राजस्थान पंचायत चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी: 23 अक्टूबर से मतदान, 20 नवंबर को जिला परिषद-पंचायत समिति के नतीजे; सरपंच चुनाव 16 नवंबर तक
Rajasthan Panchayat Election 2026 का शेड्यूल जारी हो गया है। जिला परिषद-पंचायत समिति के चुनाव 23 अक्टूबर से 14 नवंबर तक और पंच-सरपंच चुनाव 25 अक्टूबर से 16 नवंबर तक होंगे।
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव का इंतजार खत्म हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने शनिवार को चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया। प्रदेश में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चार चरणों में होंगे। मतदान की शुरुआत 23 अक्टूबर से होगी और अंतिम चरण का मतदान 14 नवंबर को कराया जाएगा। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव का परिणाम 20 नवंबर को घोषित किया जाएगा।
इसी के साथ ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव भी चार चरणों में कराए जाएंगे। इनके लिए मतदान 25 अक्टूबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगा। खास बात यह है कि सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव का परिणाम मतदान वाले दिन ही देर रात तक जारी कर दिया जाएगा।
कब-कब होगा जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव?
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए पहले चरण का मतदान 23 अक्टूबर को होगा। दूसरे चरण में 29 अक्टूबर, तीसरे चरण में 4 नवंबर और चौथे एवं अंतिम चरण में 14 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। सभी चरणों की मतगणना एक साथ 20 नवंबर को होगी।
इस चुनाव में 41 जिला परिषदों और 457 पंचायत समितियों के लिए सदस्य चुने जाएंगे। चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचायत समितियों और जिला परिषदों में नए जनप्रतिनिधियों का गठन होगा।
सरपंच चुनाव का अलग शेड्यूल
ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव भी चार चरणों में होंगे। पहले चरण का मतदान 25 अक्टूबर, दूसरे चरण का 31 अक्टूबर, तीसरे चरण का 6 नवंबर और चौथे चरण का मतदान 16 नवंबर को होगा।
सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव में मतगणना के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मतदान खत्म होने के बाद उसी दिन देर रात तक परिणाम जारी किए जाएंगे।
20 नवंबर को आएगा बड़ा रिजल्ट
पंचायतीराज चुनाव में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के नतीजे 20 नवंबर को सामने आएंगे। यही परिणाम आगे जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव के लिए भी आधार तैयार करेंगे।
जिला परिषद के सदस्य अपने बीच से जिला प्रमुख का चुनाव करते हैं, जबकि पंचायत समिति सदस्य प्रधान का चुनाव करते हैं। ऐसे में सदस्य चुनाव के नतीजों के बाद जिला प्रमुख और प्रधान पदों को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
कोटा समेत चार जिलों में बाद में होंगे प्रमुख-प्रधान के चुनाव
कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली जिलों में जिला प्रमुख और प्रधान का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होगा। इसलिए इन चार जिलों में प्रमुख और प्रधान के चुनाव बाद में कराए जाएंगे।
हालांकि इन जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव बाकी जिलों के साथ ही होगा। यानी सदस्य पदों के लिए यहां भी चुनावी प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चलेगी, जबकि प्रमुख और प्रधान के चुनाव कार्यकाल पूरा होने के बाद होंगे।
किस चुनाव में EVM और किसमें बैलेट?
