राजस्थानियों को बिजली का झटका, रूफटॉप सोलर के लिए आ रहे हैं नये नियम

प्रदेशवासियों को राहत देने वाला सोलर अब महंगा होने की संभावना है।

राजस्थानियों को बिजली का झटका, रूफटॉप सोलर के लिए आ रहे हैं नये नियम

राजस्थान में बिजली उपभोक्ताओं को बिजली खर्च बचाने की कवायद को बड़ा झटका लगने वाला है। प्रदेश में आगामी एक जून से सोलर प्रोजेक्ट्स में स्वदेशी सोलर मॉड्यूल सेल (डीसीआर) के साथ लगाना अनिवार्य किया जा रहा है। इसके बाद सभी नए सोलर पैनल पूरी तरह स्वदेशी होंगे। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की तय समय सीमा से सोलर इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर रूफटॉप सोलर लगाने वाले आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा।


सोलर हो सकते हैं महंगे
डवलपर्स और उद्योग संगठनों का कहना है कि देश में डीसीआर मॉड्यूल की उत्पादन क्षमता मांग के मुकाबले काफी कम है, जिससे सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत 25 से 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। सोलर डवलपर्स संगठनों ने ऊर्जा विभाग और मंत्रालय को पत्र भेजकर समय सीमा बढ़ाने की जरूरत जताई है। उनका कहना है कि ऐसा नहीं होने पर कई सोलर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार थम सकती है।

उपभोक्ता पर पड़ेगी मार
सोलर की बढ़ती मांग को लेकर विशेषज्ञों के अनुसार देश में डीसीआर मॉड्यूल की वास्तविक उत्पादन क्षमता फिलहाल 15-20 गीगावाट है, जबकि सालाना मांग करीब 50 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। मांग और आपूर्ति के इस बड़े अंतर से मॉड्यूल की कीमतों में बढो़तरी हो रही है। डवलपर्स का कहना है कि अब तक पांच किलोवाट से अधिक क्षमता के कई रूफटॉप सिस्टम कम लागत वाले नॉन-डीसीआर मॉड्यूल से लगाए जा रहे थे, लेकिन अब यह विकल्प खत्म होने से आम उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर महंगा पड़ सकता है। कीमतें बढ़ने पर रूफटॉप सोलर सिस्टम आम बिजली उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर होना तय है। ऐसे में बिजली बिलों की मार बढ़ने की आशंका है।

सोलर एसोसिएशन और डवलपर्स ने मांगा अतिरिक्त समय
देश में सोलर उपकरणों का निर्माण बढ़ाने का प्रयास अच्छा है, लेकिन अभी बाजार पूरी तरह इसके लिए तैयार नहीं है। नया नियम लागू होने पर सोलर पैनल महंगे हो सकते हैं और कई सोलर प्रोजेक्ट की रफ्तार थम जाएगी। इसका असर घरों, दुकानों और उद्योगों में लगने वाले रूफटॉप सोलर सिस्टम पर भी पड़ेगा। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना चाहिए।