आंध्र प्रदेश से टकराया चक्रवाती तूफान अर्नब, 135 KM की रफ्तार से चली हवाएं; 50 ट्रेनें और 21 फ्लाइट्स रद्द, 9 राज्यों में अलर्ट

चक्रवात अर्नब आंध्र प्रदेश के तट से टकरा गया है। 135 किमी प्रति घंटे तक हवाएं चलने की सूचना है। 50 ट्रेनें और 21 उड़ानें रद्द, 7 राज्यों में बारिश का खतरा।

आंध्र प्रदेश से टकराया चक्रवाती तूफान अर्नब, 135 KM की रफ्तार से चली हवाएं; 50 ट्रेनें और 21 फ्लाइट्स रद्द, 9 राज्यों में अलर्ट

बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab)आंध्र प्रदेश के तट से टकरा गया है। उपलब्ध शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार देर रात करीब 3:30 बजे तूफान ने तटीय क्षेत्र में दस्तक दी। इस दौरान 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और भारी बारिश की सूचना है।

तूफान के कारण आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। तेज हवाओं और लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। रेल और हवाई सेवाओं पर भी इसका असर पड़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 50 ट्रेनें और विजयवाड़ा तथा विशाखापट्टनम एयरपोर्ट से जुड़ी 21 उड़ानें रद्द की गई हैं।** वहीं, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में लोगों को सुरक्षित रखने के लिए करीब 4,000 साइक्लोन शेल्टर की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है।

 विशाखापट्टनम में 18 घंटे के भीतर 200 मिमी से ज्यादा बारिश

चक्रवाती तूफान का बड़ा असर आंध्र प्रदेश के तटीय शहर विशाखापट्टनम में देखने को मिला है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 27 अक्टूबर की सुबह 8:30 बजे से 28 अक्टूबर की सुबह 3 बजे तक लगभग साढ़े 18 घंटे में शहर में 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई।

बारिश की यह मात्रा विशाखापट्टनम में जुलाई के दौरान होने वाली औसत 133 मिलीमीटर बारिश से लगभग डेढ़ गुना है।

कम समय में इतनी अधिक बारिश होने से निचले इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।

तेज हवाओं के कारण पेड़ों, बिजली की लाइनों और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका रहती है।

तूफान का परिवहन सेवाओं पर असर, यात्रियों की परेशानी बढ़ी

चक्रवाती तूफान के कारण रेल और हवाई यातायात प्रभावित होने की खबर है।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, सुरक्षा कारणों से 50 ट्रेनों और 21 उड़ानों को रद्द किया गया है।

विजयवाड़ा और विशाखापट्टनम एयरपोर्ट से यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी उड़ानों की स्थिति की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।

इसी तरह रेल यात्रियों को स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का परिचालन स्टेटस जांचना चाहिए।

मौसम की स्थिति के अनुसार परिवहन सेवाओं में आगे भी बदलाव संभव हैं।

ओडिशा में 16 जिलों के स्कूल बंद, 30 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

आंध्र प्रदेश के साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी भारी बारिश का असर बताया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा के 16 जिलों में एहतियातन स्कूल बंद किए गए हैं।

इसके अलावा लगभग 30 हजार लोगों को संवेदनशील और निचले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

चक्रवाती तूफान के दौरान तटीय इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और जलभराव की स्थिति गंभीर हो सकती है।

ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और आवश्यक सेवाओं को बनाए रखना है।

आंध्र प्रदेश और ओडिशा के बाद इन 7 राज्यों में भी बारिश का खतरा

तूफान का प्रभाव केवल समुद्र तटीय राज्यों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है।

उपलब्ध मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, इसका असर देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच सकता है।

**तेलंगाना और छत्तीसगढ़:** 28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है। कुछ इलाकों में बेहद भारी बारिश भी हो सकती है।

**मध्य प्रदेश:** पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की आशंका है।

**महाराष्ट्र:** विदर्भ क्षेत्र में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मौसम की स्थिति के अनुसार कुछ इलाकों में भारी बारिश संभव है।

**झारखंड:** 28 से 30 अक्टूबर के बीच बारिश होने का अनुमान है।

**बिहार:** 28 से 30 अक्टूबर तक बारिश की संभावना है। विशेष रूप से 29 और 30 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

**उत्तर प्रदेश:** पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 और 30 अक्टूबर को भारी से बेहद भारी बारिश की आशंका जताई गई है।

इन राज्यों में बारिश की वास्तविक तीव्रता और प्रभावित जिलों की स्थिति मौसम प्रणाली की दिशा और गति पर निर्भर करेगी।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में क्यों दिख सकता है चक्रवात का असर?

चक्रवाती तूफान जब समुद्र से जमीन की ओर बढ़ता है, तो वह अपने साथ बड़ी मात्रा में नमी लेकर आता है।

जमीन पर पहुंचने के बाद आमतौर पर इसकी हवा की रफ्तार धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। हालांकि, इससे जुड़ी मौसम प्रणाली अंदरूनी राज्यों में बारिश करा सकती है।

यही कारण है कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवातों का असर कई बार मध्य भारत और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों तक देखने को मिलता है।

तूफान की तीव्रता कम होने के बाद भी भारी बारिश, जलभराव और स्थानीय बाढ़ जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

किसानों के लिए भी चिंता, खेतों में जलभराव से नुकसान की आशंका

चक्रवाती बारिश का असर कृषि गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

जिन इलाकों में फसल कटाई या बुवाई का काम चल रहा है, वहां लगातार बारिश से किसानों की परेशानी बढ़ सकती है।

खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचने और कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका रहती है।

विशेष रूप से उन क्षेत्रों में सतर्कता जरूरी है, जहां अगले दो दिनों के दौरान भारी बारिश का अनुमान है।

किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार अपने कार्यों की योजना बनानी चाहिए।

अगले 48 घंटे महत्वपूर्ण, प्रशासन की सलाह का पालन करें

चक्रवाती तूफान के प्रभाव को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए अगले 48 घंटे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

तेज बारिश और हवाओं के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए। जलभराव वाले रास्तों से वाहन निकालने और बिजली के खंभों या टूटे तारों के पास जाने से बचना जरूरी है।

चेतावनियों और निकासी संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए।

**फिलहाल आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तूफान का असर सामने आने की रिपोर्ट है, जबकि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत अन्य राज्यों में बारिश की आशंका जताई गई है।**

मौसम प्रणाली की आगे की दिशा और तीव्रता के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति बदल सकती है।