Jaipur Weather News: पहली ही बारिश में खुली जयपुर की सड़कों की पोल, जगह-जगह धंसी सड़कें; कांग्रेस-BJP में आरोप-प्रत्यारोप
जयपुर में मानसून की पहली बारिश के बाद कई जगह सड़कें धंस गईं और बड़े गड्ढे बन गए। टोंक रोड, मानसरोवर समेत कई इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त होने पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।
मानसून की पहली बारिश ने राजस्थान की राजधानी जयपुर में राहत के साथ नई मुश्किलें भी खड़ी कर दी हैं। शहर के कई हिस्सों में सड़कें धंसने, बड़े गड्ढे बनने और जलभराव की घटनाओं ने नगर निगम और विकास एजेंसियों के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच अब यह मामला राजनीतिक रंग भी पकड़ चुका है और कांग्रेस व भाजपा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं।
पहली बारिश में ही सड़कों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
जयपुर में मानसून की शुरुआती बारिश के बाद कई प्रमुख मार्गों पर सड़कें अचानक धंस गईं। सबसे चर्चित मामला टोंक रोड के लालकोठी इलाके का रहा, जहां छह लेन वाली सड़क का बड़ा हिस्सा बैठ गया। सड़क धंसने से लगभग 60 से 70 फीट तक का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय वहां कोई वाहन या राहगीर मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
मानसरोवर में गड्ढे में फंसी कार
शहर के मानसरोवर क्षेत्र में भी सड़क धंसने की घटना सामने आई। गंगा-जमुना पेट्रोल पंप के सामने सड़क का हिस्सा अचानक टूट गया, जिससे वहां खड़ी एक कार का आधा हिस्सा गड्ढे में फंस गया। समय रहते क्रेन बुलाकर वाहन को बाहर निकाल लिया गया, जिससे नुकसान और बढ़ने से बच गया।

दो दर्जन से अधिक स्थानों पर सड़कें हुईं क्षतिग्रस्त
टोंक रोड और मानसरोवर तक ही समस्या सीमित नहीं रही। शहर के विभिन्न इलाकों में दो दर्जन से ज्यादा स्थानों पर सड़कें टूटने और गड्ढे बनने की शिकायतें सामने आई हैं। कई जगह वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हुए, जबकि कुछ लोगों के घायल होने की भी जानकारी मिली है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग हर प्रमुख इलाके में सड़कें बारिश का दबाव नहीं झेल पा रही हैं, जिससे रोजाना आवागमन जोखिम भरा होता जा रहा है।
हर साल दोहराई जाती है यही समस्या
जयपुर में बारिश के मौसम के दौरान सड़कें टूटने और गड्ढे बनने की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। लगभग हर मानसून में शहर के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं। बारिश खत्म होने के बाद मरम्मत का काम शुरू होता है, लेकिन अगले मानसून में फिर वही हालात देखने को मिलते हैं। इस कारण नागरिक अब इसे केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव की बड़ी चुनौती मान रहे हैं।
लोगों में बढ़ा आक्रोश
बारिश के बाद सड़कें खराब होने से आम लोगों में नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि इस बार अभी भारी बारिश भी नहीं हुई है, फिर भी शहर की सड़कें जगह-जगह धंस रही हैं। लोगों का सवाल है कि यदि शुरुआती बारिश में यह स्थिति है तो लगातार तेज बारिश होने पर हालात और गंभीर हो सकते हैं।
सड़कों पर सियासी घमासान
सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा सरकार जनता की मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दे रही है और विकास कार्यों की अनदेखी हो रही है।
वहीं भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने इन हालात के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि पिछली सरकार के समय हुए निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी का असर अब सामने आ रहा है और जनता को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।
जिम्मेदारी किसकी?
जयपुर में हर पांच साल बाद सरकार बदलने की राजनीतिक परंपरा रही है। ऐसे में सड़कों की मौजूदा स्थिति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समय पर निगरानी और नियमित रखरखाव से जुड़ा विषय है।
आगे क्या?
शहरवासियों की मांग है कि बारिश के बाद केवल अस्थायी मरम्मत करने के बजाय सड़क निर्माण की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही जिन परियोजनाओं में लापरवाही सामने आए, उनके जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए ताकि हर मानसून में दोहराई जाने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सके।

