भरतपुर-डीग की हार पर कांग्रेस में विस्फोट, विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा और जिलाध्यक्षों पर साधा निशाना
भरतपुर-डीग में निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर संगठन और टिकट वितरण को लेकर सवाल उठे हैं। विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा और जिला नेतृत्व पर नाराजगी जताई।
राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव खत्म हो चुके हैं, लेकिन भरतपुर और डीग में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के भीतर शुरू हुई खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ-साथ भरतपुर और डीग के जिला नेतृत्व पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं।
विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी की हार को सिर्फ चुनावी नतीजा नहीं माना, बल्कि इसके पीछे टिकट वितरण, स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी और संगठनात्मक फैसलों को जिम्मेदार बताया है। उनके तीखे बयान के बाद राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी मतभेदों की चर्चा और तेज हो गई है।
भरतपुर-डीग में कांग्रेस के प्रदर्शन पर उठे सवाल
हालिया निकाय चुनावों में भरतपुर नगर निगम की तस्वीर बेहद दिलचस्प रही। 65 सदस्यीय निगम में निर्दलीय उम्मीदवार सबसे बड़े समूह के रूप में उभरे, जबकि कांग्रेस अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। बाद में भाजपा ने भरतपुर मेयर का पद निर्विरोध हासिल कर लिया।
इसी नतीजे के बाद विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश नेतृत्व और स्थानीय जिलाध्यक्षों की रणनीति पर सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि जमीन पर काम करने वाले पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जगह पसंदीदा चेहरों को टिकट दिए गए, जिसका नुकसान पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ा।
डोटासरा पर सीधा हमला
विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के रवैये पर बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश नेतृत्व स्थानीय स्तर की शिकायतों और संगठन की वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज करता रहा।
उन्होंने भरतपुर और डीग के जिला कांग्रेस नेतृत्व को भी हार के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि संगठन ने समय रहते कार्यकर्ताओं की नाराजगी को नहीं समझा।
उनकी भाषा काफी आक्रामक रही, इसलिए इसे पार्टी के भीतर सामान्य असहमति से ज्यादा गंभीर अंदरूनी टकराव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
टिकट वितरण बना सबसे बड़ा विवाद
विश्वेंद्र सिंह की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण टिकटों का वितरण बताया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में उन कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता नहीं मिली जो लंबे समय से कांग्रेस के लिए जमीन पर काम कर रहे थे। उनकी जगह कुछ ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिए गए जिन्हें स्थानीय संगठन का पसंदीदा माना जाता था।
विश्वेंद्र सिंह का कहना है कि इसी फैसले ने पार्टी के भीतर असंतोष पैदा किया और चुनावी प्रदर्शन पर असर डाला।
भरतपुर आने को लेकर भी डोटासरा को चुनौती
विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा को भरतपुर आने की चुनौती भी दी है और पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए तीखा संदेश दिया।
यह टिप्पणी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि भरतपुर कांग्रेस की राजनीति लंबे समय से स्थानीय नेतृत्व, गुटबाजी और शक्ति संतुलन से प्रभावित रही है।
उनके इस बयान के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या भरतपुर-डीग में कांग्रेस का विवाद केवल चुनावी हार तक सीमित रहेगा या आने वाले पंचायत चुनावों में भी इसका असर दिखाई देगा।
“पार्टी छोड़ने का सवाल नहीं”
तीखे हमले के बावजूद विश्वेंद्र सिंह ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी नाराजगी को पार्टी छोड़ने या भाजपा में जाने से जोड़कर न देखा जाए।
उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में ही रहेंगे और पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी बात उठाते रहेंगे।
इस बयान से साफ है कि फिलहाल उनका संघर्ष पार्टी के बाहर जाने का नहीं, बल्कि संगठन के भीतर नेतृत्व और फैसलों को लेकर है।

