'गमन' से शुरू हुआ था नाना पाटेकर का फिल्मी सफर, जानें कैसी थी उनकी पहली फिल्म
नाना पाटेकर ने साल 1978 में फिल्म 'गमन' से बॉलीवुड में कदम रखा था। जानिए कैसी थी उनकी पहली फिल्म और कैसे शुरू हुआ उनका शानदार फिल्मी सफर।
Nana Patekar First Film: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। 75 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले नाना पाटेकर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि बड़े पर्दे पर उनका सफर किस फिल्म से शुरू हुआ था।
1978 में 'गमन' से हुआ था फिल्मी डेब्यू
नाना पाटेकर ने साल 1978 में आई फिल्म 'गमन' से अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। यह फिल्म मुजफ्फर अली के निर्देशन में बनी थी। फिल्म की कहानी मुंबई में रोजी-रोटी की तलाश में आने वाले प्रवासी मजदूरों और उनके संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है।
'गमन' में नाना पाटेकर की भूमिका भले ही उनके बाद के चर्चित किरदारों जितनी बड़ी पहचान वाली नहीं थी, लेकिन यही फिल्म उनके लंबे और शानदार फिल्मी सफर की शुरुआत बनी।
पहली फिल्म के बाद लगातार मजबूत होते गए किरदार
'गमन' के बाद नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। उन्होंने अपने अभिनय में संवाद अदायगी के साथ-साथ चेहरे के भाव और आवाज को खास अंदाज में इस्तेमाल किया।
इसके बाद 'परिंदा', 'प्रहार', 'क्रांतिवीर', 'अग्निसाक्षी', 'तिरंगा', 'अब तक छप्पन', 'अपहरण', 'वेलकम' और 'नटसम्राट' जैसी फिल्मों ने उन्हें दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई।
'परिंदा' ने बदल दी करियर की दिशा
साल 1989 में आई 'परिंदा' नाना पाटेकर के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
इसके बाद 'क्रांतिवीर' जैसी फिल्मों में उनके दमदार अभिनय ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं की कतार में खड़ा कर दिया।
एक्टिंग के साथ निर्देशन में भी आजमाया हाथ
नाना पाटेकर ने केवल अभिनेता के तौर पर ही पहचान नहीं बनाई। उन्होंने निर्देशन में भी कदम रखा। 'प्रहार: द फाइनल अटैक' के जरिए उन्होंने निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली।
करीब पांच दशक के करियर में उन्होंने गंभीर फिल्मों से लेकर कॉमेडी और एक्शन तक अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। उनकी दमदार आवाज और संवाद बोलने का अंदाज उनकी खास पहचान बन गया।

