बॉस पंचायत से सरपंच पद के दावेदार दिनेश कुमार चौधरी जनता के बीच जाने की बात कर रहे हैं।

PK Times से विशेष बातचीत में दिनेश चौधरी ने सरपंच पद को लेकर अपनी सोच स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरपंच का पद रौब दिखाने या गाड़ी-घोड़े रखने के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सेवा करने के लिए होता है। उन्होंने बताया कि कुम्हारिया बॉस पंचायत में पांच गांव आते हैं और उनकी कोशिश होगी कि सभी गांवों में बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं। पानी, बिजली और सड़क को पहली प्राथमिकता बताते हुए दिनेश चौधरी ने युवाओं, महिलाओं, किसानों और पशुपालकों के लिए भी कई योजनाओं का प्रस्ताव रखा। पढ़िए PK Times के साथ दिनेश कुमार चौधरी की विशेष बातचीत के प्रमुख अंश।

सवाल 1: आप युवा हैं और सरपंच पद के लिए जनता के बीच जा रहे हैं। आपकी ऐसी क्या सोच है, जो दूसरे उम्मीदवारों से अलग है? 

दिनेश कुमार चौधरी: देखिए, ग्रामीण क्षेत्रों में सरपंच पद को लेकर लोगों की सोच बदलने की जरूरत है। कई जगह लोग सरपंच बनने को रौब दिखाने वाला पद समझते हैं। उन्हें लगता है कि सरपंच बनेंगे, गाड़ी-घोड़े रखेंगे और उनका प्रभाव बढ़ जाएगा। लेकिन मेरी सोच इससे अलग है। सरपंच का पद जनता की सेवा करने का माध्यम होना चाहिए। गांवों में आज भी बहुत सारी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। मेरा मानना है कि अगर इन सुविधाओं पर ईमानदारी से काम किया जाए, तो गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जा सकता है। मेरी प्राथमिकता होगी कि गांवों की गलियों में सीसी सड़कें बनें, मुख्य रास्तों पर एलईडी स्ट्रीट लाइट लगें और सार्वजनिक स्थानों पर सुविधाएं बेहतर हों।

सवाल 2: आपके अनुसार एक आदर्श ग्राम पंचायत में कौन-कौन सी सुविधाएं होनी चाहिए? 

दिनेश कुमार चौधरी: मेरी सोच है कि हर गांव में अच्छी सड़कें, नियमित पेयजल, स्ट्रीट लाइट और साफ-सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए। स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर बने शौचालयों की स्थिति बेहतर होनी चाहिए। गांव के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रयास होना चाहिए। युवाओं के लिए हर गांव में कम से कम 50 लोगों की बैठने की क्षमता वाली डिजिटल लाइब्रेरी विकसित करने की मेरी योजना है। मैं स्वयं खेलों से जुड़ा रहा हूं, इसलिए चाहता हूं कि पंचायत स्तर पर आधुनिक खेल मैदान विकसित हो और आगे चलकर प्रत्येक गांव में खेल सुविधाएं उपलब्ध हों। अगर ग्रामीणों को ये बुनियादी सुविधाएं मिलने लगें, तो पंचायत का विकास सही दिशा में आगे बढ़ेगा।

सवाल 3: हर पंचायत चुनाव में सड़क, पानी और बिजली के वादे होते हैं, लेकिन पांच साल बाद फिर वही समस्याएं सामने आती हैं। ऐसा क्यों?

दिनेश कुमार चौधरी: सरपंच बनने के बाद कोई व्यक्ति अपनी जेब से पूरे गांव का विकास नहीं करवाता।

केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाएं होती हैं। इन योजनाओं के तहत पंचायतों में विकास कार्यों के लिए धन और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। जरूरत इस बात की है कि सरपंच सक्रिय रहकर योजनाओं का सही उपयोग करवाए। प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और स्वास्थ्य से जुड़ी कई योजनाएं हैं। पात्र ग्रामीणों को इनका लाभ दिलाने का प्रयास किया जाना चाहिए। गांवों में समय-समय पर स्वास्थ्य जांच शिविर, नेत्र जांच शिविर और रक्तदान शिविर भी आयोजित किए जा सकते हैं। मेरा मानना है कि अगर सरपंच अपनी जिम्मेदारी समझे, तो गांव की दशा और दिशा बदलने में बहुत समय नहीं लगेगा।

सवाल 4: कुमारियावास ग्राम पंचायत के पांचों गांवों के लिए आपकी मुख्य प्राथमिकताएं क्या रहेंगी?

