Bihar Cabinet Expansion 2026: सम्राट कैबिनेट में जातीय समीकरण का बड़ा दांव, NDA ने साधे हर वर्ग के वोट

Samrat Choudhary कैबिनेट विस्तार में NDA ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की। Nitish Kumar, LJP और HAM को भी मिला प्रतिनिधित्व।

Bihar Cabinet Expansion 2026: सम्राट कैबिनेट में जातीय समीकरण का बड़ा दांव, NDA ने साधे हर वर्ग के वोट
Samrat chaudhary

सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर जोर दिया। पार्टी ने भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य, यादव, मल्लाह और दलित समाज के नेताओं को कैबिनेट में जगह देकर व्यापक संदेश देने की कोशिश की है।

बीजेपी कोटे से विजय कुमार सिन्हा, नीतीश मिश्रा, दिलीप जायसवाल और रामकृपाल यादव जैसे नेताओं को शामिल कर पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक समूहों को साधने का प्रयास किया है।

पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग पर खास फोकस

मंत्रिमंडल में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग को मजबूत प्रतिनिधित्व दिया गया है। मल्लाह, कानू, चंद्रवंशी और पासवान समाज से आने वाले नेताओं को जगह देकर बीजेपी ने ग्रामीण और पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।

JDU ने निशांत कुमार को बनाकर दिया बड़ा संकेत

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का पहली बार मंत्री बनना सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। जेडीयू ने कुर्मी, दलित और अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं को शामिल कर अपने पारंपरिक सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश की।

पार्टी की ओर से श्रवण कुमार, अशोक चौधरी और जमा खान जैसे नेताओं को जिम्मेदारी देकर अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया।

चिराग पासवान और मांझी की पार्टी को भी प्रतिनिधित्व

चिराग पासवान की पार्टी LJP (रामविलास) ने दलित और सवर्ण चेहरों पर भरोसा जताया, जबकि जीतन राम मांझी की पार्टी HAM से संतोष कुमार सुमन को मंत्री बनाकर दलित राजनीति को मजबूत संदेश देने की कोशिश की गई।

चुनावी रणनीति की झलक

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया सामाजिक समीकरण भी है। NDA ने लगभग हर बड़े जातीय समूह को प्रतिनिधित्व देकर बिहार की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाने का संकेत दिया है।