NEET पेपर गड़बड़ी की जांच में बड़े खुलासे, राजस्थान से केरल तक फैले नेटवर्क की जांच तेज

राजस्थान में कथित पेपर लीक और वायरल “गेस पेपर” मामले की जांच में SOG को बड़े सुराग मिले हैं। जांच के तार केरल, सीकर और देहरादून तक जुड़े मिले। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और प्रिंटिंग प्रेस कनेक्शन की जांच तेज

NEET पेपर गड़बड़ी की जांच में बड़े खुलासे, राजस्थान से केरल तक फैले नेटवर्क की जांच तेज
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राजस्थान में परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर चल रही एसओजी जांच में अब कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि कथित पेपर लीक और “गेस पेपर” का नेटवर्क सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं, बल्कि इसके तार दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां लगातार डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी हैं।

एसओजी एडीजी विशाल बंसल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि परीक्षा से पहले सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में एक “गेस पेपर” वायरल हुआ था। जांच में सामने आया है कि यह पेपर केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने सीकर स्थित अपने पिता को भेजा था। छात्र के पिता सीकर में पीजी हॉस्टल संचालित करते हैं। वहीं से यह पेपर अन्य छात्रों, करियर काउंसलर्स और अलग-अलग ग्रुप्स तक पहुंचता चला गया।

शिकायत के बावजूद शुरुआत में नहीं हुई कार्रवाई

परीक्षा के दिन कुछ छात्रों ने सीकर के उद्योग नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन शुरुआती स्तर पर इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। बाद में छात्रों ने सबूतों के साथ एनटीए को ईमेल भेजा, जिसके बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं। शुरुआत में एनटीए के स्थानीय को-ऑर्डिनेटर ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था।

हॉस्टल संचालक ने बताई पूरी कहानी

जांच के दौरान हॉस्टल संचालक ने बताया कि उसे शुरुआत में मामले की गंभीरता का अंदाजा नहीं था। उसके अनुसार, उसने रात में पेपर नहीं देखा और अगले दिन परीक्षा से पहले हॉस्टल की छात्राओं को दे दिया। परीक्षा खत्म होने के बाद जब शक हुआ तो वह एक कोचिंग शिक्षक के पास पहुंचा। वहां पता चला कि “गेस पेपर” के कई सवाल असली परीक्षा में भी आए थे।

देहरादून और सीकर में एसओजी की छापेमारी

एसओजी के मुताबिक, यह गेस पेपर परीक्षा से पहले कई छात्रों और ग्रुप्स तक पहुंच चुका था। अब एजेंसी सोशल मीडिया चैट, व्हाट्सएप ग्रुप्स और डिजिटल डेटा की जांच कर रही है। जिस फोटोकॉपी दुकान से पेपर मिलने की जानकारी सामने आई, वहां से दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए गए हैं।

इस मामले में जयपुर निवासी मनीष और सीकर के राकेश को अहम किरदार माना जा रहा है। जांच के तहत एसओजी की टीमें राजस्थान के सीकर और उत्तराखंड के देहरादून समेत कई जगहों पर छापेमारी और पूछताछ कर चुकी हैं। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि कथित पेपर लीक की शुरुआत आखिर कहां से हुई।

प्रिंटिंग प्रेस कनेक्शन की भी जांच

जांच एजेंसियों को शक है कि गेस पेपर तैयार करने और उसे छात्रों तक पहुंचाने में प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े कुछ कर्मचारियों और अंदरूनी लोगों की भूमिका भी हो सकती है। इसी एंगल से अब जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गेस पेपर सबसे पहले किसने तैयार किया और यह किन-किन लोगों तक पहुंचा