दिनेश कुमार चौधरी: हमारी ग्राम पंचायत में पांच गांव आते हैं। मेरी कोशिश होगी कि सभी गांवों को समान रूप से विकास कार्यों का लाभ मिले। सबसे पहले नियमित पानी की व्यवस्था पर काम करना चाहूंगा। इसके बाद गलियों और मुख्य सड़कों पर एलईडी स्ट्रीट लाइट, सीसीटीवी कैमरे, सीसी ब्लॉक सड़कें और सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई की व्यवस्था विकसित करने का प्रयास करूंगा।

कचरा प्रबंधन और पानी की निकासी पर भी विशेष ध्यान रहेगा। युवाओं के लिए डिजिटल लाइब्रेरी और आधुनिक खेल मैदान मेरी प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं। मैं चाहता हूं कि विकास केवल एक गांव या एक क्षेत्र तक सीमित न रहे, बल्कि पंचायत के सभी पांचों गांवों तक पहुंचे।

सवाल 5: आपने पशु चिकित्सालय और स्वास्थ्य सुविधाओं की बात की। इस क्षेत्र में आपकी क्या योजना है? 

दिनेश कुमार चौधरी: हमारी पंचायत में पशु चिकित्सालय की पर्याप्त स्थायी व्यवस्था नहीं है। अभी यह किराए के भवन में संचालित होने की स्थिति बताई जाती है। मेरी प्राथमिकता होगी कि पंचायत में पशु चिकित्सालय के लिए बेहतर और स्थायी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग पशुपालन से जुड़े हैं। ऐसे में पशुओं के इलाज की सुविधा आसानी से उपलब्ध होना जरूरी है। इसके अलावा मैं चाहता हूं कि गांव में प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हों। अगर संबंधित स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से डॉक्टर की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित हो सके, तो ग्रामीणों को काफी राहत मिलेगी।

सवाल 6: गांवों में बरसात और घरेलू उपयोग का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है। इसका समाधान कैसे करेंगे? 

दिनेश कुमार चौधरी: गांवों में जल निकासी की समस्या गंभीर है। बरसात का पानी हो या नहाने-धोने का पानी, कई स्थानों पर वह सड़कों पर जमा रहता है। मेरी कोशिश होगी कि जल निकासी की उचित व्यवस्था विकसित की जाए। गांवों में जहां तालाब या तलाई मौजूद हैं, वहां वर्षा जल को उचित माध्यम से पहुंचाने की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है। इसके लिए जरूरत के अनुसार पाइपलाइन, नालियों और जल संरक्षण की व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार करेंगे। इससे पानी का बेहतर भंडारण हो सकता है और भूजल संरक्षण में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए तकनीकी योजना और संबंधित विभागों की स्वीकृति जरूरी होगी।

सवाल 7: महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा तथा आत्मनिर्भरता को लेकर आपकी क्या योजना है? 

दिनेश कुमार चौधरी: हमारे ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं में आगे बढ़ने की बहुत क्षमता है। कई लड़कियां पढ़-लिखकर बड़े पदों तक पहुंचना चाहती हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर यातायात और शिक्षा से जुड़ी समस्याएं उनके सामने आती हैं। मेरी कोशिश होगी कि महिलाओं और बालिकाओं तक सरकारी योजनाओं की सही जानकारी पहुंचे। जयपुर में कई सामाजिक संस्थाएं और एनजीओ भी काम कर रहे हैं। उनसे सहयोग की संभावनाएं तलाशेंगे। बालिकाओं को शिक्षा जारी रखने, करियर के अवसर समझने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। मैं चाहता हूं कि पंचायत की बेटियां अपनी प्रतिभा के आधार पर आगे बढ़ें।

सवाल 8: पंचायत कार्यालय में अधिकारी-कर्मचारी नहीं मिलने की शिकायतें रहती हैं। इस व्यवस्था को कैसे सुधारेंगे? 

दिनेश कुमार चौधरी: मेरी सोच है कि सरपंच को खुद ग्रामीणों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए। मैं चाहता हूं कि पंचायत के पांचों गांवों में नियमित रूप से जनसुनवाई की व्यवस्था हो। मेरी योजना है कि प्रत्येक सप्ताह किसी एक गांव में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक आयोजित करने का प्रयास किया जाए। इसमें पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी और अन्य संबंधित कर्मचारियों को शामिल करने के लिए विभागीय समन्वय किया जाएगा। अगर गांव में ही लोगों की समस्याएं सुनी जाएं, तो उन्हें बार-बार पंचायत कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे प्रशासन और जनता के बीच संवाद भी बेहतर होगा।

सवाल 9: यदि जनता आपको सरपंच चुनती है, तो पहले 100 दिनों में कौन से काम शुरू करेंगे?

