घड़साना बाजार अनिश्चितकाल के लिए बंद, व्यापारी संगठनों ने किसान आंदोलन को दिया समर्थन

घड़साना में किसान आंदोलन के समर्थन में व्यापारिक संगठनों ने अनिश्चितकाल के लिए बाजार बंद रखने का फैसला लिया है। मेडिकल सेवाएं और दूध की आपूर्ति बंद से बाहर रहेंगी।

घड़साना बाजार अनिश्चितकाल के लिए बंद, व्यापारी संगठनों ने किसान आंदोलन को दिया समर्थन

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के घड़साना में सिंचाई पानी की मांग को लेकर चल रहे किसान आंदोलन को अब व्यापारिक संगठनों का भी समर्थन मिला है। खाजूवाला, रावला और घड़साना के व्यापारियों की बैठक में किसानों की मांगों के समर्थन में बाजार बंद रखने का फैसला लिया गया है।

किसानों की मांगों को लेकर व्यापारियों की बैठक

घड़साना में किसान बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले मजदूरों और व्यापारियों की बैठक आयोजित की गई। व्यापार मंडल भवन में हुई इस बैठक में खाजूवाला, रावला और घड़साना के विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।

बैठक में क्षेत्र में चल रहे किसान आंदोलन और सिंचाई पानी से जुड़ी मांगों पर चर्चा की गई। इसके बाद व्यापारिक संगठनों ने आंदोलन के समर्थन में बाजार बंद रखने का निर्णय लिया।

मांगों का समाधान होने तक बंद रहेगा बाजार

व्यापारियों ने संयुक्त रूप से फैसला किया कि जब तक किसानों की मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक घड़साना बाजार अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगा।

व्यापारियों और मजदूरों ने कहा कि वे किसानों के आंदोलन के साथ एकजुटता बनाए रखेंगे और मांगों के समाधान तक बाजार बंद रखने में सहयोग करेंगे।

हालांकि, बाजार बंद के दौरान आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मेडिकल सेवाओं और दूध की आपूर्ति को इससे बाहर रखा गया है। इन आवश्यक सेवाओं को जारी रखने पर सहमति बनी है।

सिंचाई पानी बना आंदोलन का मुख्य मुद्दा

क्षेत्र में किसान लंबे समय से सिंचाई पानी की उपलब्धता और नहरों के पानी के रेगुलेशन से जुड़ी मांगें उठा रहे हैं। पिछले दिनों आंदोलन के दौरान खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ क्षेत्र में बाजार एवं मंडियां बंद रहने की खबरें सामने आई थीं। 24 सितंबर को किसानों ने NH-911 पर चक्काजाम भी किया था।

किसान संगठनों की मांगों में रबी फसलों के लिए पर्याप्त सिंचाई पानी और नियमित जल आपूर्ति से जुड़ी मांगें प्रमुख हैं।

सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर नजर

व्यापारियों के बाजार बंद करने के फैसले के बाद आंदोलन का असर अब व्यापारिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए।

अब क्षेत्र के लोगों की नजर सरकार और प्रशासन की ओर से किसानों की मांगों को लेकर उठाए जाने वाले अगले कदम पर है।