5 बकरियों से शुरू किया कारोबार, आज 18 लाख रुपये से ज्यादा का टर्नओवर; जयपुर के संदीप ने बकरी के दूध से बनाया नया बिजनेस मॉडल
जयपुर के संदीप मीणा ने 5 बकरियों से बकरी के दूध का स्टार्टअप शुरू किया। आज 18 लाख रुपये से ज्यादा टर्नओवर और 25 किसानों के जुड़ने की है कहानी।
जयपुर के युवा किसान संदीप कुमार मीणा ने साबित कर दिया कि छोटी शुरुआत और नए विचार के दम पर भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है। महज 5 बकरियों से शुरू हुआ उनका सफर आज बकरी के दूध से घी, साबुन और दूसरे उत्पाद बनाने वाले स्टार्टअप तक पहुंच गया है। ऑनलाइन मार्केटिंग के जरिए उन्होंने अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाया और कारोबार का टर्नओवर 18 लाख रुपये से ज्यादा हो गया। उनकी इस पहल से अब 25 किसान भी जुड़ चुके हैं, जिन्हें अपने दूध का बेहतर बाजार मिल रहा है।
जयपुर के पास जोबनेर के डूंगरीकलां गांव के रहने वाले 25 वर्षीय संदीप खेती और बकरी पालन के साथ अपना स्टार्टअप चला रहे हैं। उनके पास करीब साढ़े तीन बीघा जमीन है, जहां उन्होंने बकरियों के लिए तारबंदी कर रखी है। उनके पास गुर्जर और सिरोही नस्ल की करीब 20 बकरियां हैं। एक बकरी से रोजाना लगभग एक से डेढ़ लीटर दूध मिलता है। उनकी मां कमला भी इस काम में सहयोग करती हैं, जबकि छोटा भाई बृजेश ग्रेजुएशन कर रहा है।
पिता के निधन के बाद बढ़ीं जिम्मेदारियां, नौकरी के साथ शुरू किया स्टार्टअप
संदीप के पिता जीवन राम मीणा पत्थर का काम करते थे और सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ित थे। कोरोना काल के दौरान वर्ष 2021 में उनका निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारियां संदीप पर आ गईं। ऐसे समय में उनके सामने नौकरी और परिवार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती थी।
संदीप ने वेटरनरी में दो साल का डिप्लोमा किया था। उन्हें उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी होने के बाद पशुधन सहायक की नौकरी मिल जाएगी। लेकिन परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने दिसंबर 2020 में एक निजी कंपनी में नौकरी शुरू कर दी। कोरोना के कारण शुरुआत में उन्हें घर से काम करने का अवसर मिला।
बाद में कंपनी ने उन्हें गुरुग्राम स्थित कार्यालय में जॉइन करने के लिए कहा। परिवार की जिम्मेदारियों के कारण उनके लिए बाहर जाकर काम करना आसान नहीं था। इसी दौरान उन्होंने अपने आसपास उपलब्ध संसाधनों और बकरी पालन की संभावनाओं को समझना शुरू किया।
कोरोना के दौरान आया बकरी के दूध से कारोबार करने का आइडिया
संदीप के स्टार्टअप की शुरुआत कोरोना काल में बकरी के दूध की मांग देखकर हुई। उस समय उनके पास करीब पांच बकरियां थीं। उन्होंने देखा कि आसपास के कई परिवार बकरी पालन करते हैं, लेकिन दूध को बेचने के लिए नियमित बाजार उपलब्ध नहीं था।
इसके बाद उन्होंने जयपुर के चित्रकूट स्टेडियम के पास लगने वाले ऑर्गेनिक मार्केट में दूध बेचने की शुरुआत की। यहां उन्होंने बकरी का दूध 250 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा। शुरुआती ग्राहकों से उन्हें बाजार की जरूरतों और लोगों की पसंद को समझने का मौका मिला।
हालांकि, बकरी के दूध की कीमत अधिक होने के कारण इसकी मांग सीमित थी। ऐसे में संदीप ने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए नया रास्ता तलाशा। उन्होंने समझा कि केवल दूध बेचने के बजाय इससे अलग-अलग उत्पाद तैयार किए जाएं, तो ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचा जा सकता है।
दूध से घी और साबुन तक, ऑनलाइन बाजार में बनाई पहचान
सीधे दूध की बिक्री में सीमित संभावनाएं देखने के बाद संदीप ने बकरी के दूध से पाउडर, घी और साबुन जैसे उत्पाद तैयार कर बेचने की दिशा में काम शुरू किया। शुरुआत में उनके पास प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं थी। इसलिए उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के आधार पर काम आगे बढ़ाया और बल्क में दूध इकट्ठा कर उससे पाउडर तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू की।
उन्होंने अपने कारोबार को ‘गोटवेदा’ नाम से रजिस्टर कराया और ऑनलाइन मार्केट के जरिए ग्राहकों तक पहुंच बनाने पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे उत्पादों की बिक्री बढ़ी और स्टार्टअप को पहचान मिलने लगी।
संदीप ने वर्ष 2022 में नौकरी के साथ अपने स्टार्टअप पर काम शुरू किया था। कारोबार को आगे बढ़ाने और उसकी संभावनाओं को समझने के बाद उन्होंने वर्ष 2025 में नौकरी छोड़ दी और अपना पूरा ध्यान उद्यम पर लगा दिया।
25 किसानों को जोड़ा, स्थानीय लोगों को भी मिल रहा फायदा
संदीप के स्टार्टअप की खास बात यह है कि अब उनके साथ 25 किसान जुड़े हुए हैं। वे इन किसानों से बाजार भाव से अधिक कीमत पर दूध खरीदने की कोशिश करते हैं। पहले मांग सीमित होने के कारण वे नियमित रूप से दूध नहीं खरीद पाते थे, लेकिन कारोबार बढ़ने के साथ अब खरीद को नियमित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
इससे स्थानीय बकरी पालकों को अपने दूध के लिए बाजार मिलने में मदद मिल रही है। संदीप ने घर पर दूध स्टोर करने के लिए बल्क मिल्क कूलर (बीएमसी) भी लगा रखा है।
पांच बकरियों से शुरू हुआ यह सफर अब एक ऐसे स्टार्टअप में बदल रहा है, जिसमें पशुपालन, उत्पाद निर्माण और ऑनलाइन बिक्री को एक साथ जोड़ा गया है। संदीप की कहानी बताती है कि ग्रामीण संसाधनों को समझकर, बाजार की जरूरत के मुताबिक उत्पाद तैयार करके और स्थानीय किसानों को साथ लेकर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

