आसाराम जोधपुर जेल में सरेंडर की तैयारी में, हाईकोर्ट के फैसले के बाद हलचल तेज

नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद आसाराम के सरेंडर की प्रक्रिया तेज हो गई है। वह जोधपुर पहुंच चुके हैं और जल्द ही सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण कर सकते हैं।

आसाराम जोधपुर जेल में सरेंडर की तैयारी में, हाईकोर्ट के फैसले के बाद हलचल तेज
जोधपुर एयरपोर्ट से बाहर निकलता आसाराम ।

जोधपुर में नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद आसाराम के सरेंडर की प्रक्रिया तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, वह जोधपुर पहुंच चुका है और गुरुवार शाम 5 बजे से पहले जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण कर सकता है।

एयरपोर्ट पर समर्थकों की भीड़, गाड़ी से दिया आशीर्वाद

आसाराम के जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचने पर बड़ी संख्या में समर्थक वहां इकट्ठा हो गए। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई। बताया जा रहा है कि आसाराम ने गाड़ी से समर्थकों की ओर हाथ हिलाकर आशीर्वाद भी दिया।

एयरपोर्ट से वह सीधे अपने पाल गांव स्थित आश्रम पहुंचा, जिसके बाद वह इलाज के लिए एम्स (AIIMS) में भर्ती हो गया। इसके बाद उसके जेल में सरेंडर करने की प्रक्रिया तय मानी जा रही है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी कानूनी कार्रवाई

यह पूरा घटनाक्रम राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले के बाद सामने आया है, जिसमें कोर्ट ने नाबालिग से रेप मामले में आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अंतरिम जमानत रद्द कर दी थी।

कोर्ट ने आदेश के तुरंत बाद गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद आसाराम बुधवार देर शाम हरिद्वार से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था।

हरिद्वार से दिल्ली और फिर जोधपुर तक सफर

सूत्रों के अनुसार, जब कोर्ट का फैसला सामने आया, उस समय आसाराम हरिद्वार में मौजूद था। गिरफ्तारी वारंट जारी होने की जानकारी मिलते ही वह सड़क मार्ग से दिल्ली के लिए रवाना हो गया।

समर्थकों का दावा है कि लंबी यात्रा के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उसे दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि कानूनी जानकारों की सलाह के बाद अब उसके सरेंडर करने का रास्ता साफ हो गया है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी की कैद की सीमाएं हैं, लेकिन पीड़िता को जो मानसिक आघात मिला है, उसकी कोई सीमा नहीं है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत का कोई आधार नहीं बनता, जिसके बाद उसे तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया गया।

सह-आरोपियों को राहत

इस मामले में कोर्ट ने दो सह-आरोपियों, हॉस्टल वार्डन शिल्पी और शरत चंद्र को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने माना कि उनके खिलाफ आपराधिक साजिश में शामिल होने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

2013 से चल रहा है मामला

यह मामला वर्ष 2013 का है, जब जोधपुर के मनई आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप सामने आया था। ट्रायल कोर्ट ने 2018 में दोषियों को सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने बरकरार रखा