पंचायतीराज चुनाव में मतदान के तरीके को लेकर भी आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव EVM के जरिए होंगे। वहीं ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएंगे।
इस चुनावी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाता अपने स्थानीय प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे।
41 जिलों में जयपुर के सबसे ज्यादा मतदाता
पंचायतीराज चुनाव में पुरुष मतदाताओं की हिस्सेदारी 51.82 प्रतिशत है, जबकि महिला मतदाता 48.18 प्रतिशत हैं। 41 जिलों में जयपुर में सबसे ज्यादा करीब 18.99 लाख मतदाता हैं। दूसरी ओर जैसलमेर में मतदाताओं की संख्या सबसे कम करीब 4.36 लाख है।
जिलों और पंचायतों के पुनर्गठन के बाद इस बार पंचायतीराज चुनाव का दायरा पिछले चुनावों की तुलना में बदला हुआ है। पहले प्रदेश में 33 जिला परिषद थीं, जबकि अब 41 जिला परिषदों में चुनाव हो रहे हैं। इसी तरह पंचायत समितियों की संख्या 352 से बढ़कर 457 हो गई है।
1.69 लाख से ज्यादा जनप्रतिनिधियों का चुनाव
इस बार पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में करीब 1.69 लाख जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। 1403 जिला परिषद सदस्यों और 8245 पंचायत समिति सदस्यों के पदों पर चुनाव होगा।
इसके अलावा 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और उपसरपंच चुने जाएंगे। करीब 1.30 लाख वार्ड पंचों के पदों के लिए भी चुनाव होगा। यानी गांव से लेकर जिला स्तर तक बड़ी संख्या में नए जनप्रतिनिधि सामने आएंगे।
महिलाओं की हिस्सेदारी रहेगी अहम
पंचायतीराज चुनाव में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसके चलते इस बार भी बड़ी संख्या में महिलाएं पंचायतीराज संस्थाओं में प्रतिनिधित्व करेंगी।
14,403 ग्राम पंचायतों में करीब 7,200 महिला सरपंच और 7,200 महिला उपसरपंच चुने जाने हैं। इसके अलावा करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच चुने जाएंगे।
सरपंच पदों में एसटी के लिए 3058, एससी के लिए 2493 और ओबीसी के लिए 1961 पद आरक्षित किए गए हैं। वहीं करीब 1.30 लाख वार्ड पंच पदों में 21,962 पद एससी, 19,117 एसटी और करीब 15 हजार पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
चुनाव कार्यक्रम के साथ ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू
पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। इसके चलते सरकारी स्तर पर कई तरह की गतिविधियों पर रोक रहेगी।
सरकारी तबादलों पर पाबंदी रहेगी। मंत्री अपने क्षेत्रों में सरकारी वाहनों का इस्तेमाल कर चुनावी प्रभाव वाले दौरे नहीं कर सकेंगे। सरकारी गेस्ट हाउस और डाक बंगलों के इस्तेमाल को लेकर भी आचार संहिता के नियम लागू होंगे।
सरकार नई योजनाओं और ऐसे कार्यक्रमों की घोषणा नहीं कर सकेगी, जिनसे मतदाताओं पर प्रभाव पड़ने की संभावना हो। हालांकि पहले से स्वीकृत और चल रहे विकास कार्य जारी रह सकते हैं। जिन टेंडरों की प्रक्रिया चुनाव की घोषणा से पहले शुरू हो चुकी है, उन पर भी नियमों के अनुसार काम जारी रखा जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रमों पर भी आचार संहिता का असर रहेगा।
पंचायत चुनाव में सियासी ताकत की परीक्षा
पंचायतीराज चुनावों के नतीजे ग्रामीण राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्य सीधे तौर पर स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते हैं। यही सदस्य आगे जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव में भूमिका निभाते हैं।
इसलिए 20 नवंबर को आने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के नतीजों के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं। कई जगहों पर जिला प्रमुख और प्रधान पद के लिए बहुमत का गणित महत्वपूर्ण होगा।
जिला प्रमुख-प्रधान के चुनाव में क्या होगा?
जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य अपने बीच से जिला प्रमुख चुनेंगे। इसी तरह पंचायत समिति के सदस्य प्रधान का चुनाव करेंगे। ऐसे में सदस्य पदों के चुनाव के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि किस राजनीतिक दल और उम्मीदवारों के पास कितने निर्वाचित सदस्य हैं।
स्थानीय निकाय चुनावों की तरह यहां भी सदस्य संख्या के आधार पर अलग-अलग राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं। खासकर उन जगहों पर जहां किसी एक पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, वहां स्थानीय स्तर पर समर्थन और समीकरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
राजस्थान में अब पंचायत चुनाव का पूरा कार्यक्रम सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। 23 अक्टूबर से शुरू होने वाली मतदान प्रक्रिया 16 नवंबर तक चलेगी, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के नतीजे 20 नवंबर को सामने आएंगे।

