प्रमोशन की खुशी से पहले आई जवान की मृत्यु की खबर, असम में ड्यूटी के दौरान चित्तौड़गढ़ के जितेन्द्र सिंह का निधन
चित्तौड़गढ़ के गंगरार क्षेत्र के 41 वर्षीय सेना जवान जितेन्द्र सिंह चौहान की असम में ड्यूटी के दौरान मौत हो गई। 1 नवंबर को उनका प्रमोशन प्रस्तावित था।
चित्तौड़गढ़ के गंगरार क्षेत्र के एक परिवार के लिए सेना में बेटे की तरक्की का इंतजार चल रहा था। महज 25 दिन बाद परिवार को प्रमोशन की खुशखबरी मिलने वाली थी, लेकिन उससे पहले ऐसी खबर आई जिसने पूरे गांव को गम में डुबो दिया। सेना में तैनात 41 वर्षीय जवान जितेन्द्र सिंह चौहान की असम में ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो गई। परिवार को शुरुआती जानकारी दी गई है कि ऑक्सीजन का स्तर कम होने के बाद उन्हें हार्ट अटैक आया।
जितेन्द्र सिंह 629 साटा बैटरी यूनिट में आरटी हवलदार के पद पर तैनात थे। जानकारी के मुताबिक, 1 नवंबर को उनका प्रमोशन प्रस्तावित था और वे हवलदार से नायब सूबेदार बनने वाले थे। परिवार उनकी नई जिम्मेदारी और पदोन्नति की तैयारी कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही जवान की मृत्यु की खबर घर पहुंच गई।
ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक आने की जानकारी
गंगरार एसडीएम नेहा मिश्रा के मुताबिक, सेना की ओर से परिवार को जवान की मृत्यु की मौखिक सूचना दी गई है। परिजनों को बताया गया कि ड्यूटी के दौरान ऑक्सीजन का स्तर कम होने के बाद जितेन्द्र सिंह को हार्ट अटैक आया था। हालांकि, प्रशासन को अभी तक सेना या सैनिक कल्याण विभाग की ओर से आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
बताया गया है कि गुरुवार सुबह करीब 10 बजे असम में पोस्टमॉर्टम और सेना से जुड़ी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद पार्थिव शरीर को राजस्थान रवाना किया जाएगा। संभावना है कि पार्थिव शरीर एयर एम्बुलेंस से लाया जाए। नसीराबाद छावनी की टीम पार्थिव शरीर को लेकर उनके पैतृक गांव गंगरार क्षेत्र के सूरत सिंह जी का खेड़ा पहुंचेगी।
गुरुवार शाम तक पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद सेना की ओर से पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। जवान की मृत्यु की खबर के बाद गांव में शोक का माहौल है।
22 साल से ज्यादा समय तक सेना में दी सेवाएं
जितेन्द्र सिंह चौहान ने जून 2004 में भारतीय सेना जॉइन की थी। उन्होंने करीब 22 साल 4 महीने तक सेना में रहते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों में सेवाएं दीं। सेना में लंबी सेवा के दौरान उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं।
ग्रामीणों के अनुसार, जब भी जितेन्द्र सिंह छुट्टी पर गांव आते थे, वे युवाओं को सेना में भर्ती होने और देश की सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे। गांव में सेना के जवान के तौर पर उनकी अलग पहचान थी।
परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बेटियां
जितेन्द्र सिंह के परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी कीर्तिराज है, जबकि छोटी बेटी सौम्या करीब एक साल की है। उनके छोटे भाई ललित सिंह राजस्थान पुलिस में कार्यरत हैं।
परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन है। जिस प्रमोशन का इंतजार किया जा रहा था, उसकी तारीख नजदीक थी, लेकिन उससे पहले ही जवान की मृत्यु की खबर आ गई। गांव के लोग भी उनके पार्थिव शरीर के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।

