पेपर लीक पर सख्त मोदी सरकार, आज लोकसभा में आएगा नया संशोधन बिल; फास्ट ट्रैक कोर्ट से लेकर STF तक होंगे बड़े बदलाव

लोकसभा में आज सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पेश होगा। जानें 7 बड़े बदलाव, फास्ट ट्रैक कोर्ट, STF, जांच और सजा से जुड़े नए प्रावधान।

पेपर लीक पर सख्त मोदी सरकार, आज लोकसभा में आएगा नया संशोधन बिल; फास्ट ट्रैक कोर्ट से लेकर STF तक होंगे बड़े बदलाव
Pm Modi

देशभर में पेपर लीक और परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पेश किया जाएगा। इस विधेयक का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर सख्त नियंत्रण, त्वरित जांच और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।

कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सदन में इस विधेयक को पेश करेंगे। प्रस्तावित संशोधनों में सात प्रमुख बदलाव शामिल हैं, जिनके जरिए मौजूदा कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी की गई है।

क्यों लाई जा रही है संशोधन की जरूरत?

NEET-UG 2026 परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठे। इसके बाद देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन हुआ और शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई। इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद सरकार परीक्षा सुधारों को लेकर सक्रिय नजर आ रही है।

सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून में मौजूद व्यावहारिक कमियों को दूर कर जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज और प्रभावी बनाया जाना जरूरी है।

संशोधन बिल की प्रमुख बातें

  • प्रस्तावित विधेयक के तहत परीक्षा संबंधी अपराधों की सुनवाई और जांच को समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।
  • प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट घोषित करने का अधिकार मिलेगा।
  • परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई रोजाना के आधार पर होगी।
  • चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • जांच एजेंसियों को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
  • राज्यों को परीक्षा संबंधी मामलों के लिए विशेष सरकारी वकील नियुक्त करने का अधिकार मिलेगा।
  • कई राज्यों में फैले या संगठित पेपर लीक मामलों की जांच के लिए केंद्र सरकार विशेष टास्क फोर्स (STF) गठित कर सकेगी।
  • संगठित पेपर लीक में शामिल व्यक्तियों, कोचिंग संस्थानों और सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कड़ी जेल की सजा और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान किया जाएगा।

मानसून सत्र में रहेगा अहम मुद्दा

20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। ऐसे माहौल में सरकार यह संशोधन विधेयक लाकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का संदेश देना चाहती है।

क्या होगा असर?

यदि यह संशोधन विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों की जांच और सुनवाई पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज होगी। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से दोषियों पर जल्द कार्रवाई होगी और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत होगी।

मुख्य बिंदु-

आज लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक-2026 पेश होगा।

  • परीक्षा धोखाधड़ी रोकने के लिए सात बड़े संशोधन प्रस्तावित।
  • हर राज्य में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जा सकेंगे।
  • जांच दो महीने और सुनवाई तीन महीने में पूरी करने का लक्ष्य।
  • संगठित पेपर लीक मामलों के लिए केंद्र विशेष STF गठित कर सकेगा।
  • दोषी व्यक्तियों, कोचिंग संस्थानों और सेवा प्रदाताओं पर कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान।