असम में UCC बिल पास, अब बदल जाएंगे ये बड़े नियम...जानें इस बिल के बारे में

Assam विधानसभा में UCC Bill 2026 पास हो गया है। नए कानून के तहत बहुविवाह पर रोक, शादी और लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, समान तलाक नियम और उत्तराधिकार में बराबरी जैसे बड़े बदलाव लागू होंगे। Himanta Biswa Sarma ने इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

असम में UCC बिल पास, अब बदल जाएंगे ये बड़े नियम...जानें इस बिल के बारे में

Assam विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 पास हो गया है। इस बिल के लागू होने के बाद शादी, तलाक, बहुविवाह, लिव-इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार से जुड़े कई नियमों में बड़ा बदलाव होगा। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य महिलाओं को अधिक सुरक्षा और समान अधिकार देना है। वहीं Asaduddin Owaisi समेत कई नेताओं ने इसका विरोध भी किया है।

क्या है UCC बिल?

Uniform Civil Code यानी समान नागरिक संहिता का मतलब है कि सभी धर्मों के लोगों के लिए शादी, तलाक, विरासत और पारिवारिक मामलों में एक समान कानून लागू होगा। हालांकि अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस कानून से बाहर रखा गया है।

UCC बिल के बाद होने वाले 10 बड़े बदलाव

1. बहुविवाह और द्विविवाह पर रोक

अब एक व्यक्ति एक समय में केवल एक ही शादी कर सकेगा। दूसरी शादी करने पर कानूनी कार्रवाई होगी।

2. सात साल तक की जेल

द्विविवाह या बहुविवाह करने पर भारतीय न्याय संहिता के तहत 7 साल तक की सजा हो सकती है।

3. शादी की न्यूनतम उम्र तय

पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है।

4. शादी का रजिस्ट्रेशन जरूरी

हर विवाह का पंजीकरण 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होगा।

5. तलाक के लिए समान नियम

अब सभी समुदायों में तलाक के लिए समान आधार लागू होंगे, जिनमें क्रूरता, परित्याग और आपसी सहमति शामिल हैं।

6. लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य

लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

7. लिव-इन से जन्मे बच्चों को कानूनी मान्यता

ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें कानूनी अधिकार मिलेंगे।

8. महिलाओं को बराबरी के अधिकार

उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में पति-पत्नी, बच्चों और माता-पिता को समान श्रेणी में रखा जाएगा।

9. वसीयत बनाने का अधिकार

हर वयस्क और मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति को लिखित वसीयत बनाने का कानूनी अधिकार मिलेगा।

10. नियम तोड़ने पर जुर्माना

समय पर शादी, तलाक या लिव-इन संबंध का पंजीकरण नहीं कराने पर जुर्माना लगाया जाएगा। फर्जी दस्तावेज देने पर जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का कहना है कि यह कानून महिलाओं को न्याय और सुरक्षा देगा। वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने का प्रयास है।