आयुष्मान योजना में फोटो का नया नियम, ICU मरीज की हर 8 घंटे में होगी जियो-टैगिंग; IMA राजस्थान ने जताई आपत्ति
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में ICU और डे-केयर पैकेज के लिए मरीज और डॉक्टर की जियो-टैग्ड फोटो जरूरी होगी। नए नियम 30 सितंबर 2026 से लागू होंगे।
राजस्थान में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत इलाज की निगरानी को लेकर नए प्रावधान लागू होने जा रहे हैं। राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक कुछ पैकेज में मरीज और डॉक्टर की जियो-टैग्ड फोटो अपलोड करने की व्यवस्था की गई है। नए प्रावधान **30 सितंबर 2026 से प्रभावी** होने की जानकारी सामने आई है।
योजना के तहत अस्पतालों में इलाज की प्रक्रिया और पैकेज के क्लेम की निगरानी के लिए डिजिटल सत्यापन को मजबूत करने की दिशा में यह व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में अस्पताल में भर्ती, ICU उपचार और डे-केयर जैसी सेवाएं शामिल हैं।
ICU मरीज की हर 8 घंटे में फोटो
नए निर्देशों के अनुसार **ICU पैकेज के तहत भर्ती मरीज की हर 8 घंटे में डॉक्टर और मरीज की जियो-टैग्ड फोटो अपलोड करनी होगी।** फोटो में मरीज और डॉक्टर के साथ उपचार से संबंधित निर्धारित विवरण दर्ज होने की व्यवस्था बताई गई है।
इसका उद्देश्य इलाज के दौरान मरीज की मौजूदगी और संबंधित पैकेज के तहत दी जा रही सेवाओं का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराना है। योजना में अस्पतालों के क्लेम और लेन-देन की ऑनलाइन निगरानी पहले से ही डिजिटल सिस्टम के माध्यम से की जाती है।
डे-केयर पैकेज में भी फोटो जरूरी
नए प्रावधान केवल ICU तक सीमित नहीं हैं। **डे-केयर पैकेज** के तहत भी मरीज और डॉक्टर की जियो-टैग्ड फोटो अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। यानी संबंधित उपचार के दौरान निर्धारित डिजिटल दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
IMA Rajasthan ने उठाए व्यावहारिक सवाल
नए नियमों को लेकर **IMA Rajasthan** ने व्यावहारिक आपत्तियां जताई हैं। संगठन के सचिव डॉ. एन.के. अग्रवाल के मुताबिक फर्जीवाड़े और गलत क्लेम को रोकने के लिए निगरानी की व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसे इस तरह लागू किया जाना चाहिए कि मरीज के इलाज पर असर न पड़े।
IMA की ओर से आशंका जताई गई है कि ICU जैसे गंभीर मामलों में बार-बार फोटो लेने और जियो-टैगिंग की प्रक्रिया से डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों का समय प्रशासनिक औपचारिकताओं में लग सकता है। संगठन ने नियमों को साक्ष्य-आधारित, व्यावहारिक और मरीज-केंद्रित बनाने की मांग की है।
फर्जीवाड़ा रोकने के साथ इलाज भी रहे प्राथमिकता
IMA Rajasthan ने डिजिटल वेरिफिकेशन और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के उद्देश्य का समर्थन किया है। हालांकि संगठन का कहना है कि नए प्रावधानों के वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिए और जरूरत के अनुसार व्यवस्था में बदलाव किया जाना चाहिए।
राजस्थान में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को निर्धारित पैकेज के अनुसार कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है। योजना में सरकारी और संबद्ध निजी अस्पतालों में विभिन्न उपचार पैकेज उपलब्ध हैं।
अब नए फोटो और जियो-टैगिंग प्रावधान लागू होने के बाद अस्पतालों में इसकी व्यावहारिक प्रक्रिया कैसी रहती है, यह महत्वपूर्ण होगा। खास तौर पर ICU जैसे मामलों में मरीज की देखभाल और डिजिटल सत्यापन के बीच संतुलन को लेकर IMA की आपत्तियों पर सरकार की ओर से आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर भी नजर रहेगी।

