ताजमहल से कम नहीं खूबसूरत है दिलवाड़ा जैन मंदिर, संगमरमर की नक्काशी देखकर ठहर जाएंगी निगाहें

माउंट आबू का दिलवाड़ा जैन मंदिर अपनी बारीक संगमरमर की नक्काशी और सदियों पुराने इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। जानें मंदिर के पांच प्रमुख मंदिरों और उनकी खासियत के बारे में।

ताजमहल से कम नहीं खूबसूरत है दिलवाड़ा जैन मंदिर, संगमरमर की नक्काशी देखकर ठहर जाएंगी निगाहें

Dilwara Jain Temple: राजस्थान के माउंट आबू में स्थित दिलवाड़ा जैन मंदिर अपनी बारीक संगमरमर की नक्काशी, भव्य वास्तुकला और सदियों पुराने इतिहास के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। बाहर से साधारण नजर आने वाला यह मंदिर परिसर अंदर से बेहद खूबसूरत और कलात्मक दिखाई देता है।

राजस्थान का माउंट आबू अरावली पर्वतमाला के बीच बसा एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है। यहां प्राकृतिक खूबसूरती के साथ कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं। इन्हीं में से एक है दिलवाड़ा जैन मंदिर, जिसे भारतीय मंदिर वास्तुकला और संगमरमर की उत्कृष्ट कारीगरी के लिए खास पहचान मिली है।

संगमरमर की बारीक नक्काशी है सबसे बड़ी खासियत

दिलवाड़ा मंदिर की सबसे खास बात यहां की संगमरमर पर की गई बेहद महीन नक्काशी है। मंदिर के अंदर छतों, स्तंभों, मंडपों और दीवारों पर इतनी बारीकी से कलाकृतियां उकेरी गई हैं कि इन्हें देखकर प्राचीन शिल्पकारों की कला का अंदाजा लगाया जा सकता है।

मंदिर की बाहरी बनावट अपेक्षाकृत सादगीपूर्ण दिखाई देती है, लेकिन अंदर प्रवेश करने पर इसकी वास्तुकला और नक्काशी का भव्य रूप नजर आता है।

11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच हुआ निर्माण

दिलवाड़ा जैन मंदिरों का इतिहास मध्यकालीन भारत से जुड़ा हुआ है। मंदिर परिसर के प्रमुख निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच हुए। पहले मंदिर विमल वसाही का निर्माण 1031 ईस्वी के आसपास गुजरात के सोलंकी शासक भीमदेव प्रथम के मंत्री विमल शाह ने करवाया था।

बाद के समय में इस परिसर में अन्य मंदिरों का निर्माण भी हुआ, जिससे आज यहां पांच प्रमुख जैन मंदिरों का समूह दिखाई देता है।

दिलवाड़ा में हैं पांच प्रमुख मंदिर

दिलवाड़ा मंदिर परिसर में पांच प्रमुख मंदिर हैं। ये सभी श्वेतांबर जैन परंपरा से जुड़े हैं और अलग-अलग जैन तीर्थंकरों को समर्पित हैं।

1. विमल वसाही मंदिर

विमल वसाही दिलवाड़ा परिसर का सबसे प्राचीन प्रमुख मंदिर माना जाता है। यह प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव यानी आदिनाथ को समर्पित है।

मंदिर के रंग मंडप, स्तंभों और छत पर की गई संगमरमर की नक्काशी इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।

2. लूणा वसाही मंदिर

दूसरा प्रमुख मंदिर लूणा वसाही है। इसका निर्माण 13वीं शताब्दी में गुजरात के मंत्री वस्तुपाल और तेजपाल ने करवाया था। यह मंदिर 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ को समर्पित है।

मंदिर परिसर में संगमरमर से बने कई आकर्षक शिल्प देखने को मिलते हैं। यहां की नक्काशी और स्थापत्य कला पर्यटकों का ध्यान खींचती है।

3. पित्तलहर मंदिर

तीसरा मंदिर पित्तलहर के नाम से जाना जाता है। इसे पीतलहर या पट्टलहर भी कहा जाता है। यह मंदिर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) को समर्पित है।

मंदिर के नाम का संबंध यहां मौजूद पीतल की प्रतिमा और धातु के उपयोग से जोड़ा जाता है।

4. पार्श्वनाथ मंदिर

दिलवाड़ा का चौथा प्रमुख मंदिर पार्श्वनाथ मंदिर है। यह 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित है।

यह मंदिर अपने आकार और ऊंचाई के कारण परिसर के अन्य मंदिरों से अलग दिखाई देता है। इसकी वास्तुकला में कई बारीक शिल्प देखने को मिलते हैं।

5. महावीर स्वामी मंदिर

पांचवां मंदिर महावीर स्वामी मंदिर है। यह जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को समर्पित है।

आकार में यह मंदिर अन्य प्रमुख मंदिरों की तुलना में छोटा है, लेकिन इसकी दीवारों पर बनी नक्काशी और कलात्मक चित्रांकन इसे खास बनाते हैं।

माउंट आबू जाएं तो दिलवाड़ा मंदिर जरूर देखें

माउंट आबू घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए दिलवाड़ा जैन मंदिर ऐतिहासिक, धार्मिक और वास्तुकला की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। सदियों पुरानी इमारत में संगमरमर की महीन कारीगरी इस परिसर को राजस्थान के प्रमुख विरासत स्थलों में शामिल करती है।

यही वजह है कि माउंट आबू की यात्रा के दौरान पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ इस प्राचीन मंदिर की स्थापत्य कला को देखने भी पहुंचते हैं।