मेलोडी, झालमुड़ी के बाद अब 'मक्के की रोटी-सरसों का साग'

बीजेपी की ग्राउंड वर्किंग काफी मजबूत है, वो इसीलिए क्योंकि चुनाव के वक्त पीएम मोदी ने झालमुड़ी खाई और फिर पूरा माहौल ही बदल गया।

मेलोडी, झालमुड़ी के बाद अब 'मक्के की रोटी-सरसों का साग'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आईक्यू लेवल क्या हो सकता है ये इससे अंदाजा लगा सकते हैं. अभी ट्रेंड में मेलोडी चल रही है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को गिफ्ट में मेलोडी टॉफी की. इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. करोड़ों में व्यूज पहुंच चुके हैं, पीएम मेलोनी के नाम पर मेलोडी के रेमिडी होने से बाजार में अह मेलोडी की ही चर्चा है. लेकिन क्या आप जानते हैं इससे पहले भी पीएम मोदी का बंगाल में झालमुड़ी का जादू चला।


पीएम मोदी ने बंगाल चुनाव के दौरान झालमुड़ी खाई और फिर झालमुड़ी इंटरनेशनल ब्रांड बन गया, लोग झालमुड़ी के दीवाने हो गए, जिस दुकान पर पीएम ने झालमुड़ी खाई थी वो तो अब लाखों में खेल रहा है, हर रोज उसके ग्राहकों में बढ़ोतरी हो रही है.


इससे पहले बिहार में जब चुनाव था तो पीएम मोदी ने वहां की लोकल डिश लिट्टी-चोखा को चखा था, यानि पीएम जिस राज्य में जाते हैं तो वहां की स्टडी तो करते ही हैं, लेकिन वहां के खान पान पर भी उनका खासा ध्यान रहता है.


अब पंजाब का 'सरसों का साग-मक्के की रोटी'
बंगाल चुनाव के खत्म होते ही बीजेपी अब मिशन पंजाब पर वर्क करना शुरू कर चुकी है. अब पंजाब में बीजेपी अपना वजूद बनाएगी इसको लेकर ग्राउंड पर कार्यकर्ता काम कर रहे हैं. राज्य में पार्टी के ढांचे को मजबूत कर रही है और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार कर रही है.


स्थानीय मुद्दों पर जोर
पंजाब में पिछले विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव व उपचुनाव में BJP को कामयाबी नहीं मिली। इधर पार्टी ने राज्य में जमीन मजबूत करने की कोशिशें तेज की हैं। मगर सवाल है कि पंजाब के लिए BJP की रणनीति क्या होगी? क्या उसे पश्चिम बंगाल की तरह पंजाब के लिए अलग रणनीति बनानी होगी?

सवाल ये भी है कि क्या छह वर्षों के बाद फिर से BJP पुराने सहयोगी अकाली दल के साथ हाथ मिलाएगी? राज्य में BJP ने TMC सरकार को तुष्टिकरण की राजनीति, महिला सुरक्षा, बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों पर घेरा था। TMC की पिछले 15 वर्षों से राज्य में सरकार थी और उससे लोगों की नाराजगी का फायदा भी BJP को मिला

AAP में फूट का असर
पंजाब से BJP में आए छह राज्यसभा सांसदों के जरिए वह AAP के संगठनात्मक ढांचे को तोड़ने में कामयाब हो सकती है। पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार रहे राघव चड्ढा, संदीप पाठक दलबदल के बाद रोज AAP पर हमले कर रहे हैं। BJP को लगता है कि इनकी मदद से राज्य में वह जनाधार बढ़ाने में कामयाब होगी। देखना यह भी होगा कि AAP के बाकी नेता चुनाव की घोषणा होने तक एकजुट रहते हैं या नहीं?

अकाली दल से समझौता
कृषि कानूनों के मुद्दे पर 2020 में अकाली दल से अलग होने के बाद, 2024 लोकसभा चुनाव में दोनों के साथ आने की बात तो चली थी, पर ऐसा हो नहीं पाया। एक बार फिर से इसकी कोशिश होती दिख रही है। हालांकि दोनों दलों के नेता यही कह रहे हैं कि वे पंजाब की सभी सीटों के लिए अलग-अलग तैयारी कर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में AAP को 117 में से 92, कांग्रेस को 18, अकाली दल को 3, BJP को 2 सीटें मिली थीं।