जयपुर: NIA में पंचकर्म पद्धति, तनाव-खानपान से बीमारियों तक का इलाज
भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, अनियमित खानपान और बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों के बीच लोग एक बार फिर हजारों साल पुरानी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की ओर लौट रहे हैं। आयुर्वेद में पंचकर्म को सिर्फ इलाज नहीं बल्कि शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का माध्यम माना जाता है। जयपुर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में बड़ी संख्या में मरीज पंचकर्म चिकित्सा का लाभ लेने पहुंच रहे हैं। आखिर पंचकर्म क्या है, कैसे काम करता है और किन बीमारियों में इसे कारगर माना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात, पित्त और कफ तीन प्रमुख दोष होते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है तो शरीर बीमारियों की चपेट में आने लगता है। इन्हीं दोषों को संतुलित करने के लिए पंचकर्म चिकित्सा का सहारा लिया जाता है। पंचकर्म का अर्थ है पांच प्रमुख उपचार प्रक्रियाएं। इनमें वमन, विरेचन, बस्ति, नस्य और रक्तमोक्षण शामिल हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया शरीर में जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालकर रोगों की जड़ तक पहुंचने का काम करती है... भगवान से कम नहीं समझे जाने वाले डॉक्टर की सराहना मरीजों के परिजन कर रहे है.. अलवर निवासी 12 वीं क्लास के छात्र का वजन 150 किलो हो गया जिन्होंने दिल्ली के कई हॉस्पिटल व sms जयपुर मे उपचार कराया जहाँ कोई फायदा नहीं हुवा आखिरकार वे राष्ट्रीय आयुर्वैदिक संस्थान जयपुर मे ईलाज करवा रहे है जिनसे कुछ महीनो मे ही 40 किलो वजन कम हुवा है

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में गठिया, सर्वाइकल, कमर दर्द, माइग्रेन, त्वचा रोग, मोटापा, तनाव और अनिद्रा जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीज पंचकर्म चिकित्सा के लिए पहुंच रहे हैं। उपचार शुरू करने से पहले मरीज की प्रकृति, बीमारी और शारीरिक स्थिति का विस्तृत परीक्षण किया जाता है। इसके बाद विशेषज्ञों की निगरानी में अलग-अलग पंचकर्म प्रक्रियाएं कराई जाती हैं। उपचार करा कर लाभ ले रहे मरीजों ने बताया कि यह उपचार केवल बीमारी दूर करने तक सीमित नहीं है बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करने में मदद करता है। वही डॉ वैभव बापत ना कहना है की आज के दौर की समस्याओं का निराकरण पंचकर्म से किया जा सकता है।
मालिश या स्पा थैरेपी नहीं
पंचकर्म को लेकर आम लोगों के बीच कई तरह की भ्रांतियां भी मौजूद हैं। कई लोग इसे केवल मालिश या स्पा थैरेपी समझते हैं, एनआईए में पंचकर्म विभाग के एचओडी डॉ. गोपेश मंगल के अनुसार यह एक वैज्ञानिक और चिकित्सकीय प्रक्रिया है जिसे प्रशिक्षित चिकित्सकों की निगरानी में ही कराया जाना चाहिए। पंचकर्म विभाग के HoD डॉ गोपेश मंगल ने बताया कि हर व्यक्ति के लिए पंचकर्म की प्रक्रिया अलग हो सकती है और बिना चिकित्सकीय सलाह के इसे अपनाना नुकसानदायक भी हो सकता है।
बीमारियों के बीच पंचकर्म की लोकप्रियता
आधुनिक जीवनशैली के कारण बढ़ रही बीमारियों के बीच पंचकर्म की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही खानपान, योग और दिनचर्या के साथ पंचकर्म को अपनाया जाए तो कई बीमारियों से बचाव संभव है। यही वजह है कि आज पंचकर्म केवल एक उपचार पद्धति नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनता जा रहा है।

पंचकर्म को आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण उपचार पद्धतियों में से एक माना जाता है। बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के दौर में यह चिकित्सा पद्धति लोगों के लिए एक वैकल्पिक उम्मीद बनकर उभर रही है। हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि किसी भी उपचार को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।
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JP Sharma 
