राजस्थान कांग्रेस, पार्टी एक, चेहरे अनेक !
राजस्थान में चुनाव 2028 में होने हैं लेकिन कांग्रेस किस चेहरे पर इस बार मैदान में उतरेगी, क्या गहलोत मान जाएंगे या पायलट फिर से उड़ेंगे।
राजस्थान में 2028 का चुनाव अभी दूर है. लेकिन सत्ता की सबसे बड़ी लड़ाई अभी से शुरू हो चुकी है. सवाल सिर्फ इतना नहीं कि कांग्रेस चुनाव कैसे लड़ेगी. सवाल ये है कि राजस्थान में कांग्रेस किसके चेहरे पर चुनाव लड़ेगी? कौन बनेगा मुख्यमंत्री ? क्या पार्टी फिर से अनुभवी जादूगर अशोक गहलोत पर भरोसा करेगी ? या युवा जोश के प्रतीक सचिन पायलट के चेहरे पर 28 में मैदान में उतरेगी?
या फिर संगठन की ताकत बने गोविंद सिंह डोटासरा या शांत लेकिन मजबूत दलित चेहरे टीकाराम जूली पर सबसे बड़ा दांव खेलेगी ? राजस्थान कांग्रेस में अब सिर्फ विपक्ष की राजनीति नहीं चल रही. अंदर ही अंदर “2028 का चेहरा कौन?” इसकी जंग भी तेज हो चुकी है।
यूथ आइकन सचिन पायलट
चलिए बात करते हैं युवाओं के चहेते सचिन पायलट की. अगर राजस्थान कांग्रेस में सबसे ज्यादा चर्चा किसी नाम की होती है तो वो है सचिन पायलट, युवा-आक्रामक और भीड़ खींचने वाले नेता। पायलट सिर्फ नेता नहीं, कांग्रेस के उस सपने का चेहरा हैं जो पार्टी को “नई पीढ़ी” की राजनीति में ले जाना चाहते हैं. उनकी सभाओं में युवाओं की भीड़ सोशल मीडिया पर जबरदस्त पकड़ और बीजेपी पर सीधे हमले. ये सब संकेत देते हैं कि पायलट अब सिर्फ इंतजार नहीं कर रहे. वो 2028 की तैयारी में जुट चुके हैं.

राजनीति के 'जादूगर'
राजस्थान की राजनीति की बात हो, ओर जादूगर का जिक्र न हो, ऐसे कैसे हो सकता है.. जननायक अशोक गहलोत की बात करते हैं. देखिए राजनीति सिर्फ जोश से नहीं बल्कि अनुभव से भी चलती है. और अनुभव की राजनीति का सबसे बड़ा नाम है अशोक गहलोत

राजस्थान की सत्ता का वो खिलाड़ी. जो हर सियासी चाल को वक्त से पहले पढ़ लेता है. आज भी कांग्रेस के कई विधायक और बड़े नेता मानते हैं कि अगर बीजेपी को कोई चुनौती दे सकता है. तो वो गहलोत का अनुभव ही है कम बोलना. लेकिन सही वक्त पर बड़ा दांव खेलना, यही गहलोत की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है
संगठन में डोटासरा की अलग पहचान
अब बात उस चेहरे की, जो संगठन में तेजी से ताकतवर होता जा रहा है. गोविंद सिंह डोटासरा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद जिस आक्रामक अंदाज में बीजेपी को घेरा उसने कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अलग पहचान बना दी. संगठन पर मजबूत पकड़, हाईकमान का भरोसा और जमीन से जुड़ी राजनीति… इन सबने डोटासरा को भी “रेस” में ला खड़ा किया है.

सोशल इंजीनियरिंग का बड़ा चेहरा 'जूली'
आखिरी में उस नाम की चर्चा जो धीरे-धीरे कांग्रेस की “सोशल इंजीनियरिंग” का बड़ा चेहरा बनता जा रहा है, टीकाराम जूली शांत अंदाज लेकिन मजबूत पकड़. मौजूदा नेता प्रतिपक्ष जूली विधानसभा में सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, उनके मु्द्दे भी ऐसे होते है कि बीजेपी चुप्पी साध लेती है. कांग्रेस अगर 2028 में दलित और सामाजिक समीकरणों पर बड़ा दांव खेलती है. तो टीकाराम जूली सबसे बड़ा सरप्राइज बन सकते हैं

एक तरफ अनुभव…दूसरी तरफ युवा जोश… तीसरी तरफ संगठन की ताकत…और चौथी तरफ सामाजिक समीकरण. अब देखना होगा कि 2028 में कांग्रेस का पोस्टर किस चेहरे से सजता है। गहलोत? पायलट? डोटासरा? या फिर टीकाराम जूली? क्योंकि राजस्थान की राजनीति में… अगला बड़ा युद्ध अब “चेहरे” का है।
JP Sharma 
