फर्जी FIR, नकली पुलिस और 17 लाख की ठगी—डॉक्टर बना साइबर ठगों का शिकार
श्रीनगर में ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ जैसे तरीके से साइबर ठगों ने एक डॉक्टर से ₹17 लाख ठग लिए। खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर आरोपियों ने फर्जी FIR और धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करवाए।
राजस्थान के श्रीगंगानगर से साइबर अपराध का एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां शातिर ठगों ने कानून का डर दिखाकर एक डॉक्टर को अपना निशाना बनाया। खुद को पुलिस अधिकारी बताकर आरोपियों ने पहले झूठे आरोपों में फंसाने की धमकी दी और फिर मानसिक दबाव बनाकर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी अब नए-नए तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं, जिससे सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है।
मुंबई क्राइम ब्रांच का सब-इंस्पेक्टर बताकर धमकाया
आपको बता दें कि पीड़ित को एक व्हाट्सएप कॉल आया और कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का सब इंस्पेक्टर बताया।
जिसमें आरोपी द्वारा यह कहा गया कि डॉक्टर के नाम से फर्जी सिम रजिस्टर्ड है। जिससे उसका इस्तेमाल देशद्रोह जैसे गतिविधियों में हो रहा है।
नकली FIR भेजकर डॉक्टर को जाल में फंसाया
जानकारी के लिए बता दें की पीड़ित को झांसे में लेने के लिए आरोपी ने फर्जी फिर की कॉपी भेजी। और कॉल कर आरोपी दबाव बनाते रहा जिस कारण से डॉक्टर आरोपी के झांसे में फस गया। इसी दौरान मौके का फायदा उठाकर ठगो ने उनसे उनके आधार कार्ड की कॉपी भी व्हाट्सएप मंगवा ली, जिससे ठगी की साजिश और मजबूत हो गई।
17 लाख रुपए करवाए ट्रांसफर
आरोपी ने मनी लॉन्ड्रिंग और देशद्रोह जैसे गंभीर मामलों का डर दिखाकर पीड़ित ने 19 मार्च को आरटीजीएस के जरिए 17 लाख रुपये ठगों के जरिए बताए गए खाते में भेज दिए। साइबर ठगो के ऊपर साफ होने पर डॉक्टर ने इसकी शिकायत साइबर थाने में दर्ज कराई। पुलिस ने आईटी एक्ट और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
Saloni Kushwaha 
