राजस्थान के 25 लाख श्रमिकों को बड़ी राहत, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी
Rajasthan में Bhajanlal Sharma सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दरों में 22 से 45% तक बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस फैसले से प्रदेश के करीब 25 लाख श्रमिकों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
Bhajanlal Sharma ने राजस्थान के श्रमिकों को बड़ी राहत देते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। श्रम विभाग के प्रस्ताव के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में दैनिक मजदूरी में 22 से 45 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। नई दरों की घोषणा मई महीने के अंत तक किए जाने की संभावना है।
सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 25 लाख श्रमिकों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर औद्योगिक क्षेत्रों और ठेका श्रमिकों में इसे बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
भिवाड़ी आंदोलन के बाद तेज हुई थी मांग
दिल्ली-एनसीआर से सटे अलवर जिले के भिवाड़ी में हाल ही में श्रमिकों ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इसके बाद पूरे प्रदेश में मजदूरी दरों को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। श्रम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए मजदूरी दरों में संशोधन जरूरी हो गया था।
सूत्रों के मुताबिक, अब सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते (DA) की तर्ज पर न्यूनतम मजदूरी में भी हर साल लगभग 3 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। यह संशोधन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर होगा।
ठेका कर्मचारियों पर भी लागू होंगी नई दरें
श्रम विभाग ने साफ किया है कि सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसा करने पर कार्रवाई हो सकती है। नई मजदूरी दरें ठेकेदारों के जरिए नियुक्त कर्मचारियों पर भी लागू होंगी।
इसके अलावा पार्ट टाइम कर्मचारियों के लिए भी नियम तय किए गए हैं। यदि कोई श्रमिक चार घंटे से कम काम करता है तो उसे निर्धारित मजदूरी का 50 प्रतिशत भुगतान मिलेगा, जबकि चार घंटे से अधिक काम करने पर पूरी मजदूरी देनी होगी।
2023 में भी बढ़ी थी मजदूरी
इससे पहले अगस्त 2023 में Ashok Gehlot सरकार के दौरान न्यूनतम मजदूरी दरों में ₹26 प्रतिदिन तक की बढ़ोतरी की गई थी। उस समय अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 259 रुपये से बढ़ाकर 285 रुपये प्रतिदिन की गई थी। वहीं अर्द्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रमिकों की मजदूरी में भी वृद्धि हुई थी।
सरकारी खजाने पर बढ़ेगा भार
विशेषज्ञों का मानना है कि मजदूरी दरों में वृद्धि से राज्य सरकार पर करीब 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है। जलदाय विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग और अन्य सरकारी परियोजनाओं की ठेका लागत में भी इजाफा होगा।
Saloni Kushwaha 
