Jaipur Traffic News: जयपुर में AI संभालेगा ट्रैफिक, 253 बड़े चौराहों पर बदलेगा सिग्नल सिस्टम, जाम से मिलेगी राहत

जयपुर में AI आधारित Intelligent Traffic Management System (ITMS) लागू होने की तैयारी है। अब ट्रैफिक सिग्नल वाहनों की संख्या के अनुसार अपने आप बदलेंगे। 253 प्रमुख चौराहों पर जल्द शुरू होगी नई व्यवस्था।

Jaipur Traffic News: जयपुर में AI संभालेगा ट्रैफिक, 253 बड़े चौराहों पर बदलेगा सिग्नल सिस्टम, जाम से मिलेगी राहत
Traffic signal

Jaipur AI Traffic System: अगर आप रोज जयपुर की सड़कों पर ट्रैफिक जाम से परेशान रहते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। राजस्थान पुलिस और जयपुर ट्रैफिक पुलिस शहर में ट्रैफिक कंट्रोल का तरीका पूरी तरह बदलने जा रही है। अब चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल तय समय के बजाय सड़क पर मौजूद वाहनों की संख्या के अनुसार अपने आप बदलेंगे। यानी जिस दिशा में ज्यादा वाहन होंगे, वहां ग्रीन सिग्नल अधिक समय तक रहेगा और जहां ट्रैफिक कम होगा, वहां सिग्नल जल्दी बदल जाएगा।

रामबाग सर्किल पर इस नई AI आधारित इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) का 39 दिनों तक सफल ट्रायल किया गया। इसके बाद अब जयपुर के 423 चौराहों में से 253 प्रमुख चौराहों पर इसे लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।

कैसे काम करेगा AI ट्रैफिक सिस्टम?

फिलहाल शहर के अधिकांश ट्रैफिक सिग्नल फिक्स टाइमर पर चलते हैं। चाहे सड़क खाली हो या लंबा जाम लगा हो, सिग्नल तय समय पर ही बदलता है। नई AI तकनीक इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल देगी।

चौराहों पर लगाए गए स्मार्ट कैमरे हर समय वाहनों की संख्या का विश्लेषण करेंगे। जिस लेन में ज्यादा ट्रैफिक होगा, वहां ग्रीन लाइट की अवधि स्वतः बढ़ जाएगी, जबकि कम ट्रैफिक वाली दिशा में सिग्नल जल्दी बदल जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में किसी ट्रैफिक पुलिसकर्मी के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होगी।

रामबाग सर्किल पर ट्रायल रहा सफल

3 जून से 11 जुलाई 2026 तक रामबाग सर्किल पर इस सिस्टम का परीक्षण किया गया। ट्रायल के दौरान बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के 4.88 लाख से अधिक वाहन आसानी से चौराहा पार कर सके।

इस दौरान प्रत्येक लेन में वाहन चालकों का 8 से 45 सेकंड तक समय बचा। कम समय तक वाहनों के रुकने से ईंधन की बचत हुई और 39 दिनों में लगभग 2,535 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन कम दर्ज किया गया।

नियम तोड़ने वालों पर भी रखेगा नजर

यह AI सिस्टम केवल ट्रैफिक संचालन तक सीमित नहीं रहेगा। चौराहों पर लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे वाहनों के नंबर प्लेट को पढ़कर उनकी जानकारी तुरंत सिस्टम में दर्ज करेंगे।

ट्रायल के दौरान एक कैमरा प्रतिदिन लगभग 4,200 वाहनों का डेटा रिकॉर्ड कर रहा था। इनमें औसतन 450 ऐसे वाहन मिले, जिनसे संबंधित चालान की जानकारी सिस्टम ने स्वतः दर्ज कर ली।

नई व्यवस्था के जरिए इन नियमों पर विशेष नजर रखी जाएगी—

रेड लाइट जंप

ओवरस्पीडिंग

रॉन्ग साइड ड्राइविंग

लेन उल्लंघन

लंबित चालान वाले वाहन

यदि किसी वाहन पर पहले से चालान बकाया होगा, तो उसकी जानकारी भी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी।

राजस्थान पुलिस की निगरानी में चल रहा प्रोजेक्ट

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राजस्थान पुलिस की पहल पर विकसित किया जा रहा है। ट्रैफिक डीसीपी योगेश गोयल की निगरानी में इसका ट्रायल पूरा हुआ, जबकि तकनीकी सहयोग डेटा कोर इन्फोटेक ने दिया है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहे हैं।

अगले चरण में और होगी स्मार्ट व्यवस्था

प्रोजेक्ट के अगले चरण में एक चौराहे का AI दूसरे चौराहे से भी जुड़ जाएगा। यदि आगे किसी स्थान पर अधिक ट्रैफिक होगा तो पीछे के सिग्नल भी उसी के अनुसार स्वतः नियंत्रित होंगे, जिससे पूरे ट्रैफिक कॉरिडोर का संचालन अधिक सुचारु हो सकेगा।

भविष्य में इस सिस्टम में एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य इमरजेंसी वाहनों के लिए ऑटोमैटिक ग्रीन कॉरिडोर की सुविधा भी जोड़ी जाएगी, ताकि आपातकालीन सेवाओं को जाम में न फंसना पड़े।

आम लोगों को क्या होगा फायदा?

नई AI आधारित ट्रैफिक व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन चालकों को कई बड़े लाभ मिलेंगे। चौराहों पर इंतजार का समय कम होगा, यात्रा तेज होगी, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। साथ ही ट्रैफिक पुलिस चौराहों पर सिग्नल संभालने के बजाय दुर्घटना संभावित क्षेत्रों, स्कूलों, बाजारों और जाम वाले इलाकों पर अधिक प्रभावी ढंग से निगरानी कर सकेगी।

यदि योजना तय समय पर लागू होती है, तो आने वाले समय में जयपुर देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल होगा, जहां ट्रैफिक सिग्नल इंसानों के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आधार पर संचालित होंगे।