राजस्थान निकाय चुनाव में BJP का बड़ा एक्शन, 41 बागी बाहर; जयपुर से राजसमंद तक सियासी घमासान

राजस्थान नगर निकाय चुनाव से पहले बीजेपी ने पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले 41 पदाधिकारियों को छह साल के लिए निष्कासित किया है। इनमें जयपुर के 26 नेता शामिल हैं, जबकि राजसमंद में AAP के निष्कासित नेता और निर्दलीय उम्मीदवार के बीजेपी समर्थन से सियासी हलचल बढ़ी है।

राजस्थान निकाय चुनाव में BJP का बड़ा एक्शन, 41 बागी बाहर; जयपुर से राजसमंद तक सियासी घमासान

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव का मुकाबला अब आखिरी दौर में पहुंच चुका है और इसके साथ ही राजनीतिक दलों के भीतर अनुशासन की कार्रवाई भी तेज हो गई है। 9 और 11 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले बीजेपी ने पार्टी लाइन से अलग जाकर चुनाव लड़ने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी ने प्रदेश में 41 पदाधिकारियों को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। इनमें अकेले जयपुर से 26 नाम शामिल हैं।

 बीजेपी ने बागियों पर चलाया अनुशासन का डंडा

निकाय चुनाव में बीजेपी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने या अपने परिवार के सदस्यों को चुनाव लड़ाने वाले पदाधिकारियों पर पार्टी ने कार्रवाई की है। छह साल के निष्कासन के फैसले को चुनावी अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

जयपुर इस कार्रवाई का सबसे बड़ा केंद्र रहा, जहां 26 पदाधिकारियों पर पार्टी ने कार्रवाई की है। चुनावी मुकाबले के बीच इतने बड़े स्तर पर निष्कासन से स्थानीय राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है।

 राजसमंद में AAP के निष्कासित नेता का मामला चर्चा में

राजसमंद के वार्ड 22 में AAP उम्मीदवार अमित वर्मा को लेकर भी सियासी विवाद बना हुआ है। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में AAP पहले ही वर्मा को छह साल के लिए निष्कासित कर चुकी है।

इसके बाद उनके कुछ वीडियो सामने आए, जिनको लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। इन वीडियो में बीजेपी के समर्थन की बात सामने आने के बाद वर्मा की भूमिका पर सवाल उठे। दूसरी ओर, वर्मा की ओर से दबाव में वीडियो बनवाए जाने के आरोप लगाए गए हैं। उनकी पत्नी ने भी AAP के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।

ऐसे में राजसमंद का यह वार्ड मुकाबले से ज्यादा राजनीतिक विवाद को लेकर चर्चा में है।

धोइंदा में निर्दलीय प्रत्याशी ने बीजेपी को दिया समर्थन

राजसमंद के धोइंदा वार्ड नंबर 9 में भी चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश हुई है। यहां निर्दलीय उम्मीदवार भरत कुमार ने बीजेपी प्रत्याशी चंपालाल कुमावत को समर्थन देने का ऐलान किया है।

स्थानीय स्तर पर ऐसे समर्थन और बगावत का सीधा असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है, क्योंकि कई वार्डों में मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है।

9 और 11 सितंबर को मतदान, 14 को आएगा फैसला

राजस्थान के 309 नगर निकायों में दो चरणों में मतदान होना है। पहले चरण में 9 सितंबर और दूसरे चरण में 11 सितंबर को वोट डाले जाएंगे। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा।

चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था और शांतिपूर्ण मतदान के लिए प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पहले चरण में 7 सितंबर शाम 6 बजे से 9 सितंबर शाम 6 बजे तक और दूसरे चरण में 9 सितंबर शाम 6 बजे से 11 सितंबर शाम 6 बजे तक सूखा दिवस रहेगा। 14 सितंबर को मतगणना के दिन भी सूखा दिवस लागू रहेगा।

बागियों की चुनौती कितनी बड़ी?

निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद सामने आई नाराजगी ने बीजेपी समेत सभी प्रमुख दलों के लिए चुनौती बढ़ाई है। अब पार्टी नेतृत्व की कोशिश यही है कि बागियों की वजह से अधिकृत प्रत्याशियों के वोटों का बंटवारा न हो।

दूसरी तरफ निर्दलीय उम्मीदवारों और बागी नेताओं का प्रदर्शन कई वार्डों में चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में 9 और 11 सितंबर का मतदान सिर्फ उम्मीदवारों की लोकप्रियता नहीं, बल्कि पार्टियों की अंदरूनी पकड़ की भी परीक्षा बनने जा रहा है।