SRCC में PM मोदी के भाषण पर खरगे का पलटवार, बोले- अपनी कमियां छिपाने के लिए विपक्ष पर सवाल उठाती है सरकार
PM Modi SRCC Speech: SRCC के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी के संबोधन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बेरोजगारी, लंबित भर्तियों, पेपर लीक, महंगी शिक्षा और छात्रवृत्ति जैसे मुद्दों पर जवाब मांगा।
PM Modi SRCC Speech: दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी SRCC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तीखा पलटवार किया है। खरगे ने कहा कि युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़े मंच पर सरकार को बेरोजगारी, पेपर लीक, लंबित भर्तियों और महंगी शिक्षा जैसे मुद्दों पर जवाब देना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कमियों से ध्यान हटाने के लिए विपक्ष पर सवाल उठाती है और उसे अलग-अलग नामों से निशाना बनाती है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री के भाषण को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की नीतियों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखा।
खरगे का कहना है कि SRCC जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में युवाओं की समस्याओं और उनके भविष्य पर विस्तार से बात होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश का युवा रोजगार, भर्ती और शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब सरकार इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब क्यों नहीं दे रही।
‘विपक्ष को नए-नए नाम देना सरकार की रणनीति’
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कथित नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए विपक्ष को अलग-अलग विशेषणों से संबोधित करती है। खरगे ने अपनी पोस्ट में कई ऐसे शब्दों का जिक्र किया, जिनका इस्तेमाल राजनीतिक बहस के दौरान विपक्षी नेताओं और विचारों को निशाना बनाने के लिए किया जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ विपक्ष को लेकर इस्तेमाल होने वाले शब्द बदलते रहे, लेकिन कांग्रेस के अनुसार सरकार की नीतियों में आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित बदलाव नहीं आया।
खरगे ने इसी आधार पर प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि अपनी कमियों को छिपाने के लिए विपक्ष पर सवाल उठाए जाते हैं।
‘आउट ऑफ रीच होने पर करनी पड़ती है आउटरीच’
प्रधानमंत्री की युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश पर भी खरगे ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब कोई नेतृत्व लोगों की पहुंच और उनकी समस्याओं से दूर हो जाता है, तब उसे दोबारा लोगों तक पहुंचने के लिए ‘आउटरीच’ की जरूरत पड़ती है।
खरगे ने कार्यक्रम में दिखाए गए रिपोर्ट कार्ड का भी जिक्र किया और कहा कि देश का युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक युवाओं के सामने रोजगार की कमी, सरकारी भर्तियों में देरी और परीक्षा से जुड़े विवाद जैसे कई अहम सवाल मौजूद हैं।
बेरोजगारी और पेपर लीक को बनाया बड़ा मुद्दा
खरगे ने अपने बयान में युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, लंबित सरकारी भर्तियां और परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं की बड़ी चिंता हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि सरकार को इन मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनका कहना है कि लाखों युवा रोजगार और सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय इन चुनौतियों के समाधान पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
महंगी शिक्षा और छात्रवृत्ति पर भी सरकार को घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष ने शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की आर्थिक चुनौतियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है और छात्रवृत्ति के अवसरों को लेकर भी छात्रों के सामने कई सवाल हैं।
खरगे ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने युवाओं और छात्रों से जुड़े इन मुद्दों को सोशल मीडिया पर **#ChhatronKiGoonj** के जरिए उठाते हुए कहा कि सरकार को इन सवालों पर ध्यान देना चाहिए।
SRCC के मंच के बाद तेज हुई सियासत
SRCC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के बाद कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस लेकर आई है। एक तरफ प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष को निशाने पर लिया, तो दूसरी तरफ खरगे ने सरकार से युवाओं, रोजगार, भर्ती और शिक्षा से जुड़े सवालों पर जवाब मांगा।
खरगे के ताजा बयान से साफ है कि कांग्रेस आने वाले दिनों में युवाओं से जुड़े मुद्दों—खासकर **बेरोजगारी, सरकारी भर्तियां, पेपर लीक और शिक्षा की बढ़ती लागत**—को लेकर सरकार पर अपना राजनीतिक दबाव बनाए रखने की कोशिश करेगी।
अब SRCC के मंच से शुरू हुई यह बहस सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में युवा और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकती है।

