राजस्थान निकाय चुनाव 2026: दूसरा चरण कल, 87 लाख वोटर तय करेंगे 18 हजार प्रत्याशियों का भाग्य
Rajasthan Nikay Chunav 2026: पहले चरण में 162 निकायों में करीब 57.52 लाख मतदाताओं ने लगभग 20 हजार प्रत्याशियों का फैसला EVM में बंद किया। अब दूसरे और अंतिम चरण में जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर और पाली समेत 147 निकायों में करीब 87 लाख मतदाता वोट डालेंगे।
राजस्थान में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ फॉर्मूले के तहत हो रहे निकाय चुनाव अब निर्णायक दौर में पहुंच गए हैं। बुधवार को 162 शहरों में पहले चरण की वोटिंग के साथ करीब 57.52 लाख मतदाताओं ने लगभग 20 हजार प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद कर दिया। अब शुक्रवार को दूसरे और अंतिम चरण में जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर समेत बड़े शहरों के मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
दूसरे चरण में 6 नगर निगम समेत 147 निकायों में करीब 87 लाख मतदाता लगभग 18 हजार प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। बुधवार शाम प्रचार का शोर थम गया और अब प्रत्याशी घर-घर संपर्क में जुटे हैं। यानी अगले करीब 30 घंटे राजस्थान की शहरी सियासत में बेहद अहम रहने वाले हैं।
पहले चरण के बाद BJP-कांग्रेस में बढ़ा भरोसा
पहले चरण में करीब 76 फीसदी मतदान ने दोनों प्रमुख दलों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस इसे सरकार के खिलाफ संभावित एंटी-इनकंबेंसी से जोड़कर देख रही है, जबकि बीजेपी बढ़े मतदान प्रतिशत को अपने पक्ष में मानकर चल रही है। सरकार की ओर से भी चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकी गई और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कई इलाकों में रोड शो किए।
वहीं निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय और बहुकोणीय होने से नतीजों के बाद जोड़-तोड़ की राजनीति की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
6 नगर निगमों में शुक्रवार को होगा फैसला
पहले चरण में भीलवाड़ा, बीकानेर, भरतपुर और अलवर नगर निगमों के कुल 279 वार्डों में मतदान हुआ। इनमें 32 वार्डों में प्रत्याशी निर्विरोध चुने जा चुके हैं।
पहले चरण में 39 जिलों की 131 नगरपालिकाओं, 27 नगर परिषदों और 4 नगर निगमों के चुनाव पूरे हुए। अब दूसरे चरण में जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर और पाली नगर निगम समेत 147 निकायों में मतदान होगा।
## चुनाव के बाद फिर दिख सकती है ‘बाड़ेबंदी’ की सियासत
निकाय चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू मतदान के बाद शुरू होने वाली राजनीतिक रणनीति हो सकती है। 2020 में अशोक गहलोत सरकार के दौरान राजनीतिक संकट के बीच कांग्रेस विधायकों की बाड़ेबंदी चर्चा में रही थी। अब करीब छह साल बाद निकाय चुनाव के नतीजों के बाद एक बार फिर पार्षदों को एकजुट रखने और संभावित क्रॉस वोटिंग रोकने की कवायद देखने को मिल सकती है।
नगर निकायों में बोर्ड गठन के लिए जरूरी बहुमत और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका को देखते हुए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने संभावित विजेता पार्षदों पर नजर बनाए हुए हैं।
बढ़े मतदान ने मुकाबले को बनाया रोचक
राजस्थान में शहरी निकायों की संख्या पहले 89 थी, जो अब बढ़कर 162 हो गई है। पिछले निकाय चुनाव में करीब 74.03 फीसदी मतदान दर्ज हुआ था, जबकि इस बार पहले चरण में मतदान प्रतिशत करीब 76 फीसदी रहा।
मतदान प्रतिशत बढ़ने की एक वजह प्रति वार्ड बड़ी संख्या में प्रत्याशियों का मैदान में होना भी मानी जा रही है। अब दूसरे चरण में बड़े शहरों की बारी है और इसके साथ ही राजस्थान की शहरी सियासत का असली मुकाबला सामने आएगा।

