रेगिस्तान में गूंजी तोपों की गड़गड़ाहट, आसमान से Apache का अटैक! भारत-अमेरिका की सेनाओं ने दिखाया युद्ध का नया तालमेल

बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिका की सेनाएं ‘युद्ध अभ्यास-2026’ के तहत संयुक्त सैन्य ड्रिल कर रही हैं। अभ्यास में Apache हेलिकॉप्टर, धनुष तोप, Pinaka रॉकेट सिस्टम, M777 और Counter-Drone Operations के जरिए दोनों सेनाओं के बीच तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी परखने पर जोर है।

रेगिस्तान में गूंजी तोपों की गड़गड़ाहट, आसमान से Apache का अटैक! भारत-अमेरिका की सेनाओं ने दिखाया युद्ध का नया तालमेल

बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज इन दिनों भारतीय और अमेरिकी सैनिकों के संयुक्त सैन्य अभ्यास की गवाह बन रही है। ‘युद्ध अभ्यास-2026’ के तहत दोनों देशों की सेनाएं रेगिस्तानी परिस्थितियों में अपनी युद्धक क्षमताओं और आपसी तालमेल को परख रही हैं। इस अभ्यास में जमीन से आर्टिलरी फायरिंग से लेकर आसमान से अटैक हेलिकॉप्टर की कार्रवाई और ड्रोन खतरों से निपटने की तकनीक तक कई ऑपरेशनल ड्रिल शामिल की गई हैं।

इस संयुक्त अभ्यास की सबसे खास तस्वीरें AH-64E Apache अटैक हेलिकॉप्टर से जुड़ी सामने आई हैं। अभ्यास के दौरान अपाचे हेलिकॉप्टर ने हवा से जमीन पर बनाए गए काल्पनिक टारगेट्स को निशाना बनाया। हेलिकॉप्टर की तेज कार्रवाई के साथ ग्राउंड फोर्सेज की फायरिंग क्षमताओं का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे एक मल्टी-डोमेन ऑपरेशन जैसा अभ्यास तैयार हुआ।

महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना की स्वदेशी धनुष 155 MM तोप और Pinaka Multi Barrel Rocket Launcher ने भी फायरिंग ड्रिल में हिस्सा लिया। इसके अलावा अमेरिकी और भारतीय सैनिकों ने M777 Ultra-Light Howitzer समेत अलग-अलग हथियार प्रणालियों के साथ निर्धारित लक्ष्यों पर कार्रवाई का अभ्यास किया। यहां फोकस केवल हथियार चलाने पर नहीं, बल्कि अलग-अलग सैन्य संसाधनों को एक ही ऑपरेशन में जोड़ने पर रहा।

अभ्यास के दौरान टारगेट की पहचान, उसकी जानकारी संबंधित यूनिट तक पहुंचाना, फायर कमांड देना और फिर आर्टिलरी या रॉकेट सिस्टम से कार्रवाई करना जैसी प्रक्रियाओं को एक साथ परखा जा रहा है। यानी युद्ध की स्थिति में अलग-अलग यूनिट किस तरह एक-दूसरे के साथ तेजी से सूचना साझा कर कार्रवाई करें, इस पर भी खास जोर है।

M777 की ‘Shoot and Scoot’ क्षमता पर जोर

युद्ध अभ्यास में M777 Ultra-Light Howitzer भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस तोप की हल्की संरचना इसे तेजी से तैनात करने और जरूरत पड़ने पर फायरिंग पोजीशन बदलने में मदद करती है। अभ्यास में इसी तरह की तेजी को परखा जा रहा है। सैन्य रणनीति में फायर करने के बाद जल्द से जल्द अपनी स्थिति बदलने की प्रक्रिया को ‘Shoot and Scoot’ कहा जाता है।

रेगिस्तानी क्षेत्र में इस तरह की क्षमता खास महत्व रखती है, क्योंकि बदलती परिस्थितियों में किसी एक फायरिंग पोजीशन पर लंबे समय तक निर्भर रहना जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए फायरिंग, पोजीशन बदलने और दोबारा कार्रवाई के बीच तालमेल को अभ्यास का अहम हिस्सा बनाया गया है।