दिनेश कुमार चौधरी: मेरी पहली प्राथमिकता पानी, बिजली और सड़क होगी। हमारी पंचायत में बीसलपुर परियोजना से जुड़े पानी की नियमित आपूर्ति की समस्या है। सबसे पहले इस व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे। इसके बाद गांवों में सड़कों पर जमा होने वाले पानी की निकासी और साफ-सफाई पर ध्यान देंगे। जहां जरूरत होगी, वहां स्ट्रीट लाइट लगाने और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था के लिए काम शुरू करेंगे। सभी कार्य एक साथ पूरे करना संभव नहीं होता, इसलिए प्राथमिकता के आधार पर योजनाएं आगे बढ़ाएंगे। मेरा प्रयास होगा कि शुरुआती 100 दिनों में ग्रामीणों को यह महसूस हो कि उनकी समस्याओं पर काम शुरू हो गया है।

सवाल 10: आप पांच साल बाद अपनी ग्राम पंचायत को किस स्थिति में देखना चाहते हैं? 

दिनेश कुमार चौधरी: मेरा मानना है कि हमारी पंचायत विकास के मामले में पीछे रह गई है। मैं चाहता हूं कि अगले पांच वर्षों में गांवों की तस्वीर बदले। अगर जनता मुझे अवसर देती है, तो मैं पूरी कोशिश करूंगा कि सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार दिखाई दे। मैं आपसे भी कहना चाहता हूं कि पांच साल बाद दोबारा आइए और मेरा इंटरव्यू लीजिए। तब जनता खुद बताएगी कि कितना काम हुआ और कितना बाकी रह गया। मैं यह दिखाना चाहता हूं कि अगर सरपंच सक्रिय होकर काम करे, तो पंचायत में कितना बदलाव लाया जा सकता है।

सवाल 11: गांवों में गोबर गैस और कचरा प्रबंधन को लेकर आपकी क्या सोच है? 

दिनेश कुमार चौधरी: मेरा प्रयास होगा कि पंचायत में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था बेहतर बनाई जाए। इसके साथ ही मैं गांवों में जैविक खेती और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहता हूं। जहां गोबर गैस जैसी योजनाओं की संभावना होगी, वहां सरकारी सहायता और उपलब्ध योजनाओं की जानकारी लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे। मैं चाहता हूं कि गांवों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो। कचरे और जैविक अपशिष्ट के सही प्रबंधन से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।

सवाल 12: सौर ऊर्जा और जैविक खेती को लेकर आपका क्या विजन है? 

दिनेश कुमार चौधरी: मेरी सोच है कि पंचायत के लोगों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। जहां संभव हो, वहां सरकारी योजनाओं के माध्यम से घरों में सोलर पैनल लगवाने की दिशा में मदद करेंगे। इससे लोगों की परंपरागत बिजली पर निर्भरता कम हो सकती है। दूसरी बात, मैं किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करना चाहता हूं। रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और खेती में टिकाऊ तरीकों को अपनाने के लिए किसानों को जागरूक करेंगे। इसके लिए कृषि विभाग और विशेषज्ञों की मदद से प्रशिक्षण तथा जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश की जा सकती है। मेरा लक्ष्य है कि पंचायत में खेती आधुनिक भी बने और पर्यावरण के अनुकूल भी हो।

‘पांच साल बाद आकर मेरा इंटरव्यू लेना’ 

इस पूरे इंटरव्यू में दिनेश कुमार चौधरी ने सबसे अधिक जोर पंचायत में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर दिया। उन्होंने सरपंच पद को प्रतिष्ठा या प्रभाव के बजाय सेवा और जिम्मेदारी का माध्यम बताया। उनकी प्रस्तावित योजनाओं में डिजिटल लाइब्रेरी, खेल मैदान, सीसीटीवी कैमरे, एलईडी स्ट्रीट लाइट, पशु चिकित्सालय, जल निकासी, सौर ऊर्जा और जैविक खेती जैसे विषय शामिल हैं। हालांकि, इन योजनाओं के लिए आवश्यक बजट, तकनीकी स्वीकृति, विभागीय सहयोग और समयसीमा का विस्तृत खाका बातचीत में प्रस्तुत नहीं किया गया। दिनेश चौधरी ने दावा किया कि जनता का अवसर मिलने पर वह पांच वर्षों में पंचायत में बदलाव लाने का प्रयास करेंगे। अब सवाल यही है कि कुम्हारिया बॉस के मतदाता किस उम्मीदवार पर भरोसा जताते हैं। चुनाव का परिणाम जो भी हो, गांवों में सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं का समाधान आने वाले पंचायत नेतृत्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।