Jaipur Heritage: 250 साल पुरानी दुसाद भवन हवेली आज भी शान से खड़ी
Jaipur की 250 साल पुरानी Dusad Bhavan Haveli अपनी अनोखी वास्तुकला, शीशमहल और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है।
जयपुर अपने किलों और महलों के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन यहां की सदियों पुरानी हवेलियां भी इस शहर की असली पहचान हैं। पुराने शहर के चारदीवारी इलाके में आज भी सैकड़ों साल पुरानी हवेलियां अपने शानदार स्थापत्य और बेजोड़ कारीगरी के साथ मौजूद हैं।
विरासत में मिली अनमोल धरोहर
इन्हीं में से एक है दुसाद भवन हवेली, जो सौंखियों के रास्ते में स्थित है। करीब 250 साल पुरानी यह हवेली आज भी अपने मूल स्वरूप में कायम है। यहां रहने वाले विपिन नाटानी के अनुसार, यह हवेली उनके पूर्वजों को उस समय मिली थी जब वे राजा-महाराजाओं के दीवान हुआ करते थे। तब से यह हवेली पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार के पास सुरक्षित है।
अनोखी वास्तुकला और डिजाइन
तीन मंजिला इस हवेली में करीब 12 कमरे बने हुए हैं, जो आपस में जुड़े हुए हैं। पुराने समय की वास्तुकला के अनुसार इसमें झरोखे, मेहराबदार दरवाजे और पारंपरिक खिड़कियां बनाई गई हैं। हर कोना उस दौर की कला और जीवनशैली की झलक दिखाता है।
हवामहल और शीशमहल की झलक
हवेली के अंदर बना छोटा ‘हवामहल’ इसका प्रमुख आकर्षण है, जहां से हवा और रोशनी का बेहतरीन संतुलन देखने को मिलता है।
इसके अलावा यहां का शीशमहल खास तौर पर ध्यान खींचता है। दीवारों पर कांच की जड़ाई, आराइश का काम और पारंपरिक पेंटिंग इसे बेहद खूबसूरत बनाते हैं।
हर कोने में बसी है पुरानी कहानी
हवेली के अंदर आज भी पुराने समय की कई दुर्लभ वस्तुएं सुरक्षित रखी गई हैं—जैसे पुराने लैंप, फर्नीचर और पारंपरिक सामान।
गोल आकार के दरवाजे, विशाल आंगन, रसोई और अलग-अलग हिस्सों में बनी संरचना उस दौर की जीवनशैली को दर्शाती है।
Saloni Kushwaha 