स्वदेशी धनुष और पिनाका ने बढ़ाई फायर पावर

भारत की स्वदेशी धनुष 155 MM तोप और पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर भी इस युद्धाभ्यास में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। पिनाका के जरिए निर्धारित क्षेत्र में बड़ी मात्रा में रॉकेट फायर करने की क्षमता का अभ्यास किया जा रहा है, जबकि धनुष तोप से आर्टिलरी फायरिंग की ड्रिल की जा रही है।

इन प्रणालियों को संयुक्त ऑपरेशन के हिस्से के तौर पर इस्तेमाल करने से सैनिकों को यह समझने का मौका मिलता है कि अलग-अलग रेंज और क्षमताओं वाले हथियारों को एक ऑपरेशनल प्लान में किस तरह शामिल किया जाए।

आसमान में Apache, जमीन पर आर्टिलरी और रॉकेट सिस्टम

‘युद्ध अभ्यास-2026’ की एक खास बात इसका Integrated Operational Drill होना है। इसमें एयर और ग्राउंड कॉम्बैट क्षमताओं के बीच तालमेल पर ध्यान दिया जा रहा है। काल्पनिक दुश्मन के ठिकानों की पहचान से लेकर उन पर हवाई और जमीनी फायर पावर के इस्तेमाल तक की पूरी प्रक्रिया को अभ्यास में शामिल किया गया है।

AH-64E Apache हेलिकॉप्टरों की कार्रवाई के साथ ग्राउंड फोर्सेज की गतिविधियां इस संयुक्त ऑपरेशन को और महत्वपूर्ण बनाती हैं। इसका उद्देश्य सैनिकों को ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार करना है, जहां अलग-अलग सैन्य प्लेटफॉर्म को एक ही मिशन के दौरान समन्वय के साथ काम करना पड़े।

ड्रोन खतरे से निपटने की भी तैयारी

आधुनिक युद्ध में छोटे ड्रोन तेजी से एक चुनौती बन रहे हैं। इसी को देखते हुए भारत-अमेरिका संयुक्त अभ्यास में Counter-Drone Operations को भी शामिल किया गया है। अमेरिकी सेना का M-LIDS यानी Mobile Low, Slow, Small Unmanned Aircraft Integrated Defeat System भी इस अभ्यास का हिस्सा है।

इसके साथ L/70 Air Defence Gun जैसी प्रणालियों के जरिए छोटे और धीमी गति से उड़ने वाले हवाई खतरों से निपटने की प्रक्रियाओं का अभ्यास किया जा रहा है। इसमें ड्रोन की पहचान, खतरे का आकलन और उसके खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई जैसी प्रक्रियाओं को परखा जा रहा है।

## रेगिस्तान बना दोनों सेनाओं के लिए साझा युद्धक्षेत्र

महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहा यह अभ्यास केवल फायरिंग का प्रदर्शन नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, कम्युनिकेशन और संयुक्त ऑपरेशन की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने से जुड़ा है।

एक तरफ भारतीय सेना की धनुष और पिनाका जैसी प्रणालियां हैं, तो दूसरी ओर अमेरिकी सेना की तकनीक और काउंटर-ड्रोन क्षमताएं। इनके साथ Apache और M777 जैसी प्रणालियों को एक संयुक्त ड्रिल में शामिल कर दोनों सेनाएं रेगिस्तानी इलाके में युद्ध संचालन की जटिल परिस्थितियों का अभ्यास कर रही हैं।

अभ्यास से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में आसमान से Apache की कार्रवाई, जमीन से आर्टिलरी फायरिंग और रॉकेट सिस्टम के इस्तेमाल के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। कुल मिलाकर महाजन की रेत पर चल रहा ‘युद्ध अभ्यास-2026’ आधुनिक युद्ध में Air Power, Artillery, Rocket Systems, Air Defence और Counter-Drone Technology के बीच तालमेल को परखने का एक बड़ा सैन्य अभ्यास बनकर सामने आया है।