भरतपुर के कारोबारी की यूक्रेन वाली फैक्ट्री पर रूसी हमला, 400 करोड़ की चपत! 2009 में खड़ा किया था दवा कारोबार
यूक्रेन के सूमी में भरतपुर निवासी कारोबारी राजीव गुप्ता की दवा फैक्ट्री पर रूसी ड्रोन हमला हुआ। फैक्ट्री को भारी नुकसान और करीब 400 करोड़ रुपये के नुकसान का शुरुआती अनुमान है।
हजारों किलोमीटर दूर यूक्रेन में छिड़ी जंग का असर राजस्थान के एक कारोबारी के उद्योग तक पहुंच गया। यूक्रेन के सूमी शहर में भरतपुर निवासी राजीव गुप्ता की दवा बनाने वाली फैक्ट्री को रूसी ड्रोन हमले में भारी नुकसान पहुंचा है। 4 अक्टूबर को हुए इस हमले में एक इंजीनियर की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की खबर है। फैक्ट्री की मुख्य इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है और शुरुआती आकलन में कंपनी को करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई है।
इस हमले के दौरान राजीव गुप्ता फैक्ट्री में मौजूद नहीं थे। वह यूक्रेन की राजधानी कीव में थे और सुरक्षित बताए गए हैं। उनके चचेरे भाई राजकुमार गुप्ता के अनुसार, हमले के बाद फैक्ट्री परिसर से धुएं का बड़ा गुबार उठा और उत्पादन व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा।
भारत से शुरू हुआ कारोबार, यूक्रेन तक पहुंचा सफर
राजीव गुप्ता ने वर्ष 2009 में यूक्रेन के सूमी शहर में दवा निर्माण की फैक्ट्री स्थापित की थी। इससे पहले उनका कारोबार भारत से दवाएं मंगाने और उन्हें वितरित करने से जुड़ा था। धीरे-धीरे उन्होंने विदेश में उत्पादन शुरू किया और अपने कारोबार का विस्तार किया।
कुसुम हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के तहत कंपनी जेनेरिक दवाओं का निर्माण करती है। कंपनी के उत्पादों में टैबलेट, कैप्सूल और लिक्विड दवाएं शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी 50 से अधिक ब्रांड की दवाएं बनाती है और नौ से अधिक देशों में कारोबार करती है।
यूक्रेन के अलावा उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और फिलीपींस सहित कई बाजारों में भी कंपनी के उत्पादों की बिक्री होती है। ऐसे में सूमी की फैक्ट्री को हुआ नुकसान कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

एक हमले ने ठप किया फैक्ट्री का मुख्य काम
रविवार सुबह हुए ड्रोन हमले में फैक्ट्री की मुख्य इमारत को भारी क्षति पहुंची। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, नुकसान करीब 400 करोड़ रुपये तक हो सकता है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन विस्तृत जांच और क्षतिग्रस्त ढांचे व उपकरणों की समीक्षा के बाद ही हो पाएगा।
हमले के बाद फैक्ट्री परिसर से उठते धुएं की तस्वीरें भी सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, घटना के समय फैक्ट्री में कर्मचारियों की संख्या कम थी। इसके बावजूद हमले में एक इंजीनियर की जान चली गई और कई लोग घायल हुए।
सूमी शहर रूस की सीमा से लगभग 23 किलोमीटर दूर स्थित है। रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध के दौरान यह क्षेत्र भी सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करता रहा है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी हैं उत्पादन इकाइयां
कुसुम हेल्थकेयर की औद्योगिक मौजूदगी भारत में भी है। कंपनी की उत्पादन इकाइयां राजस्थान के भिवाड़ी और मध्य प्रदेश के पीथमपुर, इंदौर क्षेत्र में स्थित हैं।
भारतीय दवा वितरण से शुरू हुआ यह कारोबार समय के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। यूक्रेन में स्थापित फैक्ट्री कंपनी की इसी विस्तार यात्रा का अहम हिस्सा थी। अब ड्रोन हमले में मुख्य इमारत को हुए नुकसान के कारण वहां उत्पादन कार्य प्रभावित हुआ है।
हालांकि, भारत में मौजूद इकाइयों की स्थिति और उनके संचालन पर इस घटना का क्या असर पड़ेगा, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
युद्ध की कीमत अब उद्योगों को भी चुकानी पड़ रही
रूस-यूक्रेन युद्ध का असर केवल सैन्य ठिकानों या सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं है। औद्योगिक प्रतिष्ठानों को होने वाला नुकसान कारोबार, उत्पादन और रोजगार पर भी असर डाल सकता है। सूमी स्थित दवा फैक्ट्री पर हुआ हमला इसका एक उदाहरण है।
राजीव गुप्ता के लिए यह फैक्ट्री करीब डेढ़ दशक से अधिक समय से विकसित किए जा रहे कारोबार का अहम हिस्सा रही है। अब इसके क्षतिग्रस्त होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती नुकसान का आकलन, उत्पादन व्यवस्था की बहाली और आगे के कारोबार को संभालने की होगी।
फिलहाल, कारोबारी के सुरक्षित होने की जानकारी है। फैक्ट्री को हुए नुकसान का शुरुआती अनुमान सामने आया है, लेकिन उत्पादन दोबारा कब शुरू हो सकेगा, इस बारे में स्पष्ट जानकारी का इंतजार है।

