UNGA 2026: मोदी, पुतिन, जिनपिंग समेत 50 से ज्यादा नेता क्यों नहीं पहुंचे UN महासभा? जानें वजह
UNGA 2026 में मोदी, पुतिन, शी जिनपिंग और मेलोनी समेत 50 से ज्यादा शीर्ष नेता न्यूयॉर्क नहीं पहुंचे। जानें अलग-अलग नेताओं की गैरमौजूदगी की वजह।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में दुनिया के करीब 130 राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख व्यक्तिगत रूप से हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन कई बड़े देशों के शीर्ष नेता न्यूयॉर्क नहीं पहुंचे। इनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी समेत कई नेता शामिल हैं। उनकी गैरमौजूदगी की वजहें अलग-अलग हैं।
न्यूयॉर्क में चल रहा UNGA का 81वां सत्र
संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र 8 सितंबर 2026 को शुरू हुआ। इसका हाई-लेवल वीक 22 से 28 सितंबर तक न्यूयॉर्क स्थित UN मुख्यालय में आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान राष्ट्राध्यक्ष, सरकार प्रमुख और अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि वैश्विक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इस साल की थीम है- “Restoring Trust, Managing Transformation: A United Nations That Delivers for All.”
हालांकि, इस बार कई देशों ने अपने राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों की जगह विदेश मंत्रियों अथवा अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों को भेजा है। DW की रिपोर्ट के मुताबिक 50 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं।
भारत: पीएम मोदी की जगह विदेश मंत्री एस जयशंकर
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल UN महासभा के हाई-लेवल वीक में शामिल नहीं हो रहे हैं। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
मोदी ने आखिरी बार 2021 में UN महासभा को संबोधित किया था। इसके बाद भारत की ओर से विदेश मंत्री को इस मंच पर भेजा जाता रहा है। इस साल शुरुआती कार्यक्रम में मोदी का नाम वक्ताओं की सूची में था, लेकिन बाद में उनकी यात्रा योजना बदल गई। उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी गैरमौजूदगी का कोई स्पष्ट आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।
चीन: शी जिनपिंग न्यूयॉर्क नहीं पहुंचे
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी UNGA 2026 में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए। Reuters के मुताबिक शी इसी अवधि में अमेरिका में थे और वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की, लेकिन न्यूयॉर्क स्थित UN मुख्यालय नहीं गए। चीन की ओर से प्रतिनिधित्व दूसरे वरिष्ठ नेता ने किया।
रूस: पुतिन की जगह सर्गेई लावरोव
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस बार न्यूयॉर्क नहीं पहुंचे। रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव UN महासभा में बोल रहे हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक पुतिन ने एक आदेश के जरिए लावरोव को रूस का प्रतिनिधि बनाया है। उनकी गैरमौजूदगी की कोई विस्तृत वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।
जर्मनी: घरेलू राजनीतिक व्यस्तताओं के बीच मैर्त्स नहीं आए
जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स भी UNGA में शामिल नहीं हो रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक सितंबर में जर्मनी के कई राज्यों में हुए चुनावों के बाद घरेलू राजनीति में उनकी व्यस्तता बढ़ी है।
उनकी जगह विदेश मंत्री योहान वाडेफुल UN महासभा में जर्मनी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इटली: मेलोनी ने घरेलू मामलों को बताया प्राथमिकता
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी भी इस बार न्यूयॉर्क नहीं पहुंचीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने घरेलू मामलों पर ध्यान देने की बात कही है।
मेलोनी की जगह विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी इटली का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
दक्षिण अफ्रीका: स्वास्थ्य कारणों से रामाफोसा अनुपस्थित
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने स्वास्थ्य कारणों के चलते UN महासभा में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। उनके कार्यालय ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
उनकी जगह विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
मिस्र: अल-सिसी की जगह प्रधानमंत्री पहुंचे
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी भी इस बार UNGA में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए। उनकी जगह प्रधानमंत्री मुस्तफा मदबूली महासभा में हिस्सा ले रहे हैं।
राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से उनकी गैरमौजूदगी की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई गई है।
नाइजीरिया: टिनुबू की जगह उपराष्ट्रपति प्रतिनिधित्व करेंगे
नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टिनुबू भी इस बार UN महासभा में शामिल नहीं हुए। रिपोर्टों के मुताबिक देश का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति काशिम शेटिमा कर रहे हैं। टिनुबू के बारे में बताया गया है कि वह इस समय छुट्टी पर हैं।
आखिर इतने बड़े नेता क्यों नहीं पहुंचे?
इस बार नेताओं की गैरमौजूदगी के पीछे कोई एक वजह नहीं है। अलग-अलग देशों के मामलों में घरेलू राजनीतिक व्यस्तता, स्वास्थ्य, पहले से तय कार्यक्रम और विदेश नीति से जुड़े दूसरे दौरे जैसे कारण सामने आए हैं।
साथ ही, कई देशों के लिए UN महासभा में राष्ट्राध्यक्ष की व्यक्तिगत मौजूदगी अनिवार्य नहीं होती। वे विदेश मंत्री, उपराष्ट्रपति या अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि के जरिए अपनी सरकार का पक्ष रखते हैं। इस साल भी यही व्यवस्था कई देशों में देखने को मिली है।

