जयपुर की बबीता के आतंकियों से तार! कंधार हाईजैक के मास्टरमाइंड से चैट, ATS जांच में 'लेडी स्लीपर सेल' की साजिश का खुलासा
जयपुर की बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा मामले में ATS की जांच में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध संपर्कों और कथित लेडी स्लीपर सेल नेटवर्क की आशंका सामने आई है। मामले की जांच जारी है।
Jaipur News: जयपुर के वाटिका क्षेत्र से गिरफ्तार 36 वर्षीय बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा की जांच में ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। राजस्थान एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की पड़ताल में सामने आया है कि बबीता का संपर्क पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कई संदिग्ध लोगों से था। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसका इस्तेमाल राजस्थान में कथित "लेडी स्लीपर सेल" तैयार करने के लिए किया जा रहा था।
मोबाइल जांच में सामने आए कई अहम सुराग
एटीएस के मुताबिक, बबीता के कब्जे से बरामद मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में कई संदिग्ध चैट, संपर्क और सोशल मीडिया गतिविधियां सामने आई हैं। शुरुआती जांच में पता चला कि उसने गिरफ्तारी से पहले काफी डिजिटल डेटा डिलीट करने की कोशिश की थी, लेकिन रिकवर हुए डेटा से कई अहम जानकारियां मिली हैं।
बताया गया है कि वह फेसबुक पर "Duniya Dhokhebaaz" नाम से सक्रिय थी। उसकी फ्रेंड लिस्ट में करीब 370 अकाउंट थे, जिनमें बड़ी संख्या पाकिस्तान और अन्य देशों से संचालित प्रोफाइलों की बताई जा रही है। जांच में लगभग 100 संदिग्ध प्रोफाइलों की पहचान कर उनका रिकॉर्ड राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के डेटाबेस से मिलाया जा रहा है।
तीन बड़े आतंकी नाम जांच के दायरे में
एटीएस के अनुसार अब तक जिन नामों की पहचान हुई है, उनमें भारत में बड़ी आतंकी घटनाओं से जुड़े तीन प्रमुख चेहरे शामिल हैं।
1. कारी जरार
जांच एजेंसियों के अनुसार कारी जरार का नाम वर्ष 2016 में जम्मू-कश्मीर के नागरोटा सैन्य शिविर पर हुए आतंकी हमले की साजिश से जुड़ा रहा है। एटीएस का दावा है कि बबीता उसके संपर्क में थी और डिजिटल माध्यम से बातचीत होती थी। बरामद नंबरों की जांच केंद्रीय एजेंसियों की मदद से कराई जा रही है।
2. यूसुफ अजहर उर्फ उस्ताद गौरी
यूसुफ अजहर का नाम 1999 के चर्चित इंडियन एयरलाइंस IC-814 विमान अपहरण कांड की जांच में सामने आया था। एटीएस का कहना है कि बबीता के मोबाइल में एक संदिग्ध नंबर उर्दू में अलग नाम से सेव मिला, जिसकी जांच के दौरान उसका संबंध यूसुफ अजहर से जोड़ा गया। इस संबंध में एजेंसियां तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों की पुष्टि कर रही हैं।
3. अबू उबैदाह
पूछताछ में बबीता ने कथित रूप से बताया कि उसकी पहचान सोशल मीडिया के जरिए अबू उबैदाह नाम के व्यक्ति से हुई थी। एटीएस का दावा है कि वह जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा कमांडर और प्रवक्ता है। जांच के मुताबिक, बबीता उसके प्रभाव में आई और उससे शादी करने की इच्छा भी जताई थी।
'लेडी स्लीपर सेल' बनाने की आशंका
जांच एजेंसियों को आशंका है कि पाकिस्तान से संचालित आतंकी नेटवर्क महिलाओं को सोशल मीडिया के जरिए निशाना बनाकर उनका ब्रेनवॉश करने की कोशिश कर रहा था। एटीएस का मानना है कि बबीता इसी कथित मॉड्यूल का हिस्सा थी और उसके माध्यम से राजस्थान में महिला स्लीपर सेल तैयार करने की योजना बनाई जा रही थी।
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। यदि डिलीट किया गया डेटा पूरी तरह रिकवर हो जाता है तो कई और संदिग्ध संपर्कों और संभावित नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
मैसेंजर और व्हाट्सएप की भी जांच
फॉरेंसिक जांच में फेसबुक मैसेंजर और व्हाट्सएप से भी कई संदिग्ध संपर्क सामने आए हैं। जांच एजेंसियां पाकिस्तान और अफगानिस्तान से जुड़े कुछ नंबरों और अकाउंट्स की भी जांच कर रही हैं। इन सभी डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण साइबर विशेषज्ञों और केंद्रीय एजेंसियों की मदद से किया जा रहा है।
2018 से पिता के घर रह रही थी बबीता
बबीता मूल रूप से करौली जिले के नादौती क्षेत्र की रहने वाली है। उसकी शादी हिंडौन सिटी में हुई थी, लेकिन वैवाहिक विवाद के बाद वह वर्ष 2018 से जयपुर के वाटिका स्थित अपने पिता के घर रह रही थी। पति के साथ तलाक और अन्य कानूनी मामले भी अदालत में लंबित बताए गए हैं।
फिलहाल न्यायिक हिरासत में
एटीएस ने 19 जून को बबीता को उसके घर से गिरफ्तार किया था। पूछताछ के लिए रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच एजेंसियां अब उसके डिजिटल नेटवर्क, विदेशी संपर्कों और संभावित आतंकी मॉड्यूल से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।

