शेयर बाजार में बिकवाली का तूफान, सेंसेक्स 1000 अंक लुढ़का; निफ्टी भी धड़ाम, निवेशकों के सामने अब बड़ा सवाल

सेंसेक्स में 1000 अंक से ज्यादा की गिरावट और निफ्टी 22,300 के नीचे क्यों पहुंचा? जानिए RBI की दर बढ़ोतरी, महंगे क्रूड, FII बिकवाली और वैश्विक संकेतों का बाजार पर असर।

शेयर बाजार में बिकवाली का तूफान, सेंसेक्स 1000 अंक लुढ़का; निफ्टी भी धड़ाम, निवेशकों के सामने अब बड़ा सवाल

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को निवेशकों के लिए कारोबार का दिन भारी उतार-चढ़ाव और बेचैनी भरा रहा। सुबह बाजार खुलने के बाद बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे फिसलते चले गए। सेंसेक्स करीब 1000 अंक टूटकर 71,600 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी 350 से अधिक अंक गंवाकर 22,250 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बाजार में आई इस कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर ऑटोमोबाइल, मेटल और रियल एस्टेट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव दिखाई दिया।

भारतीय शेयर बाजार पहले से ही लगातार गिरावट के दौर से गुजर रहा है। अब नौवें सप्ताह में भी कमजोरी बने रहने से निवेशकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर बाजार को संभलने के लिए किस संकेत का इंतजार है। घरेलू अर्थव्यवस्था से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है।

एक तरफ महंगा कर्ज, दूसरी तरफ बढ़ती लागत; कंपनियों के सामने दोहरी चुनौती

इस समय शेयर बाजार के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगे होते कर्ज और कारोबारी लागत में बढ़ोतरी की आशंका है। भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद कंपनियों के लिए वित्तीय परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।

जब बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होता है, तो कंपनियों के विस्तार, नई परियोजनाओं और उत्पादन बढ़ाने की योजनाओं पर इसका असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, होम लोन और वाहन लोन महंगे होने से रियल एस्टेट तथा ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग प्रभावित होने की आशंका रहती है।

बाजार को चिंता सिर्फ मौजूदा ब्याज दरों की नहीं है। निवेशक यह भी देख रहे हैं कि क्या आने वाले महीनों में महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई को और सख्त फैसले लेने पड़ सकते हैं। फिलहाल इसी अनिश्चितता का असर शेयरों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

दुनिया के बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेत, भारतीय शेयरों पर भी असर

भारतीय शेयर बाजार की मुश्किलें सिर्फ देश के भीतर की आर्थिक परिस्थितियों तक सीमित नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी निवेश का माहौल लगातार बदल रहा है।

अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले रिटर्न में बढ़ोतरी ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अमेरिका में लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड ऊंचे स्तरों पर पहुंचने से जोखिम वाले निवेश विकल्पों के प्रति आकर्षण कम हो सकता है।

इसका सीधा असर भारत जैसे उभरते बाजारों में देखने को मिलता है। विदेशी निवेशक जब अपनी पूंजी सुरक्षित या बेहतर रिटर्न देने वाले विकल्पों की ओर स्थानांतरित करते हैं, तो भारतीय शेयरों में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

गुरुवार को एशिया के अन्य प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान, दक्षिण कोरिया और हॉन्गकॉन्ग के बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने भारतीय निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।

तेल की कीमतों ने बढ़ाया बाजार का तनाव, भारत के आयात बिल पर भी खतरा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने की खबरों ने बाजार की चिंता बढ़ाई है।

मध्य पूर्व में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास समुद्री परिवहन से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं ने तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा की है। यदि तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।

भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर केवल पेट्रोलियम कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन, लॉजिस्टिक्स, निर्माण और कई अन्य क्षेत्रों की लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है।

महंगे तेल के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका भी पैदा होती है। इसका असर आम उपभोक्ताओं की खरीदारी की क्षमता और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि तेल बाजार में हलचल का प्रभाव शेयर बाजार में भी दिखाई दे रहा है।

विदेशी निवेशकों की दूरी, घरेलू संस्थानों की खरीदारी भी दबाव कम नहीं कर सकी

शेयर बाजार में लगातार जारी विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी माहौल को कमजोर किया है। उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगभग 6,121 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की।

इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 4,597 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। यानी भारतीय संस्थानों ने बाजार में पैसा लगाया, लेकिन विदेशी निवेशकों की निकासी का दबाव अधिक रहा।

बीते कई कारोबारी सत्रों से विदेशी पूंजी के बाहर जाने की खबरें बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। जब बड़े संस्थागत निवेशक लगातार अपनी हिस्सेदारी घटाते हैं, तो इसका असर प्रमुख कंपनियों के शेयरों और बाजार के सूचकांकों पर भी पड़ता है।

हालांकि, घरेलू निवेशकों और म्यूचुअल फंडों की खरीदारी कई मौकों पर बाजार को सहारा देती है, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के बीच यह देखना अहम होगा कि विदेशी बिकवाली कब धीमी पड़ती है।

निफ्टी के महत्वपूर्ण स्तर टूटे, बाजार में बेचने वालों का पलड़ा भारी

बाजार में गिरावट केवल आर्थिक चिंताओं की वजह से नहीं बढ़ी। तकनीकी स्तरों पर आई कमजोरी ने भी बिकवाली को तेज किया।

निफ्टी के 22,500 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे जाने के बाद ट्रेडर्स की चिंता बढ़ गई। तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से ऐसे स्तरों का टूटना बाजार में कमजोरी का संकेत माना जाता है।

जब कोई प्रमुख सूचकांक अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट के नीचे चला जाता है, तो पहले से लगाए गए स्टॉप लॉस सक्रिय हो सकते हैं। इससे बिकवाली का दबाव कुछ समय के लिए और बढ़ सकता है।

विश्लेषकों की नजर अब 22,300 और 22,180 जैसे स्तरों पर है। हालांकि, इन स्तरों तक पहुंचना निश्चित नहीं है। बाजार में नई खरीदारी, वैश्विक संकेतों में बदलाव या सकारात्मक आर्थिक खबरों से स्थिति बदल सकती है।

गिरते बाजार के बीच IPO निवेशकों को मिले अलग-अलग नतीजे

गुरुवार को शेयर बाजार में दो नई कंपनियों की लिस्टिंग ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा। कमजोर बाजार के बावजूद दोनों कंपनियों की शुरुआत एक जैसी नहीं रही।

विशाल निर्मिति के शेयर 220 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 215 रुपये पर सूचीबद्ध हुए। इस तरह निवेशकों को लिस्टिंग के समय लगभग 2.27 प्रतिशत का डिस्काउंट देखने को मिला।

दूसरी ओर, नित्यास जेम्स एंड ज्वैलरी ने सकारात्मक शुरुआत की। कंपनी के शेयर 75 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले NSE पर 80 रुपये और BSE पर 82 रुपये में सूचीबद्ध हुए।

इससे साफ है कि बाजार में व्यापक कमजोरी के बावजूद अलग-अलग कंपनियों को लेकर निवेशकों का रुझान अलग हो सकता है।

बुधवार से ही बिगड़ा था बाजार का मूड, गुरुवार को और गहराई कमजोरी

भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार की गिरावट अचानक सामने आई घटना नहीं है। इससे एक दिन पहले बुधवार को भी प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ बंद हुए थे।

7 अक्टूबर को सेंसेक्स 429 अंक गिरकर लगभग 72,639 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी करीब 173 अंक की गिरावट के साथ 22,603 पर पहुंच गया था।

अगले कारोबारी दिन गिरावट और तेज होने से बाजार में सतर्कता बढ़ गई। लगातार कमजोर प्रदर्शन के कारण निवेशक अब नए आर्थिक संकेतों और बाजार में स्थिरता आने का इंतजार कर रहे हैं।

क्या अभी और गिर सकता है शेयर बाजार?

भारतीय शेयर बाजार की आगे की दिशा अब कई महत्वपूर्ण परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। सबसे पहले निवेशक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखेंगे। यदि तेल की कीमतों में कमी आती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी कुछ चिंताएं कम हो सकती हैं।

इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। विदेशी पूंजी की निकासी धीमी पड़ने से बाजार को राहत मिल सकती है।

कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजे भी बाजार के लिए अहम होंगे। मजबूत आय और बेहतर कारोबारी अनुमान निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकते हैं, जबकि कमजोर नतीजों से दबाव जारी रह सकता है।

फिलहाल शेयर बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों के लिए केवल गिरावट या तेजी देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनियों की वित्तीय स्थिति, जोखिम और लंबी अवधि के निवेश लक्ष्यों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।