आसाराम को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, उम्रकैद की सजा बरकरार

Asaram को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जोधपुर मुख्यपीठ ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। हालांकि सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को अदालत ने बरी कर दिया।

आसाराम को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, उम्रकैद की सजा बरकरार

Rajasthan High Court की जोधपुर मुख्यपीठ ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में Asaram को बड़ा झटका देते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।

जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने बुधवार (27 मई) को यह फैसला सुनाया। हालांकि मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को अदालत ने बरी कर दिया।

20 अप्रैल को सुरक्षित रखा गया था फैसला

खंडपीठ ने मामले में लंबी सुनवाई के बाद 20 अप्रैल 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब फैसला सुनाते हुए अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराया।

आसाराम फिलहाल मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत पर बाहर है, लेकिन फैसले के बाद उसे सरेंडर करना होगा।

हाईकोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?

बचाव पक्ष का पक्ष

आसाराम के वकीलों ने अदालत में कहा कि:

मामला मनगढ़ंत है,

पीड़िता के माता-पिता के बयानों में विरोधाभास हैं,

घटना वाली रात कोई कॉल रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

बचाव पक्ष ने “समानता के सिद्धांत” का हवाला देते हुए कहा कि जब समान साक्ष्यों के आधार पर कुछ सह-आरोपियों को बरी किया गया, तो आसाराम को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

अभियोजन पक्ष ने क्या कहा?

अभियोजन पक्ष और पीड़िता के वकील पी.सी. सोलंकी ने अदालत में कहा कि:

पॉक्सो मामलों में पीड़िता का एकल बयान भी पर्याप्त साक्ष्य माना जाता है,

सुप्रीम कोर्ट भी इस सिद्धांत को मान्यता दे चुका है।

अभियोजन ने यह भी तर्क दिया कि:

मामले से जुड़े गवाहों पर हमले,

और कथित हत्याएं

इस बात की ओर इशारा करती हैं कि साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

अंतरिम जमानत 7 जुलाई तक बढ़ी

इसी बीच हाईकोर्ट की एक अन्य डिवीजन बेंच ने मेडिकल आधार पर मिली आसाराम की अंतरिम जमानत की अवधि 7 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी है।

यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश Sanjeev Prakash Sharma और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की बेंच ने दिया।