राजस्थान का सबसे लंबा हाई-लेवल ब्रिज तैयार, 134 करोड़ की लागत से बना 3.34 KM लंबा पुल

टोंक में बनास नदी पर 3.34 किलोमीटर लंबा हाई-लेवल ब्रिज तैयार हुआ है। करीब 134.74 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट की खास बातें जानें।

राजस्थान का सबसे लंबा हाई-लेवल ब्रिज तैयार, 134 करोड़ की लागत से बना 3.34 KM लंबा पुल

टोंक के गहलोद के पास बनास नदी पर तैयार हुआ हाई-लेवल ब्रिज। करीब 134.74 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से टोंक, मालपुरा, पीपलू और आसपास के इलाकों में सालभर कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

बनास नदी पर तैयार हुआ राजस्थान का सबसे लंबा हाई-लेवल ब्रिज

टोंक जिले में बनास नदी पर गहलोद गांव के पास राजस्थान का सबसे लंबा हाई-लेवल ब्रिज तैयार हो गया है। करीब 3.34 किलोमीटर लंबे इस ब्रिज को लगभग 134.74 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। प्रोजेक्ट का निर्माण सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से सेंट्रल रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (CRIF) के सहयोग से किया गया है।

यह पुल ऐसे क्षेत्र में बनाया गया है, जहां मानसून के दौरान बनास नदी में पानी बढ़ने से पुराना रास्ता प्रभावित हो जाता था। इससे कई गांवों और कस्बों का सड़क संपर्क बाधित होता था।

3.34 किलोमीटर है ब्रिज की कुल लंबाई

इस हाई-लेवल ब्रिज की कुल लंबाई करीब 3,340 मीटर है। इसमें लगभग 2 किलोमीटर का मुख्य पुल और करीब 1.34 किलोमीटर की एप्रोच सड़कें शामिल हैं।

मुख्य पुल में 40-40 मीटर के 50 प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट स्पैन बनाए गए हैं। निर्माण में पुल की मजबूती और भारी वाहनों के आवागमन को ध्यान में रखते हुए संरचनात्मक मानकों का इस्तेमाल किया गया है।

243 टन तक भार वहन करने की क्षमता

जानकारी के अनुसार पुल की भार वहन क्षमता करीब 243 टन है। इससे भारी मालवाहक और व्यावसायिक वाहनों के आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

पुल की मजबूती जांचने के लिए भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के तहत पांच चरणों में लोड टेस्टिंग की गई। टेस्टिंग में करीब 92 प्रतिशत संरचनात्मक रिकवरी दर्ज की गई, जबकि 85 प्रतिशत या उससे अधिक रिकवरी को तकनीकी तौर पर संतोषजनक माना जाता है।

मानसून में कनेक्टिविटी की समस्या होगी कम

बनास नदी में पानी बढ़ने पर पुराने रपटे और कॉजवे के डूबने से इस क्षेत्र में आवागमन प्रभावित होता था। कई बार लोगों को दूसरे रास्तों से होकर करीब 30 से 40 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी।

नए हाई-लेवल ब्रिज से पीपलू, मालपुरा, टोडारायसिंह, फागी और अजमेर की ओर आने-जाने वाले लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। खासकर बारिश के मौसम में सड़क संपर्क बनाए रखने में यह पुल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

किसानों, मरीजों और विद्यार्थियों को मिलेगा फायदा

ब्रिज के शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों से कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचाने में आसानी हो सकती है। इसके अलावा मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और विद्यार्थियों व रोजाना आवागमन करने वाले लोगों के लिए भी यात्रा सुगम होने की उम्मीद है।

क्षेत्र में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापार और दूसरे आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सालभर सुरक्षित आवागमन का रास्ता होगा आसान

बनास नदी पर बने इस हाई-लेवल ब्रिज का सबसे बड़ा फायदा मानसून के दौरान देखने को मिल सकता है। नदी में जलस्तर बढ़ने के बावजूद पुल के जरिए आवागमन जारी रखने का रास्ता तैयार हुआ है।

इससे टोंक और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों को पुराने रपटे के डूबने या क्षतिग्रस्त होने के कारण होने वाली परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।