राजस्थान में फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम 9 दिनों में तीसरी बार महंगा हुआ ईंधन

राजस्थान में पेट्रोल 96 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। जयपुर में पेट्रोल 109.87 रुपये और डीजल 95.05 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ईरान-अमेरिका तनाव को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।

राजस्थान में फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम 9 दिनों में तीसरी बार महंगा हुआ ईंधन

राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। पेट्रोल की कीमत में 96 पैसे और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। महज 9 दिनों के भीतर ईंधन कीमतों में यह तीसरी बढ़ोतरी है, जिससे आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

नई दरें लागू होने के बाद राजधानी जयपुर में पेट्रोल की कीमत 108.91 रुपये से बढ़कर 109.87 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल 94.14 रुपये से बढ़कर 95.05 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। शनिवार सुबह से ही शहर के पेट्रोल पंपों पर नई दरें लागू कर दी गईं।

इससे पहले भी दो बार बढ़ चुके हैं दाम

राजस्थान में हाल के दिनों में लगातार ईंधन महंगा हुआ है। 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। वहीं 15 मई को करीब 3 रुपये प्रति लीटर तक कीमत बढ़ाई गई थी। लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब ट्रांसपोर्ट, रोजमर्रा की वस्तुओं और आम उपभोक्ताओं की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी वजह

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से पहले क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। इसी दबाव को कम करने के लिए कंपनियां लगातार ईंधन के दाम बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल और महंगे हो सकते हैं।

डिपो की दूरी के आधार पर तय होती है कीमत

राजस्थान पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी के अनुसार प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें डिपो के आधार पर तय की जाती हैं। जिस पेट्रोल पंप तक डिपो से ईंधन पहुंचाने में जितना अधिक ट्रांसपोर्ट खर्च आता है, उसी हिसाब से प्रति लीटर कीमत में अंतर देखने को मिलता है।

इसी वजह से जयपुर शहर और बाहरी इलाकों में भी पेट्रोल-डीजल की दरों में थोड़ा फर्क हो सकता है। हालांकि यह अंतर आमतौर पर कुछ पैसों तक ही सीमित रहता है।

कैसे तय होती है पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत?

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर तय की जाती हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नई दरें जारी करती हैं।

अंतिम कीमत में शामिल होते हैं ये खर्च

1. कच्चे तेल की बेस कीमत

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत सीधे ईंधन की लागत को प्रभावित करती है।

2. रिफाइनिंग और कंपनियों का खर्च

कच्चे तेल को रिफाइनरियों में प्रोसेस कर पेट्रोल और डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन जुड़ता है।

3. एक्साइज ड्यूटी और टैक्स

केंद्र सरकार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस लगाती है, जबकि राज्य सरकारें वैट वसूलती हैं। यही टैक्स अंतिम कीमत को काफी बढ़ा देते हैं।

4. ट्रांसपोर्टेशन खर्च

डिपो से पेट्रोल पंप तक ईंधन पहुंचाने का खर्च भी कीमत में शामिल होता है। यही कारण है कि अलग-अलग शहरों और इलाकों में दरों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है।