सिगरेट के बाद Nicotine Pouch बना Big Tobacco का नया दांव, भारत में सरकार का शिकंजा; ऑनलाइन से दुकानों तक होगी कार्रवाई

भारत में Oral Nicotine Pouches की बिक्री और उपलब्धता पर सरकार ने राज्यों को निगरानी और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जानें Nicotine Pouch के कारोबार पर क्या असर होगा।

सिगरेट के बाद Nicotine Pouch बना Big Tobacco का नया दांव, भारत में सरकार का शिकंजा; ऑनलाइन से दुकानों तक होगी कार्रवाई

सिगरेट के विकल्प के तौर पर तेजी से उभर रहे तंबाकू-मुक्त निकोटीन पाउच के कारोबार को भारत में बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसे बिना मंजूरी वाले निकोटीन पाउच की बिक्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है। इसका असर सिर्फ पान और तंबाकू की दुकानों तक सीमित नहीं रहने वाला है। ऑनलाइन मार्केटप्लेस, सोशल मीडिया के जरिए होने वाली बिक्री, आयातकों और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर भी निगरानी बढ़ सकती है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की 19 सितंबर की चिट्ठी में राज्यों से निकोटीन पाउच की बढ़ती ऑनलाइन और ऑफलाइन उपलब्धता पर कार्रवाई करने को कहा गया है। निर्देश में संबंधित कानूनों के तहत तलाशी, उत्पाद जब्त करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी सामने आया है। सरकार का कहना है कि भारत में इस तरह के निकोटीन पाउच को बिक्री की मंजूरी नहीं मिली है।

क्यों बड़ा है कारोबार के लिए यह फैसला?

निकोटीन पाउच दुनिया की बड़ी तंबाकू कंपनियों के लिए तेजी से बढ़ती हुई प्रोडक्ट कैटेगरी बन चुके हैं। पारंपरिक सिगरेट की खपत पर लगातार बढ़ते नियमन के बीच कंपनियां ऐसे उत्पादों पर दांव लगा रही हैं जिनमें तंबाकू की पत्ती नहीं होती, लेकिन निकोटीन मौजूद रहता है।

ये छोटे पाउच होंठ और मसूड़े के बीच रखे जाते हैं और शरीर में निकोटीन पहुंचाते हैं। इन्हें जलाने या धुएं की जरूरत नहीं होती। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कंपनियां इन्हें सिगरेट से अलग nicotine category के रूप में आगे बढ़ा रही हैं। तेज बिक्री वृद्धि और बेहतर मार्जिन के कारण यह सेगमेंट Big Tobacco के लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

भारत में हालांकि इस कारोबार का रास्ता आसान नहीं है। सरकार के मुताबिक बिना मंजूरी वाले nicotine pouches कानूनी रूप से बिक्री के लिए अधिकृत नहीं हैं। यानी पैकेट पर **‘Tobacco Free’** लिखे होने का मतलब यह नहीं है कि उसे भारतीय बाजार में बिना regulatory approval के बेचा जा सकता है।

Zyn और White Fox जैसे विदेशी ब्रांड भी चर्चा में

सरकारी अध्ययन और हाल की नियामकीय चर्चाओं में 18 से 40 वर्ष के लोगों के बीच nicotine pouches के इस्तेमाल का जिक्र सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित **Zyn** और **White Fox** जैसे ब्रांड भारत में भी ऑनलाइन और दूसरे चैनलों के जरिए उपलब्ध होने की बात रिपोर्टों में सामने आई है।

Zyn, Philip Morris International से जुड़ा प्रमुख nicotine pouch brand है। वैश्विक स्तर पर nicotine pouches की बढ़ती मांग ने बड़ी तंबाकू कंपनियों के लिए सिगरेट से अलग एक नया revenue segment तैयार किया है। ऐसे में भारत जैसे बड़े consumer market में regulatory crackdown कंपनियों और आयातकों की विस्तार रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

