राहुल गांधी को बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका, PM मोदी पर टिप्पणी वाले मानहानि केस में समन बरकरार

राहुल गांधी को कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने 2019 में मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से जारी समन रद्द करने से इनकार कर दिया। मामला 2018 में राजस्थान की एक राजनीतिक सभा में पीएम नरेंद्र मोदी पर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा है।

राहुल गांधी को बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका, PM मोदी पर टिप्पणी वाले मानहानि केस में समन बरकरार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने 2019 में मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से जारी किए गए समन को रद्द करने से इनकार कर दिया है। यह मामला सितंबर 2018 में राजस्थान में हुई एक राजनीतिक सभा में राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है।

2018 की रैली से जुड़ा है मामला

शिकायतकर्ता और बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने आरोप लगाया था कि राजस्थान में आयोजित एक रैली के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मानहानिकारक टिप्पणी की थी। इसी आधार पर उन्होंने मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी।

मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अगस्त 2019 में राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था। जुलाई 2021 में समन मिलने के बाद राहुल गांधी ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख करते हुए इस आदेश को चुनौती दी थी।

राहुल गांधी ने कोर्ट में क्या कहा?

राहुल गांधी की ओर से दलील दी गई कि शिकायत कानूनी तौर पर टिकाऊ नहीं है। उनका कहना था कि उनके बयान में किसी राजनीतिक पार्टी का नाम नहीं लिया गया था और न ही किसी स्पष्ट एवं पहचान योग्य वर्ग को निशाना बनाया गया था। ऐसे में उनके मुताबिक किसी निश्चित व्यक्ति या समूह को कानूनी रूप से पीड़ित नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

मामले में सरकारी पक्ष की ओर से एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने दलील दी कि प्रथम दृष्टया अपराध का मामला बनता है। उन्होंने CrPC की धारा 199 और IPC की धारा 499 के प्रावधानों का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता के कानूनी अधिकार का समर्थन किया।

बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस नितिन बोरकर ने राहुल गांधी की दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि बीजेपी एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी होने के कारण पहचान योग्य संस्था है। शिकायतकर्ता के बीजेपी से लंबे समय से जुड़े होने के दावे और राहुल गांधी की टिप्पणी को देखते हुए इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि बयान केवल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक सीमित था।

अब आगे क्या?

हाई कोर्ट के समन रद्द करने से इनकार करने के बाद राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत पर निचली अदालत में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुला है। हालांकि, हाई कोर्ट का यह फैसला मामले के अंतिम दोष या निर्दोष होने का फैसला नहीं है, बल्कि समन को रद्द करने की मांग से जुड़ा है।