Rajasthan News: सरकारी नौकरी छोड़ने वालों पर सख्ती, ट्रेनिंग का खर्च वसूलेगी सरकार; महिला कर्मचारियों को मिली राहत
राजस्थान सरकार ने सरकारी नौकरी के बाद प्रशिक्षण लेकर जल्द सेवा छोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए बॉन्ड अनिवार्य किया है। वहीं चाइल्ड केयर लीव और सरोगेसी के मामलों में महिला कर्मचारियों को नई सुविधाएं दी गई हैं, जिसमें सरोगेट मां को 180 और कमीशनिंग मां को 90 दिन का मातृत्व अवकाश शामिल है।
राजस्थान में सरकारी नौकरी ज्वाइन करने के बाद प्रशिक्षण लेकर जल्द सेवा छोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने नियम सख्त कर दिए हैं। नए प्रावधानों के तहत राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद स्वतंत्र प्रभार संभालने से पहले निर्धारित प्रशिक्षण लेने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षण शुरू होने से पहले बॉन्ड देना होगा।
यदि कर्मचारी प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण पूरा होने के दो साल के भीतर इस्तीफा देता है या दूसरी नौकरी स्वीकार करता है, तो सरकार प्रशिक्षण पर हुए खर्च और अन्य संबंधित खर्च की वसूली कर सकेगी। हालांकि, इस वसूली में कर्मचारी को दिया गया वेतन और नियमानुसार प्राप्त यात्रा एवं दैनिक भत्ते शामिल नहीं होंगे।
दूसरी सरकारी नौकरी मिलने पर अलग होगा नियम
यदि किसी कर्मचारी को केंद्र सरकार, किसी अन्य राज्य सरकार, केंद्र या राजस्थान सरकार के पूर्ण या आंशिक स्वामित्व वाले सार्वजनिक उपक्रम, क्वासी-गवर्नमेंट संगठन, RBI या ग्रामीण बैंक में नौकरी मिलती है और इसके लिए उसे राजस्थान सरकार की सेवा छोड़नी पड़ती है, तो मूल बॉन्ड की शर्त उसी रूप में लागू नहीं होगी।
ऐसे कर्मचारी से नए नियोक्ता के यहां निर्धारित अवधि तक सेवा करने के लिए नया बॉन्ड लिया जाएगा। इसकी अवधि और शर्तें संबंधित प्रशासनिक विभाग तय करेगा।
6 महीने तक की ट्रेनिंग पर 1 साल सेवा जरूरी
तीन महीने से अधिक अवधि के प्रशिक्षण पर भेजे गए और नियम 7(8)(बी) के तहत ड्यूटी पर माने गए कर्मचारियों पर भी बॉन्ड की शर्त लागू होगी।
नए प्रावधान के अनुसार, तीन महीने से अधिक और छह महीने तक के प्रशिक्षण के बाद कर्मचारी को कम से कम एक साल राज्य सरकार की सेवा करनी होगी। वहीं, छह महीने से अधिक अवधि के प्रशिक्षण के बाद कम से कम दो साल राज्य सेवा में रहना जरूरी होगा।
निर्धारित अवधि पूरी किए बिना सेवा छोड़ने या दूसरी नौकरी स्वीकार करने पर प्रशिक्षण पर हुए खर्च की वसूली की जा सकेगी।
पहले से नौकरी के लिए आवेदन करने वालों को भी राहत
यदि किसी कर्मचारी ने राजस्थान सरकार की सेवा में शामिल होने से पहले ही केंद्र सरकार, किसी अन्य राज्य सरकार, सरकारी उपक्रम या संबंधित संस्थाओं में नौकरी के लिए आवेदन किया था और उस समय आवेदन उचित माध्यम से भेजना संभव नहीं था, तो उसे भी इस प्रावधान का लाभ मिल सकता है।
इसके लिए कर्मचारी को राजस्थान सरकार की सेवा में शामिल होने के एक महीने के भीतर सरकार को इसकी जानकारी देनी होगी।
चाइल्ड केयर लीव के नियमों में बदलाव
राज्य सरकार ने महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव के नियमों में भी बदलाव किया है। अब सामान्य परिस्थितियों में यह अवकाश एक कैलेंडर वर्ष में तीन से अधिक स्पेल में नहीं दिया जाएगा।
इसके अलावा सरोगेसी के मामले में महिला सरकारी कर्मचारियों को पहली बार अलग मातृत्व अवकाश का प्रावधान किया गया है।
सरोगेट मां को 180 और कमीशनिंग मां को 90 दिन की छुट्टी
यदि सरोगेट मां और कमीशनिंग मां में से कोई एक या दोनों सरकारी कर्मचारी हैं, तो सरोगेट मां को अधिकतम 180 दिन तक मातृत्व अवकाश और कमीशनिंग मां को 90 दिन तक मातृत्व अवकाश दिया जा सकेगा।
सरोगेट मां के लिए विवाहित महिला सरकारी कर्मचारी होना, उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होना और इम्प्लांटेशन के समय उसका स्वयं का बच्चा होना जैसी शर्तें निर्धारित की गई हैं। वहीं, कमीशनिंग मां की उम्र 23 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
इन बदलावों के जरिए एक ओर सरकार ने प्रशिक्षण के बाद जल्द नौकरी छोड़ने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव और सरोगेसी से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सुविधाएं देने का प्रावधान किया है।