E-commerce और रिटेल नेटवर्क पर बढ़ेगा जोखिम

सरकारी कार्रवाई का सबसे सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ सकता है जो imported nicotine pouches को ऑनलाइन वेबसाइट, सोशल मीडिया, स्थानीय तंबाकू दुकानों या दूसरे retail channels के जरिए बेच रहे हैं।

सरकार का कहना है कि ऐसे उत्पाद अक्सर अनधिकृत चैनलों के जरिए देश में पहुंचते और बेचे जाते हैं। राज्यों को enforcement बढ़ाने के निर्देश के बाद sellers के लिए stock seizure, जांच और कानूनी कार्रवाई का जोखिम बढ़ गया है।

इसका मतलब है कि nicotine pouch business अब सिर्फ consumer-health का मुद्दा नहीं रह गया है। यह **import compliance, retail licensing, e-commerce monitoring और product approval** से जुड़ा महत्वपूर्ण कारोबारी मामला भी बन रहा है।

नई nicotine formulations को भी मिल सकती है मुश्किल

निकोटीन पाउच इंडस्ट्री को एक और regulatory झटका Drugs Technical Advisory Board यानी DTAB की ओर से मिला है। बोर्ड ने सार्वजनिक हित का हवाला देते हुए भविष्य में नई nicotine formulations को मंजूरी नहीं देने की सिफारिश की है।

यह सिफारिश उस समय आई है जब 2 mg, 4 mg और 6 mg strength वाले nicotine pouch formulations के manufacture, import और marketing से संबंधित applications नियामकीय स्तर पर चर्चा में थीं।

अगर इस रुख को आगे भी बरकरार रखा जाता है तो विदेशी और घरेलू कंपनियों के लिए भारत में नई nicotine pouch category विकसित करना और मुश्किल हो सकता है।

मुंबई एयरपोर्ट विवाद ने भी बढ़ाया regulatory pressure

निकोटीन पाउच का मामला इससे पहले मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की duty-free retail बिक्री को लेकर भी चर्चा में आ चुका है। सरकारी एजेंसियों ने वहां बिना जरूरी मंजूरी के nicotine pouches की बिक्री पर आपत्ति जताई थी।

सितंबर में बॉम्बे हाई कोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की कि duty-free दुकानें घरेलू public-health और regulatory laws से पूरी तरह बाहर हैं। हालांकि अदालत ने tobacco-free nicotine pouches को कानूनी रूप से ‘drug’ माना जाए या नहीं, इस व्यापक सवाल पर अंतिम फैसला नहीं दिया।

यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि duty-free और imported retail segment को भी nicotine pouch कारोबार में सामान्य regulatory checks से छूट नहीं मिल सकती।

Nicotine gum और pouch में क्या अंतर?

भारत में nicotine gum और patches जैसे कुछ nicotine replacement products नियामकीय मंजूरी के तहत धूम्रपान छोड़ने में मदद के लिए बेचे जाते हैं। लेकिन nicotine pouch को उसी आधार पर वैध मान लेना सही नहीं है।

सरकारी drug panel का कहना है कि nicotine pouches addictive हैं, इनके अपने स्वास्थ्य जोखिम हैं और इन्हें smoking cessation के प्रभावी साधन के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।

यानी कंपनियों के लिए आने वाला संदेश साफ है—भारत में ‘smoke-free’ या ‘tobacco-free’ branding अपने आप regulatory clearance नहीं देती।

निकोटीन पाउच का वैश्विक बाजार भले तेजी से बढ़ रहा हो, लेकिन भारत में सरकार का मौजूदा रुख इस category के commercial expansion के लिए बड़ी बाधा बन सकता है। ऑनलाइन sellers से लेकर importers और global tobacco companies तक, अब कारोबार की अगली चाल health regulation और product approval की कसौटी से होकर गुजरेगी।