राजस्थान पुलिस हिरासत में युवक की मौत, CCTV से खुलेगा राज? मानवाधिकार आयोग ने मांगी फुटेज

जयपुर में 19 वर्षीय ऋतुराज लोहार की एसएमएस अस्पताल में मौत के बाद परिवार ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया है। मानवाधिकार आयोग ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

राजस्थान पुलिस हिरासत में युवक की मौत, CCTV से खुलेगा राज? मानवाधिकार आयोग ने मांगी फुटेज

राजस्थान पुलिस की हिरासत में एक 19 वर्षीय युवक की मौत के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मध्यप्रदेश के मंदसौर निवासी ऋतुराज लोहार की 5 अक्टूबर को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। युवक को 22 सितंबर को कथित ठगी के मामले में पुलिस थाने लाया गया था। अब परिवार पुलिस पर मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगा रहा है, जबकि पुलिस इन आरोपों से इनकार कर रही है।

मामले में राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग की एंट्री के बाद जांच और महत्वपूर्ण हो गई है। आयोग ने मुहाना थाने की संबंधित अवधि की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और उसे सीलबंद स्थिति में पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की प्रभावी जांच आईपीएस स्तर के अधिकारी से कराने को कहा गया है। आयोग ने 23 अक्टूबर को मामले की अनुपालन रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं।

आखिर 22 सितंबर को क्या हुआ था?

परिजनों के मुताबिक, पूरा मामला 17 सितंबर से शुरू हुआ। ऋतुराज के पिता प्रकाश दुबई से जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे थे। उनके अनुसार एयरपोर्ट के बाहर कुछ लोगों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए उनके सामान की तलाशी ली। पिता का दावा है कि तलाशी में कुछ नहीं मिला, लेकिन इसके बाद उन्हें और ऋतुराज को एक होटल ले जाया गया।

प्रकाश के मुताबिक, वह 21 सितंबर को वहां से निकल गए, जबकि ऋतुराज वहीं रह गया। परिवार का आरोप है कि इसके बाद युवक के साथ मारपीट की गई और 22 सितंबर को उसे जयपुर के मुहाना थाने लाया गया। थाने में तबीयत बिगड़ने के बाद उसे पहले निजी अस्पताल और फिर एसएमएस अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल में इलाज के दौरान सामने आई सिर की चोट

परिवार का आरोप है कि ऋतुराज के सिर में गंभीर चोट लगी थी। उसका इलाज जयपुर के एसएमएस अस्पताल में चल रहा था, लेकिन करीब 13 दिन बाद उसकी मौत हो गई। मंगलवार को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद परिजन शव लेकर मंदसौर रवाना हो गए।

परिजनों ने पुलिस पर युवक के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने से पहले नहीं हुई है।

डॉक्टर ने बताई ब्रेन इंजरी, कारण की जांच जरूरी

ऋतुराज के दो CT स्कैन किए गए थे। एक नारायणा अस्पताल और दूसरा एसएमएस अस्पताल में हुआ। एसएमएस अस्पताल में इलाज करने वाले डॉक्टर श्रीकांत शर्मा के मुताबिक, युवक के ब्रेन में डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी सामने आई थी।

डॉक्टर के अनुसार ऐसी चोट कई परिस्थितियों में हो सकती है। सिर्फ CT स्कैन के आधार पर चोट किस वजह से लगी, यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता। इसके लिए अन्य मेडिकल और जांच संबंधी तथ्यों को भी देखना जरूरी होगा।

 अलग-अलग नाम से भर्ती कराने का भी आरोप

परिजनों ने अस्पताल में युवक को अलग-अलग नाम से भर्ती कराने का भी आरोप लगाया है। परिवार के अनुसार, मुहाना के लकी हॉस्पिटल में उसे ‘ऋषिराज’ नाम से भर्ती कराया गया, जबकि नारायणा अस्पताल में उसका नाम ‘ऋतु’ दर्ज किया गया।

लकी हॉस्पिटल के संचालक डॉ. अनिल जैन के मुताबिक, युवक को शाम करीब 4:15 बजे अस्पताल लाया गया था और लगभग तीन घंटे बाद डिस्चार्ज किया गया। डॉक्टर ने उसे आरयूएचएस या महात्मा गांधी अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी। इसके बाद 23 सितंबर को पुलिस उसे एसएमएस अस्पताल लेकर पहुंची।

सांप के काटने का दावा भी जांच के घेरे में

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि नारायणा अस्पताल में पुलिस की ओर से युवक की हालत को सांप के काटने से जोड़कर बताया गया था। परिवार के मुताबिक, युवक को एंटीवेनम भी दिया गया, लेकिन उसके शरीर पर सांप के काटने के निशान नहीं थे।

यह आरोप भी फिलहाल जांच का हिस्सा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल रिकॉर्ड इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

 मानवाधिकार आयोग ने मांगी CCTV फुटेज

युवक की मौत के बाद राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर, जयपुर जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (मानवाधिकार) से रिपोर्ट मांगी है।

आयोग ने मुहाना थाने की CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने के साथ उसे सीलबंद हालत में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा जांच आईपीएस स्तर के अधिकारी से कराने को कहा गया है। अब CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

पुलिस ने टॉर्चर के आरोपों से किया इनकार

मुहाना थाना प्रभारी मुकेश खराड़िया ने युवक के साथ मारपीट या टॉर्चर किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक मामला विदेश से सस्ता सोना लाने के नाम पर करीब 22 लाख रुपये के लेनदेन और कथित ठगी से जुड़ा था।

पुलिस का कहना है कि ऋतुराज को 21 सितंबर को मनोज नाम का व्यक्ति थाने लेकर आया था और इसके बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। पुलिस के मुताबिक मामले की जांच एसीपी स्तर पर की जा रही है।

परिवार ने की निष्पक्ष जांच की मांग

ऋतुराज के परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। राष्ट्रीय पशुपालक संघ और डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राइका ने भी मामले में पुलिस की भूमिका की जांच की मांग उठाई है।

उनका कहना है कि यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। परिवार और संगठन की ओर से न्याय नहीं मिलने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

अब इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि ऋतुराज को लगी चोट की वास्तविक वजह क्या थी और 22 सितंबर से अस्पताल पहुंचने तक उसके साथ क्या हुआ? CCTV फुटेज, मेडिकल दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच की रिपोर्ट से इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।