राजस्थान के गांवों में बिछेगा सड़कों का नया जाल, 3,219 KM के प्रोजेक्ट को मंजूरी; 1,216 सड़क-पुल बदलेंगे कनेक्टिविटी
राजस्थान में PMGSY-4 के तहत 1,216 सड़कों और पुलों के निर्माण को प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी मिली है। करीब ₹2,089.37 करोड़ की लागत से 3,219 किलोमीटर ग्रामीण सड़क नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे गांवों की मंडी, बाजार, स्कूल और अस्पताल तक कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण यानी PMGSY-4 के तहत प्रदेश में 1,216 सड़कों और पुलों के निर्माण को प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के जरिए करीब 3,219 किलोमीटर ग्रामीण सड़क नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
करीब 2,089.37 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत वाली इस योजना का असर केवल गांवों तक सड़क पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर संपर्क मार्गों से किसानों की मंडियों तक पहुंच, बच्चों की स्कूल-कॉलेज तक आवाजाही, मरीजों के अस्पताल पहुंचने और ग्रामीण कारोबार को बाजार से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गांवों से मंडी और बाजार तक आसान होगी राह
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सड़क कनेक्टिविटी की भूमिका बेहद अहम है। कई गांवों में खराब या सीमित सड़क संपर्क के कारण किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है।
नई सड़कों के बनने से कृषि उत्पाद, दूध, सब्जियां और दूसरे ग्रामीण उत्पाद बाजार तक ज्यादा आसानी से पहुंच सकेंगे। इसके साथ ही परिवहन और छोटे कारोबार से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
उदयपुर में 84, डूंगरपुर में 50 सड़कें
PMGSY-4 के तहत अलग-अलग जिलों को भी परियोजनाओं का लाभ मिलेगा। उदयपुर जिले में 84 सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लंबाई करीब 171.35 किलोमीटर है।
डूंगरपुर में 50 ग्रामीण सड़कों को स्वीकृति मिली है। वहीं सलूंबर जिले में 39 सड़कों के लिए करीब 76 किलोमीटर का नेटवर्क प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं पर लगभग 56.68 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है।
प्रतापगढ़ में भी 11 सड़कों के निर्माण के लिए करीब 17.42 किलोमीटर की लंबाई स्वीकृत की गई है।
थार से लेकर शेखावाटी तक कनेक्टिविटी पर जोर
योजना का दायरा राजस्थान के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों तक फैला है। बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर जैसे सीमावर्ती एवं दूरदराज इलाकों में ग्रामीण संपर्क मार्गों के डामरीकरण और विस्तार के काम प्रस्तावित हैं।
चूरू, नागौर, झुंझुनूं और डीडवाना-कुचामन के क्षेत्रों में भी ग्रामीण सड़कों के सुदृढ़ीकरण से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। ऐसे क्षेत्रों में सड़कें गांवों और ढाणियों को मुख्य मार्गों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कोटा-बारां में किसानों को मिल सकता है सीधा फायदा
हाड़ौती क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को देखते हुए सड़क कनेक्टिविटी का महत्व और बढ़ जाता है। कोटा और बारां के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़कें किसानों के लिए मंडियों और स्थानीय बाजारों तक पहुंच आसान कर सकती हैं।
सड़क नेटवर्क मजबूत होने का फायदा केवल फसल बेचने तक सीमित नहीं रहेगा। खाद-बीज, कृषि उपकरण, डेयरी, परिवहन और ग्रामीण व्यापार से जुड़ी गतिविधियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकता है।
स्कूल और अस्पताल तक पहुंच भी होगी आसान
ग्रामीण सड़क परियोजनाओं का सीधा असर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ता है। बेहतर सड़क होने से विद्यार्थियों के लिए स्कूल-कॉलेज तक पहुंच आसान हो सकती है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में भी समय कम हो सकता है।
खासकर बारिश के दौरान जिन गांवों में सड़क संपर्क बाधित हो जाता है, वहां मजबूत और टिकाऊ सड़क नेटवर्क बेहद अहम साबित हो सकता है।
3,219 KM सड़कें, लेकिन असली परीक्षा गुणवत्ता की
PMGSY-4 के तहत 3,219 किलोमीटर सड़क निर्माण की मंजूरी निश्चित तौर पर ग्रामीण राजस्थान के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार है। लेकिन इस योजना का वास्तविक फायदा तभी दिखाई देगा, जब परियोजनाएं समय पर पूरी हों और निर्माण की गुणवत्ता के साथ रखरखाव पर भी बराबर ध्यान दिया जाए।
अगर ये सड़कें तय मानकों के अनुसार तैयार होती हैं, तो राजस्थान के हजारों ग्रामीण परिवारों के लिए गांव से बाजार, मंडी, स्कूल और अस्पताल तक पहुंच पहले के मुकाबले आसान हो सकती है। यानी यह सिर्फ सड़क बनाने की योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण कनेक्टिविटी के जरिए विकास की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश है।

